ओवेरियन सिस्ट टॉर्शन (अंडाशय की गांठ का मुड़ना): कारण, लक्षण, निदान और इलाज
परिचय
महिलाओं के पेट के निचले हिस्से में अचानक होने वाला तेज़ दर्द कई कारणों से हो सकता है, लेकिन उनमें से एक ऐसी स्थिति है जिसे तुरंत इलाज की ज़रूरत होती है। इसे ओवेरियन टॉर्शन कहते हैं। जब अंडाशय (ओवरी) में कोई गांठ या सिस्ट होती है और अंडाशय अपनी सहायक नलिकाओं और रक्त वाहिकाओं के साथ घूमकर मुड़ जाता है, तो उसे ओवेरियन सिस्ट टॉर्शन कहा जाता है। मुड़ने के कारण अंडाशय को मिलने वाला रक्त संचार रुक जाता है। यदि समय रहते इलाज न हो, तो अंडाशय को स्थायी नुकसान पहुँच सकता है और उसे निकालना भी पड़ सकता है। इसलिए इसे “गायनेकोलॉजिकल इमरजेंसी” माना जाता है।
ओवेरियन सिस्ट क्या होती है?
ओवेरियन सिस्ट अंडाशय के अंदर या उसकी सतह पर बनने वाली द्रव (तरल) से भरी थैली होती है। अधिकतर सिस्ट सामान्य और हानिरहित होती हैं तथा बिना इलाज के अपने आप ठीक हो जाती हैं। कई महिलाओं को पता भी नहीं चलता कि उन्हें सिस्ट है। सिस्ट के कुछ सामान्य प्रकार हैं:
- फंक्शनल सिस्ट: मासिक चक्र के दौरान बनने वाली सिस्ट, जैसे फॉलिकुलर सिस्ट और कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट।
- डर्मॉइड सिस्ट (मैच्योर टेराटोमा): इनमें बाल, वसा या ऊतक जैसी चीज़ें हो सकती हैं।
- सिस्टैडेनोमा: पानी जैसे या गाढ़े द्रव से भरी सिस्ट, जो काफ़ी बड़ी हो सकती है।
- एंडोमेट्रियोमा: एंडोमेट्रियोसिस के कारण बनने वाली “चॉकलेट सिस्ट”।
ओवेरियन टॉर्शन क्या है?
अंडाशय गर्भाशय से कुछ स्नायुबंधनों (लिगामेंट्स) के सहारे जुड़ा रहता है। इन्हीं के बीच से अंडाशय की रक्त वाहिकाएँ गुज़रती हैं। जब अंडाशय किसी कारण से अपनी धुरी पर घूम जाता है, तो ये वाहिकाएँ रस्सी की तरह ऐंठ जाती हैं। सबसे पहले नसों (वेन्स) में रक्त का बहाव रुकता है, जिससे अंडाशय में सूजन आती है। फिर धमनियों का रक्त प्रवाह भी बंद हो जाता है और ऊतक को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। यदि यह स्थिति कुछ घंटों से अधिक बनी रहे, तो ऊतक मरने लगता है, जिसे “नेक्रोसिस” कहते हैं।
कई बार फैलोपियन ट्यूब भी अंडाशय के साथ मुड़ जाती है। तब इसे “एडनेक्सल टॉर्शन” कहा जाता है।
टॉर्शन के कारण और जोखिम कारक
सिस्ट वाला अंडाशय भारी हो जाता है, इसलिए वह आसानी से घूम सकता है। इसके प्रमुख कारण और जोखिम कारक ये हैं:
- सिस्ट का आकार: सामान्यतः 5 सेंटीमीटर या उससे बड़ी सिस्ट में जोखिम अधिक होता है। बहुत बड़ी सिस्ट कभी-कभी आसपास के ऊतकों से चिपक जाती है, इसलिए उनमें टॉर्शन का खतरा अपेक्षाकृत कम हो सकता है।
- ओवेरियन मास या ट्यूमर: डर्मॉइड सिस्ट जैसी गांठें अक्सर हल्की और गतिशील होती हैं, इसलिए उनमें टॉर्शन आम है।
- गर्भावस्था: गर्भ के शुरुआती महीनों में अंडाशय का स्थान बदलता है और हार्मोन के असर से सिस्ट बन सकती है।
- फर्टिलिटी ट्रीटमेंट: अंडाशय को उत्तेजित करने वाली दवाओं से अंडाशय का आकार बढ़ जाता है।
- पीसीओएस (PCOS): इसमें अंडाशय बढ़े हुए हो सकते हैं।
- लंबे स्नायुबंधन: कुछ महिलाओं में जन्म से अंडाशय को थामने वाले लिगामेंट लंबे होते हैं।
- अचानक हरकत: तेज़ दौड़ना, कूदना, भारी व्यायाम या अचानक शरीर की स्थिति बदलना कभी-कभी इसे ट्रिगर कर सकता है।
यह स्थिति प्रजनन आयु की महिलाओं में अधिक देखी जाती है, लेकिन बच्चियों, किशोरियों और रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाओं में भी हो सकती है।
ओवेरियन सिस्ट टॉर्शन के लक्षण
इसका सबसे प्रमुख लक्षण पेट के निचले हिस्से में अचानक शुरू होने वाला तेज़ दर्द है। यह दर्द आमतौर पर एक तरफ़ होता है और कमर, पीठ या जांघ तक फैल सकता है। अन्य लक्षण इस प्रकार हैं:
- जी मिचलाना और उल्टी, जो लगभग 70 प्रतिशत मामलों में होती है
- पेट में सूजन या छूने पर दर्द
- हल्का बुखार
- चक्कर या कमज़ोरी महसूस होना
- योनि से हल्का रक्तस्राव
कई मामलों में दर्द आता-जाता रहता है। इसका कारण यह है कि अंडाशय कुछ समय के लिए मुड़ता है और फिर अपने आप खुल भी जाता है। इस “आंशिक टॉर्शन” में भी अंडाशय को नुकसान हो सकता है, इसलिए दर्द कम होने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
यदि बुखार तेज़ हो जाए, पेट बहुत सख्त हो जाए या बेहोशी जैसी स्थिति बने, तो यह संकेत हो सकता है कि ऊतक को गंभीर क्षति पहुँच चुकी है या संक्रमण फैल रहा है।
निदान कैसे होता है?
टॉर्शन का निदान कभी-कभी मुश्किल होता है, क्योंकि इसके लक्षण एपेंडिसाइटिस, किडनी स्टोन, एक्टोपिक प्रेगनेंसी, पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिजीज और सिस्ट फटने जैसी स्थितियों से मिलते-जुलते हैं। डॉक्टर निम्न तरीकों का उपयोग करते हैं:
- इतिहास और शारीरिक जाँच: दर्द कब और कैसे शुरू हुआ, मासिक धर्म की तारीख, गर्भावस्था की संभावना और पहले से ज्ञात सिस्ट की जानकारी ली जाती है।
- अल्ट्रासाउंड (पेल्विक/ट्रांसवेजाइनल): यह पहली और सबसे आम जाँच है। इसमें अंडाशय का बढ़ा हुआ आकार, आसपास तरल और सिस्ट दिखाई देते हैं। डॉपलर अल्ट्रासाउंड से रक्त प्रवाह देखा जाता है। हालाँकि सामान्य डॉपलर रिपोर्ट आने पर भी टॉर्शन से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।
- सीटी स्कैन या एमआरआई: अल्ट्रासाउंड से स्थिति स्पष्ट न हो तो ये जाँचें मदद करती हैं।
- प्रेगनेंसी टेस्ट और ब्लड टेस्ट: गर्भावस्था को अलग करने और संक्रमण देखने के लिए।
- डायग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी: यदि शक बना रहे, तो अंतिम पुष्टि और इलाज दोनों इसी से हो जाते हैं।
टॉर्शन में समय सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए यदि लक्षण टॉर्शन की ओर इशारा करें, तो डॉक्टर सभी जाँचों का इंतज़ार किए बिना सर्जरी का निर्णय ले सकते हैं।
इलाज
ओवेरियन टॉर्शन का इलाज सर्जरी है। दवाइयों से यह ठीक नहीं होता, हालाँकि दर्द और उल्टी में राहत के लिए दवाएँ दी जा सकती हैं।
1. डिटॉर्शन (अंडाशय को सीधा करना)
आधुनिक चिकित्सा में प्राथमिकता अंडाशय को बचाने की होती है, खासकर युवा महिलाओं और बच्चियों में। सर्जन लैप्रोस्कोपी (कीहोल सर्जरी) द्वारा मुड़े हुए अंडाशय को वापस सीधा करते हैं। अंडाशय का रंग नीला-काला दिखने पर भी, सीधा करने के बाद उसमें रक्त संचार लौट आता है और वह अक्सर ठीक हो जाता है।
2. सिस्टेक्टॉमी
अंडाशय सीधा करने के बाद सिस्ट को अंडाशय से अलग करके निकाला जाता है और स्वस्थ ऊतक बचाया जाता है। कभी-कभी सूजन कम होने तक सिस्ट निकालना टाला जाता है और बाद में दूसरी सर्जरी की जाती है।
3. ओओफोरेक्टॉमी (अंडाशय निकालना)
यदि अंडाशय पूरी तरह नष्ट हो चुका हो, या कैंसर का संदेह हो, या रजोनिवृत्ति के बाद की महिला हो, तो अंडाशय (और कभी-कभी फैलोपियन ट्यूब) को निकालना पड़ता है। एक अंडाशय निकलने पर भी दूसरे अंडाशय से गर्भधारण और मासिक चक्र सामान्य रह सकते हैं।
4. ओवेरियोपेक्सी
जिन महिलाओं में बार-बार टॉर्शन होता है, उनमें डॉक्टर अंडाशय को स्थिर रखने के लिए उसे लिगामेंट या दीवार से टाँके लगाकर जोड़ सकते हैं। यह निर्णय हर मरीज़ में अलग होता है।
समय का महत्व और जटिलताएँ
जितनी जल्दी सर्जरी होती है, अंडाशय बचने की संभावना उतनी अधिक होती है। आमतौर पर लक्षण शुरू होने के कुछ घंटों के भीतर इलाज मिलने पर परिणाम बेहतर रहते हैं। देरी होने पर ये जटिलताएँ हो सकती हैं:
- अंडाशय का नष्ट हो जाना
- पेट में संक्रमण या पेरिटोनाइटिस
- सेप्सिस
- प्रजनन क्षमता में कमी, खासकर यदि दोनों अंडाशय प्रभावित हों
गर्भावस्था और बच्चों में टॉर्शन
गर्भावस्था में: यह स्थिति पहली और दूसरी तिमाही में अधिक होती है। गर्भवती महिला में भी लैप्रोस्कोपिक सर्जरी सुरक्षित मानी जाती है और इसे टालना माँ व शिशु दोनों के लिए अधिक जोखिम भरा हो सकता है। पेट दर्द को “गर्भावस्था का सामान्य दर्द” समझकर नज़रअंदाज़ न करें।
बच्चियों में: बच्चियों में भी अंडाशय के टॉर्शन का मामला सामने आता है, कभी-कभी बिना किसी सिस्ट के भी। उनमें दर्द का वर्णन स्पष्ट नहीं होता, इसलिए पेट दर्द के साथ बार-बार उल्टी होने पर तुरंत जाँच कराएँ।
रोकथाम
टॉर्शन को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन जोखिम कम करने के लिए ये कदम मददगार हो सकते हैं:
- यदि सिस्ट पता है, तो डॉक्टर की सलाह से नियमित अल्ट्रासाउंड कराएँ।
- बड़ी या लगातार बढ़ती सिस्ट के लिए डॉक्टर से हटाने के विकल्प पर चर्चा करें।
- पीसीओएस या एंडोमेट्रियोसिस का समय पर इलाज कराएँ।
- फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के दौरान डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें और असामान्य दर्द की तुरंत सूचना दें।
- एक बार टॉर्शन हो चुका हो, तो फॉलो-अप जाँच न छोड़ें।
कब तुरंत अस्पताल जाएँ?
निम्न स्थितियों में बिना देर किए इमरजेंसी में जाएँ:
- पेट के निचले हिस्से में अचानक और तेज़ दर्द, जो आराम करने से कम न हो
- दर्द के साथ बार-बार उल्टी
- दर्द के साथ बुखार, चक्कर या बेहोशी
- गर्भावस्था में पेट दर्द
घर पर दर्द निवारक लेकर इंतज़ार करना ख़तरनाक हो सकता है, क्योंकि दर्द दब जाने से अंडाशय को हो रहा नुकसान छिप सकता है।
आम भ्रांतियाँ
“हर सिस्ट में टॉर्शन होता है।” यह गलत है। अधिकांश सिस्ट कभी टॉर्शन नहीं करतीं।
“अंडाशय निकलने से माँ बनना असंभव हो जाता है।” यह सही नहीं है। एक स्वस्थ अंडाशय बचा हो, तो गर्भधारण संभव रहता है।
“दर्द अपने आप ठीक हो गया, तो चिंता की बात नहीं।” दर्द कम होने का मतलब हमेशा समस्या खत्म होना नहीं है। आंशिक टॉर्शन में दर्द आता-जाता रहता है।
निष्कर्ष
ओवेरियन सिस्ट टॉर्शन एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य आपात स्थिति है। इसमें सबसे बड़ी भूमिका समय पर पहचान और सर्जरी की होती है। यदि आपको पहले से सिस्ट की जानकारी है और अचानक पेट के निचले हिस्से में तेज़ दर्द के साथ उल्टी हो रही है, तो इसे हल्के में न लें। जल्दी इलाज से अंडाशय बचाया जा सकता है और भविष्य की प्रजनन क्षमता सुरक्षित रखी जा सकती है।
नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी लक्षण में योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
