एंडोमेट्रियल कैंसर (Endometrial Cancer - गर्भाशय का कैंसर)
| | |

एंडोमेट्रियल कैंसर (गर्भाशय की परत का कैंसर): कारण, लक्षण, जाँच और इलाज

परिचय

गर्भाशय (यूटरस) की भीतरी परत को एंडोमेट्रियम कहा जाता है। हर महीने मासिक धर्म चक्र के दौरान यही परत गर्भधारण की तैयारी में मोटी होती है और गर्भ न ठहरने पर रक्तस्राव के रूप में बाहर निकल जाती है। जब इस परत की कोशिकाएँ असामान्य रूप से और अनियंत्रित ढंग से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं, तो उसे एंडोमेट्रियल कैंसर कहते हैं। यह गर्भाशय के कैंसर का सबसे आम प्रकार है और अधिकतर रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज़) के बाद की महिलाओं में पाया जाता है। राहत की बात यह है कि इसके लक्षण अक्सर शुरुआती अवस्था में ही दिखाई देने लगते हैं, इसलिए समय पर जाँच कराने पर इसका सफल इलाज संभव है।

एंडोमेट्रियल कैंसर क्या है?

जब एंडोमेट्रियम की कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव आते हैं, तो वे सामान्य नियमों का पालन करना छोड़ देती हैं। वे जरूरत से ज्यादा तेजी से बढ़ती हैं और समय पर नष्ट नहीं होतीं। धीरे-धीरे ये कोशिकाएँ गर्भाशय की मांसपेशियों में फैल सकती हैं और आगे चलकर आसपास के अंगों, लिम्फ नोड्स या शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुँच सकती हैं। चूँकि यह कैंसर गर्भाशय के भीतर से शुरू होता है, इसलिए प्रारंभिक अवस्था में ही असामान्य रक्तस्राव जैसे संकेत देने लगता है। यही कारण है कि अधिकांश मामलों का पता शुरुआती चरण में चल जाता है।

एंडोमेट्रियल कैंसर के प्रकार

इस कैंसर को मोटे तौर पर दो श्रेणियों में बाँटा जाता है।

टाइप 1 (एंडोमेट्रियोइड कार्सिनोमा): यह सबसे आम प्रकार है। यह आमतौर पर एस्ट्रोजन हार्मोन की अधिकता से जुड़ा होता है, धीरे-धीरे बढ़ता है और अक्सर शुरुआती अवस्था में पकड़ में आ जाता है। इसका पूर्वानुमान सामान्यतः अच्छा रहता है।

टाइप 2 (गैर-एंडोमेट्रियोइड प्रकार): इसमें सीरस कार्सिनोमा, क्लियर सेल कार्सिनोमा और कार्सिनोसार्कोमा जैसे प्रकार आते हैं। ये कम मामलों में होते हैं, लेकिन अधिक आक्रामक होते हैं और तेजी से फैल सकते हैं। इनका इलाज अपेक्षाकृत जटिल होता है।

इसके अलावा गर्भाशय की मांसपेशियों में होने वाला यूटेराइन सार्कोमा एक अलग और दुर्लभ प्रकार है, जिसका इलाज भी अलग ढंग से किया जाता है।

कारण और जोखिम कारक

एंडोमेट्रियल कैंसर का कोई एक निश्चित कारण नहीं है, लेकिन कुछ स्थितियाँ इसके खतरे को बढ़ा देती हैं।

हार्मोनल असंतुलन: शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर प्रोजेस्टेरोन की तुलना में लंबे समय तक अधिक रहने पर एंडोमेट्रियम की परत बार-बार मोटी होती है, जिससे कोशिकाओं में असामान्य बदलाव का जोखिम बढ़ता है।

मोटापा: वसा की कोशिकाएँ शरीर में एस्ट्रोजन बनाती हैं। इसलिए अधिक वजन वाली महिलाओं में यह खतरा अधिक पाया जाता है। यह इस कैंसर के सबसे प्रमुख जोखिम कारकों में गिना जाता है।

उम्र: अधिकांश मामले 50 वर्ष के बाद, यानी मेनोपॉज़ के आसपास या उसके बाद सामने आते हैं।

मधुमेह और उच्च रक्तचाप: टाइप 2 डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित महिलाओं में जोखिम कुछ अधिक हो सकता है।

मासिक धर्म और प्रजनन से जुड़े कारण: बहुत कम उम्र में माहवारी शुरू होना, देर से मेनोपॉज़ होना, कभी गर्भधारण न करना और अनियमित ओव्यूलेशन (जैसे पीसीओएस में) लंबे समय तक एस्ट्रोजन के प्रभाव को बढ़ाते हैं।

हार्मोन थेरेपी: मेनोपॉज़ के बाद केवल एस्ट्रोजन वाली हार्मोन थेरेपी, बिना डॉक्टर की देखरेख के लेना जोखिम बढ़ा सकता है। टैमोक्सिफेन दवा का लंबे समय तक उपयोग भी एक कारण हो सकता है।

पारिवारिक इतिहास और आनुवंशिक कारण: लिंच सिंड्रोम जैसी वंशानुगत स्थिति में गर्भाशय और आंत के कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है। यदि परिवार में किसी को एंडोमेट्रियल, आंत या अंडाशय का कैंसर हुआ हो, तो डॉक्टर को अवश्य बताएँ।

एंडोमेट्रियल हाइपरप्लेसिया: इसमें गर्भाशय की परत असामान्य रूप से मोटी हो जाती है। कुछ प्रकार के हाइपरप्लेसिया का इलाज न होने पर वह कैंसर में बदल सकता है।

ध्यान रखें कि इन कारकों के होने का मतलब यह नहीं कि कैंसर होगा ही, और कई महिलाओं में कोई स्पष्ट जोखिम कारक न होने पर भी यह रोग हो सकता है।

लक्षण

सबसे महत्वपूर्ण और सबसे आम लक्षण असामान्य योनि रक्तस्राव है। इसके मुख्य संकेत ये हैं:

  • मेनोपॉज़ के बाद किसी भी प्रकार का रक्तस्राव या धब्बे आना, चाहे वह कितना भी हल्का हो
  • मासिक धर्म के बीच में रक्तस्राव होना
  • माहवारी में बहुत अधिक या लंबे समय तक रक्तस्राव
  • योनि से पानी जैसा या खून मिला हुआ स्राव
  • पेट के निचले हिस्से या श्रोणि (पेल्विस) में दर्द या दबाव
  • संभोग के दौरान दर्द
  • बिना कारण वजन घटना (अधिक बढ़ चुकी अवस्था में)

यहाँ यह जानना जरूरी है कि इन लक्षणों के कई अन्य सामान्य कारण भी होते हैं, जैसे फाइब्रॉइड, पॉलिप या हार्मोनल गड़बड़ी। फिर भी, मेनोपॉज़ के बाद हुए रक्तस्राव को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। इसकी जाँच जरूर करानी चाहिए।

जाँच और निदान

यदि डॉक्टर को एंडोमेट्रियल कैंसर का संदेह होता है, तो आमतौर पर ये जाँचें कराई जाती हैं।

पेल्विक जाँच: डॉक्टर गर्भाशय, योनि और आसपास के अंगों की शारीरिक जाँच करते हैं।

ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड: इसमें एक पतली प्रोब योनि में डालकर गर्भाशय की परत की मोटाई मापी जाती है। मेनोपॉज़ के बाद परत का अधिक मोटा होना आगे की जाँच की जरूरत बताता है।

एंडोमेट्रियल बायोप्सी: यह निदान की सबसे महत्वपूर्ण जाँच है। इसमें गर्भाशय की परत का छोटा नमूना लेकर माइक्रोस्कोप से जाँचा जाता है। यह प्रक्रिया अक्सर क्लिनिक में ही हो जाती है।

हिस्टेरोस्कोपी और डी एंड सी: यदि बायोप्सी से स्पष्ट नतीजा न मिले, तो कैमरे वाली पतली नली से गर्भाशय के अंदर देखा जाता है और जरूरत पड़ने पर नमूना लिया जाता है।

इमेजिंग जाँचें: कैंसर की पुष्टि होने पर एमआरआई, सीटी स्कैन या पेट-सीटी जैसी जाँचों से यह देखा जाता है कि बीमारी कितनी फैली है। कभी-कभी आनुवंशिक या मॉलिक्यूलर जाँच भी की जाती है, जो इलाज की दिशा तय करने में मदद करती है।

कैंसर की अवस्थाएँ (स्टेज)

इलाज तय करने में स्टेज की बड़ी भूमिका होती है।

  • स्टेज 1: कैंसर केवल गर्भाशय तक सीमित होता है।
  • स्टेज 2: कैंसर गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) तक पहुँच चुका होता है।
  • स्टेज 3: कैंसर गर्भाशय के बाहर, जैसे अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब, योनि या पास के लिम्फ नोड्स तक फैल जाता है।
  • स्टेज 4: कैंसर मूत्राशय, आंत या फेफड़ों, यकृत और हड्डियों जैसे दूर के अंगों तक पहुँच जाता है।

इलाज के विकल्प

इलाज रोगी की उम्र, सामान्य स्वास्थ्य, कैंसर के प्रकार और स्टेज पर निर्भर करता है। अक्सर एक से अधिक तरीकों को मिलाकर इलाज किया जाता है।

सर्जरी: यह मुख्य इलाज है। इसमें गर्भाशय और सर्विक्स को निकाला जाता है (हिस्टेरेक्टॉमी), साथ ही दोनों अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब भी हटाए जाते हैं। जरूरत होने पर आसपास के लिम्फ नोड्स की जाँच या उन्हें हटाने का काम भी किया जाता है। आजकल लैप्रोस्कोपिक या रोबोटिक सर्जरी भी उपलब्ध है, जिसमें छोटे चीरे लगते हैं और रोगी जल्दी ठीक होता है।

रेडिएशन थेरेपी: इसमें उच्च ऊर्जा किरणों से बची हुई कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। यह सर्जरी के बाद पुनरावृत्ति का खतरा घटाने के लिए दी जा सकती है, या उन रोगियों में जिन्हें सर्जरी नहीं कराई जा सकती।

कीमोथेरेपी: दवाओं के जरिए कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। यह आमतौर पर उन्नत या आक्रामक प्रकार के कैंसर में दी जाती है।

हार्मोन थेरेपी: कुछ प्रकार के कैंसर एस्ट्रोजन पर निर्भर होते हैं। ऐसे मामलों में प्रोजेस्टिन जैसी हार्मोनल दवाएँ दी जाती हैं। कभी-कभी बहुत शुरुआती अवस्था में, जब युवा महिला संतान की इच्छा रखती हो, डॉक्टर विशेष निगरानी में इस विकल्प पर विचार करते हैं।

टार्गेटेड और इम्यूनोथेरेपी: उन्नत या दोबारा लौटे कैंसर में ट्यूमर की जाँच के आधार पर इम्यूनोथेरेपी जैसी नई दवाएँ उपयोगी साबित हो रही हैं। इनके बारे में अपने ऑन्कोलॉजिस्ट से विस्तार से चर्चा करें।

रोकथाम और बचाव

एंडोमेट्रियल कैंसर को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन जोखिम को काफी कम किया जा सकता है।

  • स्वस्थ वजन बनाए रखें और नियमित व्यायाम करें
  • संतुलित, फाइबर युक्त आहार लें और प्रोसेस्ड भोजन तथा चीनी कम करें
  • मधुमेह और ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखें
  • हार्मोन थेरेपी केवल डॉक्टर की सलाह से और सही संयोजन में लें
  • अनियमित माहवारी या पीसीओएस का उचित इलाज कराएँ
  • परिवार में कैंसर का इतिहास हो या लिंच सिंड्रोम का संदेह हो, तो जेनेटिक काउंसलिंग कराएँ
  • असामान्य रक्तस्राव को कभी हल्के में न लें

फिलहाल सामान्य महिलाओं के लिए इस कैंसर की कोई नियमित स्क्रीनिंग जाँच नहीं है। इसलिए लक्षणों के प्रति सजग रहना ही सबसे बड़ा बचाव है।

रोग का पूर्वानुमान और जीवन की गुणवत्ता

चूँकि अधिकांश मामलों का पता शुरुआती अवस्था में चल जाता है, इसलिए इसके परिणाम अन्य कई कैंसरों की तुलना में बेहतर होते हैं। स्टेज 1 में पकड़े जाने पर पाँच वर्ष की जीवित रहने की दर बहुत ऊँची मानी जाती है, जबकि कैंसर के फैल जाने पर यह घटती जाती है। इलाज के बाद नियमित फॉलो-अप जरूरी है, ताकि किसी भी पुनरावृत्ति का जल्दी पता चल सके। सर्जरी के बाद अंडाशय निकलने से मेनोपॉज़ जैसे लक्षण, थकान या मानसिक तनाव हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर, परिवार और सहायता समूहों का साथ बहुत मदद करता है। संतुलित आहार, हल्का व्यायाम और पर्याप्त नींद स्वास्थ्य-लाभ को तेज करते हैं।

डॉक्टर से कब मिलें?

निम्नलिखित स्थितियों में बिना देर किए स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें:

  • मेनोपॉज़ के बाद किसी भी तरह का रक्तस्राव
  • माहवारी के बीच बार-बार रक्तस्राव या अत्यधिक रक्तस्राव
  • योनि से असामान्य स्राव जो कई दिनों तक बना रहे
  • पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द

निष्कर्ष

एंडोमेट्रियल कैंसर गर्भाशय की परत से शुरू होने वाला एक आम कैंसर है, जिसका सबसे बड़ा चेतावनी संकेत असामान्य रक्तस्राव है। मोटापा, हार्मोनल असंतुलन, मधुमेह और बढ़ती उम्र इसके प्रमुख जोखिम कारक हैं। अच्छी बात यह है कि समय पर जाँच और इलाज से अधिकांश महिलाएँ पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकती हैं। इसलिए शरीर के संकेतों को पहचानें, शर्म या डर के कारण जाँच को न टालें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ। जागरूकता ही इस बीमारी से बचाव और सफल इलाज की पहली सीढ़ी है।

नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी लक्षण या इलाज के संबंध में योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *