चेलाजियन (Chalazion): पलक पर होने वाली दर्द रहित गांठ
परिचय
सुबह आईने में देखने पर अचानक पलक पर एक छोटी सी गांठ दिखाई दे, जिसमें न खास दर्द हो न जलन, तो कई लोग घबरा जाते हैं। ज़्यादातर मामलों में यह चेलाजियन (Chalazion) होता है। यह आँख की पलक की एक बेहद आम समस्या है, जो आमतौर पर गंभीर नहीं होती और अक्सर सही देखभाल से अपने आप ठीक हो जाती है। फिर भी इसके कारण, लक्षण और सही इलाज की जानकारी होना ज़रूरी है, ताकि सही समय पर सही कदम उठाया जा सके।
चेलाजियन क्या है?
चेलाजियन पलक के भीतर बनने वाली एक छोटी, कठोर और आमतौर पर दर्द रहित गांठ है। यह पलक की तेल बनाने वाली ग्रंथियों के बंद हो जाने से होती है। यह ऊपरी पलक पर ज़्यादा दिखती है, लेकिन निचली पलक पर भी हो सकती है। एक साथ एक या एक से ज़्यादा गांठें हो सकती हैं, और कभी-कभी दोनों आँखों में भी हो सकती हैं।
“चेलाजियन” शब्द यूनानी भाषा के शब्द “chalaza” से बना है, जिसका अर्थ है छोटी गांठ या ओला। आम बोलचाल में इसे पलक की गांठ या कुछ इलाकों में “अंजनहारी” से मिलता-जुलता रोग समझ लिया जाता है, जबकि दोनों अलग हैं।
पलक की संरचना और मीबोमियन ग्रंथियाँ
हमारी हर पलक के किनारे के पास कई छोटी तेल ग्रंथियाँ होती हैं, जिन्हें मीबोमियन ग्रंथियाँ (Meibomian glands) कहते हैं। ये एक तैलीय पदार्थ बनाती हैं, जो आँख की सतह पर मौजूद आँसुओं की परत को स्थिर रखता है और उन्हें जल्दी सूखने से बचाता है।
जब किसी ग्रंथि का मुहाना किसी कारण से बंद हो जाता है, तो उसमें बना तेल बाहर नहीं निकल पाता और अंदर ही जमा होने लगता है। यह जमा तेल आसपास के ऊतकों में रिसकर सूजन पैदा करता है। धीरे-धीरे वहाँ एक कठोर गांठ बन जाती है। यही चेलाजियन है।
चेलाजियन और स्टाई (गुहेरी) में अंतर
लोग अक्सर चेलाजियन और स्टाई (Stye, गुहेरी) को एक ही समझ लेते हैं, पर दोनों में फ़र्क है:
- स्टाई आमतौर पर बैक्टीरिया के संक्रमण से होती है। यह पलक के किनारे पर बनती है, दर्दनाक, लाल और छूने पर संवेदनशील होती है, और कई बार इसमें मवाद का पीला बिंदु दिखता है।
- चेलाजियन मुख्यतः ग्रंथि के अवरोध और सूजन से होता है, संक्रमण से नहीं। यह पलक के थोड़ा भीतर की ओर बनता है, धीरे-धीरे बढ़ता है और अक्सर दर्द रहित होता है।
कई बार शुरुआत में स्टाई ही ठीक होने के बाद चेलाजियन में बदल सकती है। इसलिए सिर्फ़ देखकर फ़र्क करना हमेशा आसान नहीं होता, और डॉक्टर की जाँच मददगार रहती है।
चेलाजियन होने के कारण
चेलाजियन का सीधा कारण मीबोमियन ग्रंथि का बंद होना है। इसके पीछे कई बातें हो सकती हैं:
- पलक के किनारों की सूजन (ब्लेफेराइटिस): पलकों की जड़ों में रूसी जैसी पपड़ी जमना और सूजन रहना ग्रंथियों को बंद कर सकता है।
- गंदे हाथों से आँखें छूना या मलना: इससे ग्रंथि के मुहाने पर गंदगी और सूजन बढ़ती है।
- पुरानी या दूषित आई मेकअप का उपयोग: काजल, आईलाइनर या मस्कारा को लंबे समय तक रखना या दूसरों से बाँटना जोखिम बढ़ाता है।
- रात में आई मेकअप न हटाना: इससे ग्रंथियों के मुहाने बंद हो सकते हैं।
- त्वचा संबंधी समस्याएँ: रोज़ेसिया, सेबोरिक डर्मेटाइटिस (रूसी की समस्या) और मुँहासे वाली तैलीय त्वचा में यह ज़्यादा देखा जाता है।
- पूर्व में स्टाई होना।
जोखिम कारक
कुछ स्थितियों में चेलाजियन बार-बार होने की संभावना बढ़ जाती है:
- आँखों की सफ़ाई का ध्यान न रखना
- आँखों का सूखापन (ड्राई आई)
- डायबिटीज़ और कुछ अन्य दीर्घकालिक बीमारियाँ
- ज़्यादा देर स्क्रीन देखना, जिससे पलकें कम झपकती हैं और ग्रंथियाँ ठीक से खाली नहीं होतीं
- कॉन्टैक्ट लेंस का गलत तरीके से इस्तेमाल
- वयस्क उम्र, खासकर 30 से 50 वर्ष के बीच, हालाँकि बच्चों में भी यह हो सकता है
चेलाजियन के लक्षण
चेलाजियन की शुरुआत अक्सर धीमी होती है। आम लक्षण ये हैं:
- पलक पर मटर के दाने जैसी या उससे थोड़ी बड़ी, कठोर गांठ
- शुरुआती दिनों में हल्की लालिमा, सूजन या भारीपन
- गांठ को छूने पर आमतौर पर बहुत कम या बिल्कुल दर्द न होना
- पलक पर हल्की सूजन, जिससे आँख भारी लग सकती है
- आँख में पानी आना या हल्की चुभन महसूस होना
- गांठ बड़ी हो जाए तो आँख की पुतली पर दबाव पड़ने से धुंधला दिखना
- कभी-कभी पलक के बालों (पलकों) का झड़ना
चेलाजियन आमतौर पर दृष्टि को स्थायी नुकसान नहीं पहुँचाता। बड़ी गांठ से अस्थायी धुंधलापन ज़रूर हो सकता है।
निदान कैसे होता है?
नेत्र रोग विशेषज्ञ अधिकतर सिर्फ़ पलक को देखकर और छूकर निदान कर लेते हैं। वे पलक को पलटकर उसकी अंदरूनी सतह भी देखते हैं। सामान्य मामलों में किसी विशेष जाँच की ज़रूरत नहीं पड़ती।
हालाँकि कुछ स्थितियों में सावधानी ज़रूरी है। यदि गांठ बार-बार उसी जगह लौट आए, बहुत तेज़ी से बढ़े, पलक के किनारे का आकार बदले, पलकें झड़ने लगें, या गांठ से खून निकले, तो डॉक्टर बायोप्सी (गांठ का छोटा नमूना लेकर जाँच) की सलाह दे सकते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि बहुत कम मामलों में पलक का कैंसर चेलाजियन जैसा दिख सकता है।
चेलाजियन का इलाज
1. गर्म सेंक और देखभाल (पहला और मुख्य उपाय)
कई चेलाजियन कुछ हफ़्तों से कुछ महीनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं। गर्म सेंक सबसे प्रभावी शुरुआती उपाय माना जाता है, क्योंकि गर्मी से जमा हुआ तेल पिघलता है और ग्रंथि का मुहाना खुलने में मदद मिलती है।
- साफ़ कपड़े को गुनगुने (सहनीय गर्म, जलाने वाले नहीं) पानी में भिगोकर निचोड़ें
- बंद आँख पर 10 से 15 मिनट तक रखें
- कपड़ा ठंडा होने पर दोबारा गर्म करें
- दिन में कई बार, नियमित रूप से करें
- सेंक के बाद पलक की हल्की मालिश करें, जैसा डॉक्टर बताएँ
2. पलकों की सफ़ाई
हल्के बेबी शैम्पू या डॉक्टर द्वारा सुझाए गए लिड क्लीनर से पलकों के किनारे धीरे से साफ़ करें। इससे जमी पपड़ी और गंदगी हटती है।
3. दवाइयाँ
यदि संक्रमण या सूजन का संदेह हो, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक आई ड्रॉप या मलहम लिख सकते हैं। दवा की मात्रा और अवधि हमेशा डॉक्टर के निर्देशानुसार ही रखें, खुद से कोई भी दवा शुरू न करें।
4. स्टेरॉयड इंजेक्शन
अगर गांठ कई हफ़्तों में न घटे, तो डॉक्टर गांठ के भीतर स्टेरॉयड का इंजेक्शन लगा सकते हैं। इससे सूजन कम होती है और गांठ घट जाती है। यह प्रक्रिया केवल प्रशिक्षित नेत्र चिकित्सक ही करें।
5. छोटी शल्य क्रिया (इन्सिज़न और क्यूरेटेज)
जब गांठ बड़ी हो, देखने में बाधा डाले, कई महीनों तक न जाए या बार-बार हो, तो छोटी सर्जरी की जाती है। इसमें स्थानीय बेहोशी देकर पलक के भीतर की ओर से छोटा चीरा लगाकर जमा पदार्थ निकाल दिया जाता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर कम समय में हो जाती है और उसी दिन घर जाया जा सकता है। इसके बाद डॉक्टर की बताई दवाइयाँ और देखभाल ज़रूरी है।
क्या करें और क्या न करें
क्या करें:
- गांठ को छूने से पहले और बाद में हाथ अच्छी तरह धोएँ
- नियमित गर्म सेंक करें और धैर्य रखें
- आँखों की सफ़ाई का ध्यान रखें
- कॉन्टैक्ट लेंस कुछ समय के लिए बंद रखें और चश्मा पहनें
- जिन भी लक्षणों पर संदेह हो, उनके लिए नेत्र रोग विशेषज्ञ से मिलें
क्या न करें:
- गांठ को दबाना, फोड़ना या नुकीली चीज़ से कुरेदना, इससे संक्रमण फैल सकता है
- इलाज के दौरान आई मेकअप लगाना
- बिना सलाह के कोई भी ड्रॉप या घरेलू नुस्खा आँख में डालना
- आँखों को बार-बार रगड़ना
कब तुरंत डॉक्टर से मिलें?
ये स्थितियाँ दिखें तो देर न करें:
- गांठ दो से चार हफ़्ते की देखभाल के बाद भी कम न हो
- दृष्टि पर असर पड़े या धुंधला दिखे
- पलक या आँख के आसपास बहुत ज़्यादा लालिमा, दर्द और सूजन हो
- गांठ तेज़ी से बढ़े या बार-बार उसी जगह लौट आए
- पलक का किनारा टेढ़ा हो जाए या पलकें गिरने लगें
- बुखार या चेहरे पर सूजन फैलने लगे
जटिलताएँ
चेलाजियन से आमतौर पर गंभीर समस्या नहीं होती। फिर भी बड़ी गांठ से अस्थायी धुंधलापन, पलक की बनावट में हल्का बदलाव या दोबारा होने की प्रवृत्ति हो सकती है। कभी-कभी चेलाजियन में संक्रमण फैलकर पलक के आसपास की त्वचा में सूजन (सेल्युलाइटिस) पैदा कर सकता है, जिसमें तुरंत इलाज ज़रूरी है।
रोकथाम के उपाय
चेलाजियन को पूरी तरह रोकना हमेशा संभव नहीं, लेकिन जोखिम कम किया जा सकता है:
- आँखों को बार-बार गंदे हाथों से न छुएँ
- रोज़ाना पलकों की सफ़ाई की आदत डालें, खासकर यदि ब्लेफेराइटिस हो
- सोने से पहले आई मेकअप ज़रूर हटाएँ
- मेकअप का सामान समय-समय पर बदलें और किसी से साझा न करें
- कॉन्टैक्ट लेंस लगाने और उतारने से पहले हाथ धोएँ
- स्क्रीन पर काम करते समय बीच-बीच में पलकें झपकाएँ और ब्रेक लें
- डायबिटीज़ या त्वचा रोग हो तो उनका नियंत्रण बनाए रखें
- पर्याप्त पानी पिएँ और संतुलित आहार लें
आम भ्रांतियाँ
- “यह संक्रामक है।” चेलाजियन एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलता।
- “ऑपरेशन के बाद दोबारा नहीं होगा।” पलक की ग्रंथियों की प्रवृत्ति के कारण यह दोबारा हो सकता है, इसलिए देखभाल जारी रखनी चाहिए।
- “घरेलू नुस्खों से जल्दी ठीक हो जाएगा।” कुछ घरेलू नुस्खे आँख के लिए सुरक्षित नहीं होते। सबसे भरोसेमंद घरेलू उपाय साफ़-सफ़ाई और गर्म सेंक ही है।
- “यह आँख की रोशनी छीन लेता है।” आमतौर पर ऐसा नहीं होता।
निष्कर्ष
चेलाजियन पलक की एक आम, आमतौर पर हानिरहित और दर्द रहित गांठ है, जो तेल ग्रंथि के बंद होने से बनती है। ज़्यादातर मामलों में नियमित गर्म सेंक, पलकों की सफ़ाई और धैर्य से यह कुछ हफ़्तों से महीनों में ठीक हो जाती है। यदि गांठ टिकी रहे, बड़ी हो जाए, देखने में बाधा डाले या बार-बार लौटे, तो नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए, क्योंकि स्टेरॉयड इंजेक्शन या छोटी सर्जरी जैसे प्रभावी विकल्प उपलब्ध हैं। गांठ को खुद फोड़ने की कोशिश न करें, आँखों की स्वच्छता का ध्यान रखें और कोई भी असामान्य बदलाव दिखे तो समय पर जाँच कराएँ।
