ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस (Oral Submucous Fibrosis - गुटखा खाने से मुंह का न खुलना)
| |

ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस: गुटखे की लत से मुंह का न खुलना

प्रस्तावना

सोचिए, आप रोज़ की तरह खाना खाने बैठे हैं, लेकिन मुंह इतना नहीं खुलता कि निवाला अंदर जा सके। मसालेदार खाना खाते ही मुंह में आग-सी जलन होती है। धीरे-धीरे हँसना, जम्हाई लेना और दाँत साफ़ करना भी मुश्किल हो जाता है। यह किसी दुर्लभ बीमारी की कहानी नहीं है। यह ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस (OSMF) है, जो गुटखा, पान मसाला और सुपारी खाने वाले लाखों भारतीयों, खासकर युवाओं को अपनी चपेट में ले चुकी है।

ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस क्या है?

यह मुंह की एक दीर्घकालिक (क्रॉनिक) और धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है। इसमें मुंह के अंदर की नरम परत, यानी म्यूकोसा, के नीचे रेशेदार (फाइब्रस) ऊतक जमा होने लगता है। गाल, तालु, होंठ और जीभ के नीचे के हिस्से कड़े और सख्त हो जाते हैं। नतीजतन मुंह खुलने की क्षमता लगातार घटती जाती है। इस स्थिति को चिकित्सा भाषा में ट्रिस्मस कहते हैं।

सामान्यतः एक वयस्क का मुंह लगभग 35 से 45 मिलीमीटर तक खुलता है। OSMF में यह घटकर 20 मिलीमीटर या उससे भी कम रह सकता है, यानी दो उँगलियाँ भी अंदर नहीं जा पातीं।

सबसे गंभीर बात यह है कि OSMF को कैंसर-पूर्व अवस्था (प्रीमैलिग्नेंट कंडीशन) माना जाता है। यानी यह आगे चलकर मुंह के कैंसर में बदल सकती है।

यह बीमारी क्यों होती है?

इसका मुख्य कारण सुपारी (एरेका नट) का सेवन है। गुटखा, पान मसाला, खैनी और कई तरह की चबाने वाली तंबाकू में सुपारी मौजूद होती है। सुपारी में एरिकोलीन जैसे रसायन (एल्केलॉइड) पाए जाते हैं। ये मुंह की कोशिकाओं में कोलेजन का निर्माण बढ़ा देते हैं और उसके टूटने की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं। इससे कोलेजन जमा होता जाता है और ऊतक कड़ा हो जाता है।

मुख्य कारणों और जोखिम कारकों में ये शामिल हैं:

  • गुटखा और पान मसाला का नियमित सेवन। सेवन की अवधि और रोज़ाना पाउचों की संख्या के साथ खतरा बढ़ता जाता है।
  • मुंह में लंबे समय तक रखना। जो लोग गुटखा देर तक गाल में दबाकर रखते हैं या रात को सोते समय भी रखते हैं, उनमें खतरा अधिक होता है।
  • कम उम्र में शुरुआत। किशोरावस्था में लत लगने पर बीमारी जल्दी विकसित होती है।
  • पोषण की कमी। आयरन, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट की कमी को भी एक सहायक कारक माना जाता है।
  • अत्यधिक मिर्च-मसाले और अन्य जलन पैदा करने वाले पदार्थ।
  • आनुवंशिक प्रवृत्ति। कुछ लोगों में ऊतक अधिक संवेदनशील होते हैं।

यह बीमारी आमतौर पर 20 से 40 वर्ष की उम्र में दिखती है, यानी कमाने और परिवार चलाने की उम्र में। इसीलिए इसका सामाजिक और आर्थिक असर भी बड़ा है।

लक्षण: कैसे पहचानें?

OSMF धीरे-धीरे बढ़ती है, इसलिए शुरुआती लक्षणों को लोग अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

शुरुआती लक्षण:

  • मुंह में जलन, खासकर तीखा या मसालेदार खाने पर
  • मुंह में छाले बार-बार होना
  • मुंह सूखा-सूखा लगना या लार का कम बनना
  • स्वाद की क्षमता में कमी
  • गाल के अंदर की त्वचा का पीला या सफेद पड़ना

बढ़ी हुई अवस्था के लक्षण:

  • गाल के अंदर रस्सी जैसी सख्त पट्टियाँ (फाइब्रस बैंड) महसूस होना
  • मुंह का धीरे-धीरे कम खुलना
  • जीभ का हिलना-डुलना कम होना और जीभ बाहर निकालने में दिक्कत
  • तालु और उसके पास की गाँठ (यूवुला) का सिकुड़ना
  • खाना चबाने और निगलने में कठिनाई
  • बोलने में परेशानी और आवाज़ में बदलाव
  • कभी-कभी कानों में भारीपन या सुनने में दिक्कत
  • चेहरे का पतला और उम्र से अधिक बूढ़ा दिखना

बीमारी के चरण

चिकित्सक अक्सर मुंह खुलने की मात्रा और लक्षणों के आधार पर OSMF को चरणों में बाँटते हैं:

  1. शुरुआती चरण: सिर्फ जलन और हल्के छाले, मुंह लगभग सामान्य खुलता है।
  2. मध्यम चरण: गाल में पट्टियाँ बनने लगती हैं, मुंह खुलना कुछ कम हो जाता है।
  3. गंभीर चरण: मुंह बहुत कम खुलता है, खाना और बोलना बेहद मुश्किल होता है, और कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है।

निदान कैसे होता है?

दंत चिकित्सक या मुख रोग विशेषज्ञ मुंह की जाँच करके और मरीज़ के गुटखा या सुपारी सेवन का इतिहास पूछकर बीमारी की पहचान करते हैं। मुंह खुलने की माप मिलीमीटर में ली जाती है। यदि किसी जगह कैंसर की आशंका हो, तो बायोप्सी की जाती है, जिसमें छोटा-सा ऊतक निकालकर माइक्रोस्कोप से जाँचा जाता है। अगर मुंह में कोई सफेद या लाल धब्बा हो या कोई छाला दो हफ़्ते से ज़्यादा न भरे, तो तुरंत जाँच ज़रूरी है।

खतरे और जटिलताएँ

  • मुंह का कैंसर: अध्ययनों में OSMF से कैंसर बनने की दर कुछ प्रतिशत से लेकर लगभग 10 प्रतिशत से अधिक तक बताई गई है। यह दर अलग-अलग अध्ययनों में अलग है। इसलिए नियमित जाँच अनिवार्य है।
  • कुपोषण: कम खाने से वज़न घटता है और शरीर कमज़ोर होता है।
  • मुंह की सफ़ाई में दिक्कत: मुंह कम खुलने से दाँत साफ़ करना मुश्किल होता है, जिससे सड़न और मसूड़ों के रोग बढ़ते हैं।
  • दंत इलाज में बाधा: दाँत निकलवाना या भरवाना कठिन हो जाता है।
  • मानसिक और सामाजिक प्रभाव: बोलने और खाने में दिक्कत से आत्मविश्वास घटता है और कामकाज प्रभावित होता है।

इलाज: क्या संभव है?

OSMF का इलाज चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि जमा हुआ रेशेदार ऊतक पूरी तरह पहले जैसा नहीं हो पाता। फिर भी सही समय पर इलाज से हालत को बिगड़ने से रोका जा सकता है और काफी राहत पाई जा सकती है।

1. आदत छोड़ना (सबसे ज़रूरी कदम)
गुटखा, पान मसाला, सुपारी और तंबाकू तुरंत बंद करना इलाज की नींव है। इसके बिना कोई भी दवा या सर्जरी टिकाऊ फ़ायदा नहीं देती। लत छुड़ाने के लिए काउंसलिंग और विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए। भारत में राष्ट्रीय तंबाकू क्विटलाइन (1800-11-2356) भी उपलब्ध है।

2. दवाइयाँ और पूरक
चिकित्सक की सलाह पर एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और पोषक पूरक, जलन कम करने की दवाएँ और ज़रूरत पड़ने पर गाल के भीतर इंजेक्शन (स्टेरॉयड और अन्य एंजाइम के साथ) दिए जाते हैं। खुराक और दवा का चुनाव मरीज़ की अवस्था पर निर्भर करता है, इसलिए खुद से दवा न लें।

3. जबड़े का व्यायाम (फिज़ियोथेरेपी)
मुंह को रोज़ धीरे-धीरे अधिकतम खोलने और खींचने के व्यायाम बहुत उपयोगी हैं। इनके लिए लकड़ी की आइसक्रीम स्टिक की गड्डी या विशेष उपकरण का इस्तेमाल किया जा सकता है। ये व्यायाम किसी प्रशिक्षित चिकित्सक या फिज़ियोथेरेपिस्ट से सीखकर नियमित करने चाहिए। ज़बरदस्ती खींचने से नुकसान हो सकता है।

4. सर्जरी
गंभीर अवस्था में, जब मुंह बहुत कम खुलता हो, सर्जरी करके कड़ी पट्टियाँ काटी जाती हैं और उनकी जगह शरीर के किसी अन्य हिस्से के ऊतक (ग्राफ्ट या फ्लैप) लगाए जाते हैं। सर्जरी के बाद भी व्यायाम जारी रखना ज़रूरी है, वरना मुंह दोबारा सिकुड़ सकता है।

5. नियमित फॉलो-अप
चूँकि कैंसर का खतरा बना रहता है, इसलिए हर कुछ महीनों में मुंह की जाँच करानी चाहिए, चाहे आदत छूट चुकी हो।

आहार और देखभाल के सुझाव

  • ताज़े फल, हरी सब्ज़ियाँ और संतुलित भोजन लें। इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट मुंह के ऊतकों के लिए लाभदायक हैं।
  • बहुत मिर्च-मसाले वाला, गर्म और कठोर खाना कम करें।
  • खाना नरम और छोटे निवालों में लें, और पर्याप्त पानी पिएँ।
  • दिन में दो बार दाँत साफ़ करें और मुंह की सफ़ाई का पूरा ध्यान रखें। छोटे सिर वाला मुलायम ब्रश उपयोगी रहता है।
  • शराब और धूम्रपान से पूरी तरह दूर रहें, क्योंकि ये कैंसर का खतरा और बढ़ाते हैं।

रोकथाम: सबसे बेहतर उपाय

OSMF पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी है:

  • कभी शुरू न करें। “एक-दो बार से कुछ नहीं होता” वाली सोच ही लत की पहली सीढ़ी है।
  • बच्चों और किशोरों से बात करें। स्कूल-कॉलेज के आसपास बिकने वाले गुटखे के खतरों के बारे में खुलकर बताएँ।
  • दोस्तों के दबाव में न आएँ। शुरू करने वालों में एक बड़ा कारण साथियों का असर होता है।
  • शुरुआती लक्षण पर ही डॉक्टर के पास जाएँ। मुंह में जलन या हल्का सख्तपन भी गंभीरता से लें।
  • समाज और परिवार की भूमिका। जो लोग आदत छोड़ना चाहते हैं, उन्हें ताने नहीं, सहयोग दें।

निष्कर्ष

ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस केवल मुंह न खुलने की समस्या नहीं है। यह मुंह के कैंसर का रास्ता भी खोल सकती है। गुटखे और पान मसाले का कुछ पल का स्वाद पूरी ज़िंदगी की तकलीफ़ में बदल सकता है। अच्छी बात यह है कि आदत छोड़ने, समय पर इलाज, व्यायाम और नियमित जाँच से हालत को काफी हद तक संभाला जा सकता है।

यदि आपको या आपके किसी परिचित को मुंह में लगातार जलन, गाल में सख्तपन या मुंह खोलने में कमी महसूस हो रही है, तो देर न करें। किसी दंत चिकित्सक या मुख रोग विशेषज्ञ से जल्द मिलें। याद रखें, आज की सावधानी कल की बड़ी बीमारी से बचा सकती है।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *