टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट डिसऑर्डर (TMJ): जबड़े के जोड़ का दर्द
परिचय
क्या आपको खाना चबाते समय कान के पास दर्द होता है? जम्हाई लेते या मुँह खोलते समय जबड़े से “क्लिक” की आवाज़ आती है, या सुबह उठने पर जबड़ा अकड़ा हुआ लगता है? अगर हाँ, तो संभव है कि समस्या आपके जबड़े के जोड़ में हो। टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट डिसऑर्डर, जिसे आम बोलचाल में TMJ डिसऑर्डर या TMD कहा जाता है, जबड़े के जोड़ और आसपास की मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं का एक समूह है।
यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है, पर आम तौर पर 20 से 40 वर्ष की उम्र के लोगों में और पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज़्यादा देखा जाता है। राहत की बात यह है कि अधिकतर मामलों में इसका इलाज बिना सर्जरी के संभव है। इस लेख में हम इसके कारण, लक्षण, जाँच, उपचार और बचाव के उपायों को सरल भाषा में समझेंगे।
TMJ क्या है?
TMJ का अर्थ है टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट। यह वह जोड़ है जो खोपड़ी की टेम्पोरल बोन (कनपटी की हड्डी) को निचले जबड़े (मैंडिबल) से जोड़ता है। यह जोड़ दोनों कानों के ठीक सामने, एक-एक तरफ़ होता है। कान के सामने उँगली रखकर मुँह खोलें, तो आप इसकी हलचल महसूस कर सकते हैं।
यह शरीर के सबसे जटिल जोड़ों में गिना जाता है, क्योंकि यह कब्ज़े की तरह खुलता-बंद होता है और साथ ही आगे-पीछे व अगल-बगल भी खिसकता है। इसी की मदद से हम चबाते, बोलते, निगलते और जम्हाई लेते हैं। जोड़ के भीतर हड्डी के गोल सिरे (कंडाइल) और खोपड़ी की खाँचेदार जगह के बीच उपास्थि (कार्टिलेज) की एक छोटी डिस्क होती है, जो गद्दी का काम करती है और हड्डियों को आपसी रगड़ से बचाती है। इसके चारों ओर मांसपेशियाँ और स्नायुबंधन (लिगामेंट) होते हैं।
जब इस जोड़, डिस्क या मांसपेशियों में गड़बड़ी आती है, तो उसे टेम्पोरोमैंडिबुलर डिसऑर्डर कहते हैं। मोटे तौर पर यह तीन प्रकार का हो सकता है: मांसपेशियों का दर्द (मायोफेशियल पेन), जोड़ के भीतर की गड़बड़ी (जैसे डिस्क का अपनी जगह से खिसक जाना) और जोड़ में गठिया या घिसावट। कई लोगों में एक से अधिक प्रकार साथ-साथ मिलते हैं।
कारण और जोखिम कारक
अक्सर TMD का कोई एक निश्चित कारण नहीं होता; कई कारक मिलकर इसे जन्म देते हैं। प्रमुख कारण ये हैं:
- दाँत भींचना और पीसना (ब्रुक्सिज़्म): यह सबसे आम कारणों में से एक है। कई लोग नींद में या तनाव के समय अनजाने में दाँत कसकर भींचते हैं, जिससे जोड़ और मांसपेशियों पर लगातार दबाव पड़ता है।
- मानसिक तनाव: तनाव में चेहरे और जबड़े की मांसपेशियाँ कस जाती हैं, जिससे दर्द बढ़ सकता है।
- चोट: जबड़े, चेहरे या सिर पर सीधा झटका, दुर्घटना या गिरने से जोड़ को नुकसान पहुँच सकता है।
- गठिया: ऑस्टियोआर्थराइटिस और रूमेटॉइड आर्थराइटिस जोड़ की उपास्थि को क्षतिग्रस्त कर सकते हैं।
- दाँतों और जबड़े की बनावट: दाँतों का ठीक से न बैठना, दाँत गायब होना या जबड़े का असमान विकास।
- आदतें: नाखून या पेंसिल चबाना, ज़्यादा च्युइंग गम चबाना, बहुत सख़्त या चिपचिपी चीज़ें खाना, ठुड्डी को हाथ पर टिकाए रखना, फ़ोन को कंधे और कान के बीच दबाकर बात करना।
- मुँह को बहुत ज़्यादा खोलना: लंबे दंत उपचार के दौरान या ज़ोर की जम्हाई से जोड़ पर खिंचाव आ सकता है।
जोखिम बढ़ाने वाले कारकों में महिला होना, 20 से 40 वर्ष की आयु, गठिया या अन्य जोड़ों के रोग, पुराना तनाव या चिंता और ख़राब नींद शामिल हैं। गर्दन और कंधों की ग़लत मुद्रा भी जबड़े की मांसपेशियों पर असर डाल सकती है।
लक्षण
TMD के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं और एक या दोनों तरफ़ दिख सकते हैं। प्रमुख लक्षण ये हैं:
- जबड़े, कान के आसपास, चेहरे या गर्दन में दर्द या कोमलता, खासकर चबाते समय
- मुँह खोलते-बंद करते समय क्लिक, पॉपिंग या कड़कड़ की आवाज़
- जबड़े का अटक जाना, मुँह पूरा न खुल पाना या कभी-कभी जबड़े का “लॉक” हो जाना
- जबड़े में जकड़न, खासकर सुबह के समय
- कान में दर्द, भारीपन या घंटी जैसी आवाज़ (टिनिटस), जबकि कान में संक्रमण न हो
- सिरदर्द, खासकर कनपटी के आसपास, जो कई बार माइग्रेन जैसा लगता है
- चेहरे में थकान या हल्की सूजन का एहसास
- दाँतों में दर्द या दाँतों का घिसा हुआ दिखना
- ऊपर-नीचे के दाँत पहले की तरह न बैठना
ध्यान रहे कि जबड़े से कभी-कभार आवाज़ आना, अगर दर्द या रुकावट के बिना हो, तो आमतौर पर चिंता की बात नहीं मानी जाती। परेशानी तब है जब आवाज़ के साथ दर्द हो या जबड़ा चलाने में दिक़्क़त आए। कई बार TMD के लक्षण साइनस, कान के संक्रमण, दाँत की समस्या या चेहरे की नस के दर्द (ट्राइजेमिनल न्यूरैल्जिया) जैसे लगते हैं, इसलिए सही पहचान ज़रूरी है।
निदान: जाँच कैसे होती है
TMD की पहचान मुख्यतः डॉक्टर की जाँच और आपके बताए लक्षणों के इतिहास पर आधारित होती है। इसके लिए आप दंत चिकित्सक, ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन या ENT विशेषज्ञ से मिल सकते हैं। डॉक्टर सामान्यतः ये कदम उठाते हैं:
- इतिहास: दर्द कब शुरू हुआ, किस तरह का है, कोई चोट लगी थी या नहीं, तनाव, नींद और आदतों के बारे में पूछा जाता है।
- शारीरिक जाँच: जोड़ और मांसपेशियों को दबाकर कोमलता देखी जाती है, मुँह खोलने की सीमा नापी जाती है, जबड़े की गति में आवाज़ या टेढ़ापन देखा जाता है और दाँतों के बैठने की जाँच होती है।
- एक्स-रे: पैनोरमिक एक्स-रे से जबड़े और दाँतों की हड्डियों की स्थिति दिखती है।
- सीटी स्कैन: हड्डी की बारीक बनावट या घिसावट देखने के लिए।
- एमआरआई: डिस्क और नरम ऊतकों की स्थिति जानने के लिए। यह हर मरीज़ को नहीं, केवल ज़रूरत पड़ने पर कराया जाता है।
अधिकांश मामलों में शुरुआती जाँच के बाद ही इलाज की दिशा तय हो जाती है और महँगी जाँचों की ज़रूरत नहीं पड़ती।
उपचार के विकल्प
अधिकतर लोगों में TMD के लक्षण सरल उपायों से कुछ हफ़्तों से महीनों में कम हो जाते हैं। इसीलिए इलाज आमतौर पर कम आक्रामक तरीक़ों से शुरू होता है।
दवाएँ: दर्द और सूजन के लिए डॉक्टर की सलाह पर पैरासिटामोल या इबुप्रोफेन जैसी दवाएँ दी जा सकती हैं। मांसपेशियों की ऐंठन के लिए मसल रिलैक्सेंट कुछ समय के लिए दिए जाते हैं। लंबे समय के दर्द में कभी-कभी कम खुराक वाली कुछ अन्य दवाएँ भी दी जाती हैं। कोई भी दवा बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक न लें।
ओरल स्प्लिंट या नाइट गार्ड: दाँतों के ऊपर पहनी जाने वाली प्लास्टिक की यह कस्टम-फ़िट प्लेट दाँत भींचने या पीसने के असर से जोड़ को बचाती है। इसे दंत चिकित्सक नाप के अनुसार बनाते हैं; बाज़ार की रेडीमेड प्लेट हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं होती।
फिजियोथेरेपी: जबड़े के व्यायाम, मालिश, गर्म या ठंडी सिकाई और अल्ट्रासाउंड जैसे उपचार से जकड़न और दर्द में राहत मिलती है।
तनाव प्रबंधन: काउंसलिंग, कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी, बायोफीडबैक, योग, ध्यान और गहरी साँस के अभ्यास उन लोगों के लिए ख़ास तौर पर मददगार हैं जिनमें तनाव मुख्य कारण है।
इंजेक्शन: अगर दर्द बना रहे, तो कभी-कभी मांसपेशियों में ट्रिगर पॉइंट या बोटॉक्स इंजेक्शन, या जोड़ में कॉर्टिकोस्टेरॉइड इंजेक्शन का उपयोग किया जाता है।
आर्थ्रोसेन्टेसिस: इसमें जोड़ में पतली सुई डालकर उसे द्रव से धोया जाता है, जिससे सूजन और जमी हुई गंदगी निकल जाती है।
सर्जरी: यह अंतिम विकल्प है, जिस पर तभी विचार होता है जब अन्य उपाय विफल हों और जोड़ में स्पष्ट संरचनात्मक समस्या हो। इसमें आर्थ्रोस्कोपी, जोड़ की मरम्मत या, बहुत दुर्लभ मामलों में, जोड़ बदलना शामिल हो सकता है।
घरेलू देखभाल और रोकथाम
कुछ आसान आदतें बदलकर आप दर्द कम कर सकते हैं और समस्या को लौटने से रोक सकते हैं:
- नरम भोजन करें: कुछ दिन खिचड़ी, दलिया, दही, केला और उबली सब्ज़ियाँ खाएँ। भुने चने, गन्ना, सख़्त रोटी के कौर और चिपचिपी टॉफ़ी या च्युइंग गम से बचें।
- छोटे कौर लें: खाने को छोटे टुकड़ों में काटें और दोनों तरफ़ से बराबर चबाएँ।
- सिकाई करें: दर्द वाली जगह पर कपड़े में लपेटी बर्फ़ की पोटली या गर्म तौलिया लगभग 10 मिनट रखें। शुरुआती सूजन में ठंडी और जकड़न में गर्म सिकाई ज़्यादा आराम देती है।
- जबड़े को आराम दें: मुँह को बहुत चौड़ा न खोलें, जम्हाई के समय हथेली से ठुड्डी को सहारा दें और लंबे समय तक ज़ोर से बोलने या गाने से बचें।
- “होंठ बंद, दाँत अलग” नियम अपनाएँ: आराम की स्थिति में ऊपर-नीचे के दाँतों के बीच हल्का फ़ासला रहे और जीभ तालू से लगी हो। दिन में बीच-बीच में जाँचें कि दाँत भिंचे तो नहीं।
- हल्की मालिश और स्ट्रेचिंग: कनपटी और गाल की मांसपेशियों पर उँगलियों से गोलाई में हल्की मालिश करें और जबड़े को दर्द की सीमा तक धीरे-धीरे खोलें-बंद करें।
- तनाव कम करें और नींद सुधारें: नियमित योग, प्राणायाम और टहलना फ़ायदेमंद है। सोने से पहले स्क्रीन से दूरी रखें और चाय-कॉफ़ी सीमित करें।
- मुद्रा सुधारें: मोबाइल या लैपटॉप चलाते समय गर्दन ज़्यादा आगे न झुकाएँ, ठुड्डी को हाथ पर न टिकाएँ और पेट के बल सोने से बचें।
- बुरी आदतें छोड़ें: नाखून, पेन या पेंसिल चबाना और ज़्यादा च्युइंग गम चबाना बंद करें।
घरेलू उपाय राहत देते हैं, पर दर्द लगातार बना रहे तो जाँच कराना ज़रूरी है।
कब डॉक्टर से मिलें और निष्कर्ष
अगर घरेलू देखभाल के एक-दो हफ़्ते बाद भी जबड़े का दर्द बना रहे, मुँह खोलने-बंद करने में कठिनाई हो, जबड़ा अटक या लॉक हो जाए, या दर्द के कारण खाना-बोलना प्रभावित हो, तो दंत चिकित्सक से मिलें। चोट के बाद अचानक सूजन, जबड़े का टेढ़ा हो जाना या बुखार के साथ दर्द हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। सीने में दर्द, साँस फूलने या बाएँ हाथ में दर्द के साथ जबड़े में दर्द हो, तो यह हृदय की समस्या का संकेत हो सकता है; ऐसे में बिना देर किए आपातकालीन सेवा से संपर्क करें।
TMJ डिसऑर्डर कष्टदायक ज़रूर है, पर अधिकतर मामलों में यह गंभीर या स्थायी नहीं होता। सही समय पर निदान, तनाव पर नियंत्रण, आदतों में सुधार और ज़रूरत पड़ने पर दंत चिकित्सक की सलाह से ज़्यादातर लोग अच्छी राहत पा लेते हैं। इसलिए जबड़े के दर्द को नज़रअंदाज़ न करें और शुरुआती लक्षण दिखते ही सावधानी बरतें।
