हाइपोपैराथायरायडिज्म (Hypoparathyroidism): कारण, लक्षण, जाँच और उपचार
परिचय
हमारे शरीर में कई छोटी ग्रंथियाँ (glands) होती हैं जो हार्मोन बनाकर शरीर के अलग-अलग कार्यों को नियंत्रित करती हैं। इन्हीं में से एक है पैराथायरॉइड ग्रंथि। हाइपोपैराथायरायडिज्म एक ऐसी स्थिति है जिसमें ये ग्रंथियाँ पर्याप्त मात्रा में पैराथायरॉइड हार्मोन (PTH) नहीं बना पातीं। इसका सीधा असर रक्त में कैल्शियम और फॉस्फोरस के संतुलन पर पड़ता है। परिणामस्वरूप खून में कैल्शियम का स्तर घट जाता है और फॉस्फोरस का स्तर बढ़ जाता है।
यह बीमारी अपेक्षाकृत दुर्लभ है, लेकिन यदि समय पर पहचान और इलाज न हो, तो यह मांसपेशियों में ऐंठन, दौरे और हृदय संबंधी जटिलताओं का कारण बन सकती है। अच्छी बात यह है कि सही दवाओं और नियमित निगरानी से इसे अच्छी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
पैराथायरॉइड ग्रंथियाँ क्या हैं?
पैराथायरॉइड ग्रंथियाँ चावल के दाने या मटर के आकार की बहुत छोटी ग्रंथियाँ होती हैं। आमतौर पर इनकी संख्या चार होती है और ये गले में थायरॉइड ग्रंथि के पीछे स्थित होती हैं। नाम में समानता के बावजूद इनका थायरॉइड ग्रंथि के कार्य से कोई सीधा संबंध नहीं है। ये दोनों अलग-अलग ग्रंथियाँ हैं।
पैराथायरॉइड हार्मोन का मुख्य कार्य रक्त में कैल्शियम का स्तर संतुलित रखना है। यह हार्मोन यह काम तीन तरीकों से करता है:
- हड्डियों से: आवश्यकता पड़ने पर हड्डियों से कैल्शियम को रक्त में छोड़ने में मदद करता है।
- गुर्दों (किडनी) में: मूत्र के साथ कैल्शियम के बाहर निकलने को कम करता है और फॉस्फोरस के उत्सर्जन को बढ़ाता है।
- विटामिन D के सक्रियण में: किडनी में विटामिन D को उसके सक्रिय रूप में बदलता है, जिससे आँतों से कैल्शियम का अवशोषण बढ़ता है।
जब PTH कम बनता है, तो ये सभी प्रक्रियाएँ गड़बड़ा जाती हैं और शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है।
हाइपोपैराथायरायडिज्म के कारण
1. गर्दन की सर्जरी के बाद (सबसे आम कारण)
लगभग 75 से 80 प्रतिशत मामलों में यह स्थिति थायरॉइड या गर्दन की अन्य सर्जरी के दौरान पैराथायरॉइड ग्रंथियों के क्षतिग्रस्त होने या गलती से निकल जाने के कारण होती है। थायरॉइड कैंसर, गले के कैंसर या पैराथायरॉइड की अन्य समस्याओं की सर्जरी के बाद ऐसा हो सकता है। यह स्थिति अस्थायी भी हो सकती है और स्थायी भी।
2. ऑटोइम्यून रोग
कुछ लोगों में शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली गलती से अपनी ही पैराथायरॉइड ग्रंथियों पर हमला कर देती है। यह अकेले भी हो सकता है और अन्य ऑटोइम्यून बीमारियों, जैसे एडिसन रोग, टाइप-1 डायबिटीज़ या कुछ फंगल संक्रमणों की प्रवृत्ति के साथ भी दिखाई दे सकता है।
3. जन्मजात या आनुवंशिक कारण
कुछ बच्चे पैराथायरॉइड ग्रंथियों के बिना या अविकसित ग्रंथियों के साथ जन्म लेते हैं। डिजॉर्ज सिंड्रोम (DiGeorge syndrome) इसका एक ज्ञात उदाहरण है। कैल्शियम-सेंसिंग रिसेप्टर जीन में बदलाव से भी यह रोग हो सकता है।
4. अन्य कारण
- गर्दन में विकिरण चिकित्सा (radiation therapy) का इतिहास
- शरीर में मैग्नीशियम की बहुत अधिक कमी, जिससे PTH का बनना और असर करना प्रभावित होता है
- आयरन या तांबे का अत्यधिक जमाव, जैसे हीमोक्रोमैटोसिस या विल्सन रोग में
- कैंसर का पैराथायरॉइड ग्रंथियों तक फैलना
- कुछ मामलों में कारण पता नहीं चलता, जिसे इडियोपैथिक कहा जाता है
लक्षण
लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि कैल्शियम का स्तर कितना कम है और यह कितनी तेज़ी से गिरा है। कई बार हल्के मामलों में लंबे समय तक कोई लक्षण नहीं दिखते।
सामान्य लक्षण:
- हाथ, पैर और चेहरे (विशेषकर होंठों के आसपास) में झुनझुनी या सुन्नपन
- मांसपेशियों में दर्द, ऐंठन और खिंचाव
- हाथ-पैरों की उँगलियों का अकड़ जाना (टिटैनी)
- अत्यधिक थकान और कमज़ोरी
- सूखी, खुरदरी त्वचा और रूखे बाल
- नाखूनों का कमज़ोर होकर टूटना
- बालों का झड़ना, भौंहों के बाल कम होना
गंभीर लक्षण:
- पूरे शरीर में दौरे (seizures)
- साँस लेने में कठिनाई, गले की मांसपेशियों में ऐंठन के कारण आवाज़ बदलना
- दिल की धड़कन का अनियमित होना
- मानसिक लक्षण, जैसे चिड़चिड़ापन, चिंता, अवसाद, याददाश्त में कमी और “ब्रेन फॉग”
बच्चों में दाँतों का देर से निकलना, दाँतों की बनावट में खराबी, विकास में देरी और सीखने में कठिनाई देखी जा सकती है।
लंबे समय तक रहने पर आँखों में मोतियाबिंद, मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में कैल्शियम जमाव और किडनी की समस्याएँ भी हो सकती हैं।
चिकित्सकीय संकेत
डॉक्टर जाँच के दौरान दो संकेत देखते हैं। पहला, चवोस्टेक संकेत, जिसमें गाल के पास चेहरे की नस को थपथपाने पर चेहरे की मांसपेशियाँ फड़कती हैं। दूसरा, ट्राउसो संकेत, जिसमें बाँह पर ब्लड प्रेशर कफ फुलाने पर हाथ और कलाई में ऐंठन आ जाती है। ये दोनों कम कैल्शियम की ओर इशारा करते हैं।
निदान (जाँच)
डॉक्टर लक्षणों, चिकित्सा इतिहास और शारीरिक जाँच के साथ निम्न परीक्षण कराते हैं:
- सीरम कैल्शियम: हाइपोपैराथायरायडिज्म में यह कम होता है।
- पैराथायरॉइड हार्मोन (PTH): यह कम या सामान्य सीमा के निचले स्तर पर, जबकि कैल्शियम कम होने पर इसे बढ़ा हुआ होना चाहिए था।
- सीरम फॉस्फोरस: आमतौर पर बढ़ा हुआ मिलता है।
- मैग्नीशियम: इसकी कमी की जाँच ज़रूरी है।
- विटामिन D स्तर: अन्य कारणों को अलग करने के लिए।
- किडनी फंक्शन टेस्ट और 24 घंटे के मूत्र में कैल्शियम: गुर्दों पर असर देखने के लिए।
- ECG: कम कैल्शियम से हृदय की विद्युत गतिविधि में बदलाव आ सकता है।
- आनुवंशिक परीक्षण: यदि जन्मजात या पारिवारिक कारण की आशंका हो।
उपचार
उपचार का लक्ष्य रक्त में कैल्शियम को सामान्य सीमा के निचले हिस्से में रखना, लक्षणों को दूर करना और जटिलताओं से बचाव करना है। उपचार डॉक्टर की देखरेख में ही होना चाहिए।
आपातकालीन उपचार
यदि कैल्शियम का स्तर बहुत कम हो और दौरे, टिटैनी या हृदय संबंधी लक्षण हों, तो मरीज़ को अस्पताल में भर्ती कर नस के ज़रिए (IV) कैल्शियम ग्लूकोनेट दिया जाता है। साथ ही हृदय की निगरानी की जाती है।
दीर्घकालिक उपचार
- कैल्शियम की गोलियाँ: आमतौर पर कैल्शियम कार्बोनेट या कैल्शियम साइट्रेट, दिन में कई खुराकों में बाँटकर।
- सक्रिय विटामिन D: कैल्सीट्रिऑल या अल्फाकैल्सिडोल, क्योंकि PTH की कमी में शरीर विटामिन D को सक्रिय रूप में ठीक से नहीं बदल पाता।
- मैग्नीशियम: यदि इसकी कमी हो तो उसे सुधारा जाता है।
- थियाज़ाइड मूत्रवर्धक: कुछ मरीज़ों में मूत्र में कैल्शियम का बाहर निकलना कम करने के लिए दिए जाते हैं।
- पुनःसंयोजक PTH थेरेपी: कुछ चुनिंदा मरीज़ों में, जिनका कैल्शियम पारंपरिक इलाज से नियंत्रित नहीं होता, डॉक्टर PTH के इंजेक्शन का विकल्प देख सकते हैं। यह हर जगह उपलब्ध नहीं होता और महँगा भी है।
अपनी मर्ज़ी से दवाओं की मात्रा बदलना या अचानक बंद कर देना खतरनाक हो सकता है। कैल्शियम बहुत कम होने पर दौरे पड़ सकते हैं, और अधिक होने पर किडनी में पथरी और किडनी को नुकसान हो सकता है।
खान-पान और जीवनशैली
- कैल्शियम युक्त आहार: दूध, दही, पनीर, छाछ, रागी (नाचनी), तिल, हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ (जैसे सरसों, मेथी) और बादाम को आहार में शामिल करें।
- फॉस्फोरस पर नियंत्रण: कोल्ड ड्रिंक, कोला, प्रोसेस्ड और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में फॉस्फोरस अधिक होता है, इसलिए इनका सेवन सीमित रखें।
- धूप: सुबह की हल्की धूप विटामिन D के लिए उपयोगी है, हालाँकि केवल धूप से इस बीमारी का इलाज नहीं होता।
- नमक: अधिक नमक से मूत्र में कैल्शियम का उत्सर्जन बढ़ता है, इसलिए नमक सीमित मात्रा में लें।
- शराब और धूम्रपान से बचें: ये हड्डियों और कैल्शियम संतुलन पर बुरा असर डालते हैं।
- नियमित जाँच: डॉक्टर के बताए अनुसार समय-समय पर कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम और किडनी की जाँच कराते रहें।
- तनाव प्रबंधन: योग, हल्का व्यायाम और पर्याप्त नींद लक्षणों को सँभालने में सहायक हैं।
संभावित जटिलताएँ
यदि रोग का सही इलाज न हो या निगरानी में लापरवाही हो, तो निम्न समस्याएँ हो सकती हैं:
- बार-बार दौरे पड़ना
- मोतियाबिंद
- दिल की धड़कन में गड़बड़ी और हृदय की कमज़ोरी
- किडनी में पथरी या किडनी को क्षति
- मस्तिष्क में कैल्शियम जमाव
- दाँतों और हड्डियों की समस्याएँ
- मानसिक स्वास्थ्य पर असर
डॉक्टर से कब मिलें?
निम्न स्थितियों में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें:
- गर्दन की सर्जरी के बाद होंठों या हाथ-पैरों में झुनझुनी या ऐंठन महसूस हो
- मांसपेशियों में बार-बार तेज़ ऐंठन हो
- दौरा पड़े या बेहोशी जैसा महसूस हो
- साँस लेने में तकलीफ या दिल की धड़कन असामान्य लगे
थायरॉइड की सर्जरी करा चुके लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि लक्षण सर्जरी के कुछ दिनों या हफ्तों बाद भी उभर सकते हैं।
रोकथाम
अधिकांश मामलों में यह रोग सर्जरी से जुड़ा होता है, इसलिए अनुभवी सर्जन से ऑपरेशन कराना सबसे अहम है। सर्जरी के दौरान पैराथायरॉइड ग्रंथियों को सुरक्षित रखने की कोशिश की जाती है। सर्जरी के बाद कैल्शियम की नियमित जाँच से समस्या को शुरुआत में ही पकड़ा जा सकता है। ऑटोइम्यून या आनुवंशिक कारणों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन जल्दी निदान से जटिलताएँ टाली जा सकती हैं।
निष्कर्ष
हाइपोपैराथायरायडिज्म एक दीर्घकालिक स्थिति हो सकती है, लेकिन यह जीवन को सीमित नहीं करती। सही निदान, नियमित दवाओं, संतुलित आहार और चिकित्सक की निगरानी के साथ मरीज़ सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। सबसे ज़रूरी बात यह है कि दवाएँ नियमित रूप से लें, समय-समय पर जाँच कराएँ और लक्षणों में बदलाव को नज़रअंदाज़ न करें। यदि आपको या आपके किसी परिचित को ऊपर बताए लक्षण दिखें, तो देर न करें और किसी एंडोक्राइनोलॉजिस्ट या डॉक्टर से परामर्श लें।
