प्रोस्टेटिक एब्सेस (प्रोस्टेट में मवाद): कारण, लक्षण, जाँच और इलाज
परिचय
प्रोस्टेट पुरुषों में पाई जाने वाली एक छोटी ग्रंथि है, जो मूत्राशय (ब्लैडर) के ठीक नीचे और मूत्रनली (यूरेथ्रा) के चारों ओर स्थित होती है। इसका मुख्य कार्य वीर्य के तरल भाग का निर्माण करना है। जब इसी ग्रंथि के भीतर संक्रमण के कारण मवाद का एक बंद संग्रह बन जाता है, तो उसे प्रोस्टेटिक एब्सेस कहते हैं।
यह बीमारी अपेक्षाकृत दुर्लभ है, लेकिन गंभीर है। एंटीबायोटिक दवाओं के आने से पहले यह अधिक आम थी। आज समय पर पहचान और सही इलाज से अधिकांश मरीज ठीक हो जाते हैं, परंतु देरी होने पर संक्रमण खून में फैल सकता है, जो जानलेवा हो सकता है।
प्रोस्टेटिक एब्सेस क्या है?
जब प्रोस्टेट में बैक्टीरिया का संक्रमण (प्रोस्टेटाइटिस) ठीक से नियंत्रित नहीं होता, तो ग्रंथि के ऊतक गलने लगते हैं और वहाँ मवाद इकट्ठा हो जाता है। यह मवाद एक या कई गुहाओं (कैविटी) के रूप में हो सकता है। इसे तीव्र बैक्टीरियल प्रोस्टेटाइटिस की एक गंभीर जटिलता माना जाता है।
किन्हें अधिक खतरा होता है?
यह रोग सामान्यतः 40 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में देखा जाता है, पर कमजोर प्रतिरक्षा वाले किसी भी वयस्क में हो सकता है। जोखिम बढ़ाने वाले प्रमुख कारक ये हैं:
- मधुमेह (डायबिटीज): खासकर अनियंत्रित शुगर वाले मरीजों में सबसे प्रमुख जोखिम कारक
- प्रोस्टेट का बढ़ना (BPH) और पेशाब का पूरा न निकल पाना
- कैथेटर का उपयोग: लंबे समय तक मूत्र कैथेटर लगे रहना
- प्रोस्टेट बायोप्सी या मूत्र संबंधी प्रक्रियाएँ: जैसे सिस्टोस्कोपी
- कमजोर प्रतिरक्षा: एचआईवी संक्रमण, कैंसर की कीमोथेरेपी, स्टेरॉयड का लंबा सेवन, किडनी या लिवर की पुरानी बीमारी
- डायलिसिस पर रहने वाले मरीज
- बार-बार होने वाला मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI) या प्रोस्टेटाइटिस
- मूत्र मार्ग में पथरी या संकुचन (स्ट्रिक्चर)
कारण
अधिकांश मामलों में संक्रमण बैक्टीरिया से होता है।
सामान्य जीवाणु:
- ई. कोलाई (E. coli): सबसे आम कारण
- क्लेबसिएला, प्रोटियस, स्यूडोमोनास
- स्टैफिलोकोकस ऑरियस (यह खून के रास्ते पहुँच सकता है)
संक्रमण पहुँचने के रास्ते:
- मूत्रनली से ऊपर की ओर चढ़ता संक्रमण
- मूत्र का प्रोस्टेट की नलिकाओं में वापस बहना
- खून के माध्यम से किसी अन्य स्थान (जैसे त्वचा का फोड़ा) से फैलाव
- आसपास के अंगों, जैसे मलाशय, से सीधा प्रसार
भारत जैसे क्षेत्रों में क्षय रोग (टीबी) और कुछ असामान्य जीवाणु भी कभी-कभी कारण बनते हैं, जिनकी पहचान अलग जाँच से होती है। कुछ मामलों में बर्कहोल्डेरिया स्यूडोमैली जैसे जीवाणु भी पाए गए हैं, विशेषकर मधुमेह के मरीजों में।
लक्षण
लक्षण अक्सर तीव्र प्रोस्टेटाइटिस जैसे होते हैं, इसलिए शुरुआत में पहचान मुश्किल हो सकती है।
सामान्य लक्षण:
- तेज बुखार और ठंड लगकर कँपकँपी आना
- पेशाब में जलन या दर्द
- बार-बार पेशाब आना, खासकर रात में
- पेशाब की धार कमजोर होना या रुक-रुक कर आना
- पेशाब बिल्कुल न हो पाना (मूत्र रुकना)
- पेट के निचले हिस्से, पेरिनियम (अंडकोष और गुदा के बीच का भाग) या कमर के निचले हिस्से में दर्द
- मलत्याग के समय दर्द
- पेशाब में खून या मवाद आना
- कमजोरी, थकान, भूख न लगना
खतरे के संकेत (तुरंत अस्पताल जाएँ):
- बहुत तेज बुखार के साथ भ्रम या बेहोशी
- ब्लड प्रेशर गिरना, तेज धड़कन
- बिल्कुल पेशाब न होना
- असहनीय दर्द
ये सेप्सिस (रक्त संक्रमण) के लक्षण हो सकते हैं, जो आपात स्थिति है।
जाँच और निदान
डॉक्टर लक्षणों, चिकित्सा इतिहास और शारीरिक जाँच के आधार पर संदेह करते हैं। पुष्टि के लिए निम्न जाँचें की जाती हैं:
1. डिजिटल रेक्टल एग्जामिनेशन (DRE): उँगली से गुदा मार्ग द्वारा प्रोस्टेट की जाँच। एब्सेस में प्रोस्टेट गर्म, सूजा हुआ, दर्दनाक और कभी-कभी नरम या उतार-चढ़ाव वाला महसूस होता है। संदिग्ध मामलों में यह जाँच बहुत सावधानी से की जाती है, क्योंकि जोर से दबाने पर संक्रमण खून में फैल सकता है।
2. रक्त जाँच: सफेद रक्त कोशिकाओं (WBC) की संख्या, CRP, ESR, ब्लड शुगर, किडनी फंक्शन और ब्लड कल्चर।
3. मूत्र जाँच और कल्चर: संक्रमण करने वाले जीवाणु और उन पर असर करने वाली दवा की पहचान के लिए।
4. ट्रांसरेक्टल अल्ट्रासाउंड (TRUS): प्रोस्टेट के भीतर मवाद की गुहा देखने और ड्रेनेज में मार्गदर्शन के लिए उपयोगी।
5. सीटी स्कैन (CT) या एमआरआई (MRI): एब्सेस का आकार, संख्या और आसपास फैलाव देखने के लिए सबसे भरोसेमंद जाँचें। एमआरआई विशेष रूप से विस्तृत जानकारी देती है।
6. अन्य जाँचें: यदि टीबी या असामान्य संक्रमण का शक हो तो विशेष कल्चर और जाँचें की जाती हैं।
इलाज
उपचार का लक्ष्य संक्रमण को खत्म करना, मवाद निकालना और जटिलताओं को रोकना है।
1. अस्पताल में भर्ती और सहायक उपचार
अधिकांश मरीजों को भर्ती करना पड़ता है। नसों के जरिए तरल पदार्थ (IV fluids), बुखार और दर्द की दवाएँ दी जाती हैं। मधुमेह के मरीजों में ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना उपचार का अहम हिस्सा है।
2. एंटीबायोटिक चिकित्सा
कल्चर रिपोर्ट आने से पहले ही व्यापक असर वाली एंटीबायोटिक नसों से शुरू कर दी जाती है। रिपोर्ट आने पर दवा को जीवाणु के अनुसार बदला जाता है। आमतौर पर इलाज कई हफ्तों तक चलता है, क्योंकि प्रोस्टेट में दवा का पहुँचना कठिन होता है। कुछ दिनों बाद, स्थिति सुधरने पर, मुँह से ली जाने वाली दवाओं पर बदला जा सकता है। अपने आप दवा शुरू या बंद न करें।
3. मवाद निकालना (ड्रेनेज)
छोटे एब्सेस (लगभग 1 सेमी से कम) कभी-कभी केवल एंटीबायोटिक से ठीक हो जाते हैं। बड़े एब्सेस (आमतौर पर 1 से 2 सेमी से अधिक) या जिन पर दवा असर न करे, उनमें मवाद निकालना ज़रूरी होता है। इसके तरीके:
- सुई से एस्पिरेशन: अल्ट्रासाउंड मार्गदर्शन में सुई द्वारा मवाद खींचना (ट्रांसरेक्टल या पेरिनियल रास्ते से)
- पर्क्यूटेनियस ड्रेनेज: पतली नली डालकर मवाद निकालना
- ट्रांसयूरेथ्रल अनरूफिंग/रिसेक्शन (TURP जैसी विधि): एंडोस्कोप से मूत्रनली के रास्ते एब्सेस की छत खोलकर मवाद निकालना; यह सबसे आम शल्य विधि है
- खुली सर्जरी: अब बहुत कम ज़रूरत पड़ती है
4. पेशाब की रुकावट का प्रबंधन
यदि पेशाब पूरी तरह रुक जाए तो सामान्यतः सुप्राप्यूबिक कैथेटर (पेट के निचले हिस्से से नली) को प्राथमिकता दी जाती है, ताकि संक्रमित प्रोस्टेट से गुजरने वाली नली से और नुकसान न हो। यह निर्णय डॉक्टर परिस्थिति के अनुसार लेते हैं।
संभावित जटिलताएँ
समय पर इलाज न मिलने पर:
- सेप्सिस और सेप्टिक शॉक (सबसे गंभीर)
- मूत्र रुकना
- एब्सेस का फटकर मूत्रनली, मलाशय या पेरिनियम में रिसना (फिस्टुला बनना)
- एपिडिडिमाइटिस (अंडकोष के पास सूजन)
- आसपास के हिस्सों में संक्रमण फैलना
- पुराना प्रोस्टेटाइटिस या बार-बार संक्रमण
- कभी-कभी यौन क्रिया या प्रजनन क्षमता पर असर
रोग का पूर्वानुमान (प्रोग्नोसिस)
आधुनिक इलाज से अधिकांश मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, खासकर जब निदान जल्दी हो और ड्रेनेज सही समय पर हो। देरी, बहुत बुजुर्ग होना और अनियंत्रित मधुमेह जैसी स्थितियाँ परिणाम को जोखिमपूर्ण बना सकती हैं। इलाज के बाद फॉलो-अप में अल्ट्रासाउंड या स्कैन कराकर यह सुनिश्चित किया जाता है कि मवाद पूरी तरह साफ हो गया है।
रोकथाम के उपाय
- डायबिटीज को नियंत्रित रखें: नियमित जाँच और दवा लें
- मूत्र संक्रमण का पूरा इलाज कराएँ: लक्षण घटने पर भी दवा का कोर्स अधूरा न छोड़ें
- BPH का समय पर इलाज कराएँ: पेशाब में रुकावट को नज़रअंदाज़ न करें
- कैथेटर की देखभाल: ज़रूरत न हो तो कैथेटर जल्दी हटवाएँ और साफ-सफाई रखें
- खूब पानी पिएँ और पेशाब को देर तक न रोकें
- व्यक्तिगत स्वच्छता और सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाएँ
- प्रोस्टेट प्रक्रियाओं के बाद डॉक्टर की सलाह का पालन करें
- कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग सामान्य संक्रमण को हल्के में न लें
डॉक्टर से कब मिलें?
निम्न स्थितियों में बिना देरी के मूत्र रोग विशेषज्ञ (यूरोलॉजिस्ट) या नज़दीकी अस्पताल से संपर्क करें:
- बुखार के साथ पेशाब में जलन या दर्द
- पेशाब रुक जाना या बहुत कठिनाई से आना
- पेरिनियम या निचले पेट में तेज दर्द
- पेशाब में मवाद या खून
- मधुमेह या कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्ति में इनमें से कोई भी लक्षण
निष्कर्ष
प्रोस्टेटिक एब्सेस एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य संक्रमण है। मधुमेह, कैथेटर या प्रोस्टेट संबंधी समस्या वाले पुरुषों को विशेष सतर्क रहना चाहिए। बुखार के साथ पेशाब की तकलीफ को सामान्य संक्रमण मानकर टालना खतरनाक हो सकता है। शीघ्र जाँच, उचित एंटीबायोटिक और आवश्यकता पड़ने पर मवाद निकालने की प्रक्रिया से मरीज सामान्यतः पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं। स्वयं दवा लेने के बजाय योग्य चिकित्सक की देखरेख में उपचार कराएँ।
