मोर्टन न्यूरोमा: कारण, लक्षण और उपचार
परिचय
मोर्टन न्यूरोमा (Morton’s Neuroma) पैर से जुड़ी एक सामान्य लेकिन अक्सर अनदेखी की जाने वाली समस्या है, जो पैर के अगले हिस्से (forefoot) में दर्द, जलन और सुन्नपन का कारण बनती है। इसे “मोर्टन का दर्द” या “इंटरडिजिटल न्यूरोमा” भी कहा जाता है। यह कोई ट्यूमर या कैंसर नहीं है, जैसा कि “न्यूरोमा” शब्द सुनकर लग सकता है, बल्कि यह पैर की उंगलियों के बीच से गुजरने वाली एक तंत्रिका (nerve) के आसपास के ऊतक का मोटा होना है। यह स्थिति सबसे ज़्यादा तीसरी और चौथी उंगली के बीच के हिस्से में होती है, हालांकि यह दूसरी और तीसरी उंगली के बीच भी हो सकती है।
यह समस्या महिलाओं में पुरुषों की तुलना में कहीं ज़्यादा आम है, मुख्यतः ऊँची एड़ी और तंग जूतों के इस्तेमाल के कारण। सही जानकारी और समय पर इलाज से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
मोर्टन न्यूरोमा क्या है?
हमारे पैर की हर उंगली के बीच एक पतली तंत्रिका होती है जो संवेदना (sensation) पहुंचाने का काम करती है। जब यह तंत्रिका बार-बार दबाव या रगड़ के कारण चिड़चिड़ी (irritated) हो जाती है, तो उसके चारों ओर मौजूद ऊतक मोटे होने लगते हैं। इस प्रक्रिया को “पेरिन्यूरल फाइब्रोसिस” (perineural fibrosis) कहा जाता है। यह मोटापन तंत्रिका पर दबाव बढ़ाता है, जिससे दर्द, जलन और झनझनाहट जैसी अनुभूतियाँ होती हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि “न्यूरोमा” नाम के बावजूद यह असल में कोई गांठ या ट्यूमर नहीं, बल्कि तंत्रिका के आसपास के ऊतकों में होने वाला परिवर्तन है।
मोर्टन न्यूरोमा के कारण
मोर्टन न्यूरोमा होने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं:
1. गलत जूतों का इस्तेमाल तंग, नुकीले या ऊँची एड़ी वाले जूते पैर के अगले हिस्से पर अनावश्यक दबाव डालते हैं। इससे उंगलियों के बीच की तंत्रिका दब जाती है। यही कारण है कि यह समस्या महिलाओं में अधिक देखी जाती है, जो नियमित रूप से हील्स पहनती हैं।
2. पैर की बनावट संबंधी समस्याएँ फ्लैट फुट (flat feet), बहुत ऊँचा आर्च (high arches), बनियन (bunion) या हैमर टो (hammer toe) जैसी समस्याएँ पैर के भार वितरण को असंतुलित कर देती हैं, जिससे तंत्रिका पर दबाव बढ़ता है।
3. दोहराए जाने वाले तनाव वाली गतिविधियाँ दौड़ना, टेनिस, बास्केटबॉल जैसे खेल जिनमें पैर के अगले हिस्से पर बार-बार दबाव पड़ता है, इस स्थिति के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
4. पैर में चोट पहले लगी किसी चोट के कारण भी तंत्रिका के आसपास सूजन और मोटापन विकसित हो सकता है।
5. मोटापा अधिक वजन होने से पैरों पर पड़ने वाला दबाव बढ़ जाता है, जिससे तंत्रिका पर असर पड़ सकता है।
प्रमुख लक्षण
मोर्टन न्यूरोमा के लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं और समय के साथ बढ़ सकते हैं। सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:
- पैर की उंगलियों के बीच, विशेषकर तीसरी और चौथी उंगली के बीच तेज़ या जलन जैसा दर्द
- ऐसा महसूस होना जैसे जूते में कोई कंकड़ या तह पड़ी हो
- उंगलियों में झनझनाहट या सुन्नपन
- चलने या खड़े होने पर दर्द का बढ़ना
- तंग जूते पहनने पर लक्षणों का तेज़ होना
- जूते उतारने और पैर की मालिश करने पर आराम मिलना
- कभी-कभी उंगलियों के बीच सूजन महसूस होना (हालांकि बाहरी सूजन आमतौर पर दिखाई नहीं देती)
शुरुआत में दर्द रुक-रुक कर आता है, लेकिन अगर समस्या को नज़रअंदाज़ किया जाए तो यह लगातार और अधिक तीव्र हो सकता है।
जोखिम कारक (Risk Factors)
निम्नलिखित लोगों में मोर्टन न्यूरोमा होने की संभावना अधिक होती है:
- वे महिलाएँ जो नियमित रूप से ऊँची एड़ी के जूते पहनती हैं
- एथलीट, विशेषकर धावक और खेलों से जुड़े लोग जिनके पैरों पर बार-बार दबाव पड़ता है
- पैर की संरचनात्मक समस्याओं (जैसे फ्लैट फुट या बनियन) से पीड़ित लोग
- 40 से 60 वर्ष की आयु वर्ग के लोग, जिनमें यह समस्या अधिक देखी जाती है
- मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति
निदान (Diagnosis)
मोर्टन न्यूरोमा का निदान आमतौर पर डॉक्टर द्वारा शारीरिक परीक्षण के ज़रिए किया जाता है। डॉक्टर पैर को दबाकर देखते हैं कि दर्द या “क्लिक” जैसी आवाज़ (जिसे मुल्डर्स क्लिक टेस्ट कहा जाता है) महसूस होती है या नहीं। इसके अलावा निम्नलिखित जांचों का सहारा भी लिया जा सकता है:
एक्स-रे (X-ray): यह हड्डियों से जुड़ी अन्य समस्याओं, जैसे फ्रैक्चर या आर्थराइटिस, को खारिज करने के लिए किया जाता है, क्योंकि न्यूरोमा खुद एक्स-रे में दिखाई नहीं देता।
अल्ट्रासाउंड (Ultrasound): यह नरम ऊतकों की जांच के लिए उपयोगी है और न्यूरोमा के आकार व स्थान की पहचान करने में मदद करता है।
एमआरआई (MRI): यह सबसे विस्तृत जानकारी देता है और तब इस्तेमाल किया जाता है जब निदान स्पष्ट न हो या सर्जरी की योजना बनानी हो।
उपचार के विकल्प
मोर्टन न्यूरोमा का इलाज लक्षणों की गंभीरता पर निर्भर करता है। ज़्यादातर मामलों में गैर-सर्जिकल तरीकों से ही राहत मिल जाती है।
गैर-सर्जिकल उपचार
1. जूते बदलना चौड़े पंजे वाले, आरामदायक और कम एड़ी वाले जूते पहनना सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम है। तंग और ऊँची एड़ी के जूतों से पूरी तरह बचना चाहिए।
2. पैडिंग और आर्च सपोर्ट मेटाटार्सल पैड या कस्टम आर्च सपोर्ट इनसोल का इस्तेमाल पैर पर पड़ने वाले दबाव को पुनर्वितरित करने में मदद करता है, जिससे तंत्रिका पर दबाव कम होता है।
3. आराम और बर्फ की सिकाई दर्द वाले हिस्से पर बर्फ की सिकाई करने और पैरों को आराम देने से सूजन कम करने में मदद मिलती है।
4. फिजियोथेरेपी कुछ स्ट्रेचिंग और मजबूती बढ़ाने वाले व्यायाम पैर की मांसपेशियों को संतुलित करने और दबाव कम करने में सहायक होते हैं।
5. दवाइयाँ डॉक्टर की सलाह पर सूजन-रोधी दवाइयाँ (NSAIDs) अस्थायी राहत के लिए दी जा सकती हैं।
6. कॉर्टिकोस्टेरॉइड इंजेक्शन जब अन्य उपाय पर्याप्त राहत न दें, तो डॉक्टर प्रभावित हिस्से में स्टेरॉइड इंजेक्शन देने की सलाह दे सकते हैं, जो सूजन और दर्द को कम करने में मदद करता है।
सर्जिकल उपचार
अगर लंबे समय (आमतौर पर 6 महीने से अधिक) तक गैर-सर्जिकल उपचार से आराम न मिले, तो सर्जरी का विकल्प अपनाया जा सकता है। इसमें मुख्यतः दो तरीके होते हैं:
- न्यूरेक्टॉमी (Neurectomy): इसमें प्रभावित तंत्रिका के हिस्से को शल्य चिकित्सा द्वारा निकाल दिया जाता है। यह सबसे आम सर्जिकल तरीका है और अधिकतर मामलों में स्थायी राहत देता है, हालांकि इससे उस हिस्से में स्थायी सुन्नपन रह सकता है।
- डीकंप्रेशन सर्जरी (Decompression Surgery): इसमें तंत्रिका के आसपास के ऊतकों या लिगामेंट को काटकर तंत्रिका पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जाता है, जिससे तंत्रिका को हटाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
सर्जरी के बाद ठीक होने में आमतौर पर कुछ हफ्तों का समय लगता है, और अधिकांश मरीज़ सामान्य गतिविधियों में लौट आते हैं।
घरेलू देखभाल के उपाय
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ आसान बदलाव लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं:
- ऊँची एड़ी के जूतों का इस्तेमाल कम से कम करें
- चौड़े पंजे वाले और सही नाप के जूते चुनें
- लंबे समय तक एक ही स्थिति में खड़े रहने से बचें
- नियमित रूप से पैरों की हल्की मालिश करें
- वजन नियंत्रित रखें ताकि पैरों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े
- खेल-कूद के दौरान उचित सपोर्ट वाले जूते पहनें
रोकथाम (Prevention)
मोर्टन न्यूरोमा को पूरी तरह रोकना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन कुछ सावधानियों से इसके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है:
- ऐसे जूते पहनें जिनमें उंगलियों को हिलने-डुलने की पर्याप्त जगह हो
- ऊँची एड़ी के जूतों को सीमित अवसरों तक सीमित रखें
- यदि आप एथलीट हैं, तो प्रशिक्षण के दौरान उचित पैडिंग और सपोर्ट वाले जूतों का इस्तेमाल करें
- पैर में किसी भी असामान्य दर्द या तकलीफ को नज़रअंदाज़ न करें और शुरुआती अवस्था में ही डॉक्टर से सलाह लें
डॉक्टर से कब मिलें?
यदि पैर की उंगलियों के बीच दर्द, जलन या सुन्नपन दो-तीन सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, या रोज़मर्रा के काम जैसे चलना-फिरना प्रभावित होने लगे, तो देर किए बिना किसी ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ या पोडियाट्रिस्ट (foot specialist) से संपर्क करना चाहिए। समय पर निदान और उपचार से न केवल दर्द से राहत मिलती है, बल्कि समस्या को गंभीर होने से भी रोका जा सकता है।
निष्कर्ष
मोर्टन न्यूरोमा एक ऐसी स्थिति है जो असहज ज़रूर करती है, लेकिन यह गंभीर या जानलेवा बीमारी नहीं है। सही जूतों का चुनाव, समय पर चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक जीवनशैली में बदलाव से इस समस्या को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। अधिकांश मामलों में गैर-सर्जिकल उपचार से ही पर्याप्त राहत मिल जाती है, और सर्जरी की ज़रूरत बहुत कम मामलों में ही पड़ती है। यदि आपको इससे मिलते-जुलते लक्षण महसूस हों, तो आत्म-निदान करने के बजाय किसी योग्य चिकित्सक से जांच करवाना सबसे उचित कदम है।
