फेयोक्रोमोसाइटोमा (Pheochromocytoma - एड्रेनल ग्रंथि का ट्यूमर)
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फेयोक्रोमोसाइटोमा (Pheochromocytoma): एड्रेनल ग्रंथि का ट्यूमर

परिचय

फेयोक्रोमोसाइटोमा एक दुर्लभ किंतु महत्वपूर्ण ट्यूमर है जो एड्रेनल ग्रंथि (Adrenal Gland) के मेड्यूला (भीतरी भाग) में विकसित होता है। हमारे शरीर में दो एड्रेनल ग्रंथियाँ होती हैं, जो दोनों किडनी के ऊपरी हिस्से में स्थित होती हैं। ये ग्रंथियाँ कैटेकोलामाइन (Catecholamines) नामक हार्मोन बनाती हैं, जिनमें एड्रेनालिन (एपिनेफ्रिन) और नॉरएड्रेनालिन (नॉरएपिनेफ्रिन) प्रमुख हैं। जब एड्रेनल मेड्यूला की कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि होती है, तो यह ट्यूमर बनता है, जो इन हार्मोनों को अत्यधिक मात्रा में स्रावित करने लगता है। इसी अत्यधिक हार्मोन स्राव के कारण शरीर में कई गंभीर लक्षण उत्पन्न होते हैं, जिनमें रक्तचाप का असामान्य रूप से बढ़ना सबसे प्रमुख है।

यह ट्यूमर अधिकतर सौम्य (Benign) होता है, यानी यह शरीर के अन्य हिस्सों में नहीं फैलता, लेकिन लगभग 10 प्रतिशत मामलों में यह घातक (Malignant) भी हो सकता है। यह किसी भी उम्र में हो सकता है, पर सबसे अधिक इसका निदान 30 से 50 वर्ष की आयु के बीच होता है।

फेयोक्रोमोसाइटोमा के कारण

फेयोक्रोमोसाइटोमा के सटीक कारणों को पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है, लेकिन कुछ प्रमुख कारक इसके विकास में भूमिका निभाते हैं:

आनुवंशिक कारक: लगभग 30 से 40 प्रतिशत मामलों में यह ट्यूमर आनुवंशिक होता है। कुछ जीन उत्परिवर्तन (Gene Mutations) इसके जोखिम को बढ़ाते हैं, जैसे कि:

  • मल्टीपल एंडोक्राइन नियोप्लासिया टाइप 2 (MEN 2): यह एक आनुवंशिक सिंड्रोम है जिसमें थायरॉइड कैंसर के साथ फेयोक्रोमोसाइटोमा भी हो सकता है।
  • वॉन हिप्पल-लिंडाऊ सिंड्रोम (VHL Syndrome): इस स्थिति में शरीर के विभिन्न अंगों में ट्यूमर बनने की प्रवृत्ति होती है।
  • न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 1 (NF1): यह त्वचा और तंत्रिका तंत्र से जुड़ा आनुवंशिक विकार है, जिसमें फेयोक्रोमोसाइटोमा का खतरा बढ़ जाता है।
  • SDH जीन उत्परिवर्तन: सक्सिनेट डिहाइड्रोजिनेज जीन में बदलाव भी इस ट्यूमर से जुड़ा पाया गया है।

पारिवारिक इतिहास: यदि परिवार में किसी को यह ट्यूमर हुआ है, तो अन्य सदस्यों में इसका खतरा बढ़ जाता है।

अज्ञात कारण: शेष मामलों में यह ट्यूमर बिना किसी स्पष्ट आनुवंशिक कारण के अपने आप (Sporadic) विकसित हो जाता है।

फेयोक्रोमोसाइटोमा के लक्षण

फेयोक्रोमोसाइटोमा के लक्षण मुख्य रूप से शरीर में अत्यधिक कैटेकोलामाइन स्राव के कारण होते हैं। ये लक्षण अक्सर आते-जाते रहते हैं, यानी कभी-कभी अचानक तीव्र होकर प्रकट होते हैं और फिर कम हो जाते हैं। प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:

  • उच्च रक्तचाप (Hypertension): यह सबसे आम और महत्वपूर्ण लक्षण है। कई रोगियों में रक्तचाप लगातार ऊंचा बना रहता है, जबकि कुछ में यह बार-बार अचानक (Paroxysmal) बढ़ता है।
  • तेज़ धड़कन (Palpitations): दिल की धड़कन असामान्य रूप से तेज़ महसूस होना।
  • अत्यधिक पसीना आना (Excessive Sweating): बिना किसी शारीरिक परिश्रम के भी पसीना आना।
  • सिरदर्द (Headache): अचानक और तीव्र सिरदर्द होना, जो अक्सर उच्च रक्तचाप के साथ जुड़ा होता है।
  • चिंता और घबराहट (Anxiety): बिना किसी स्पष्ट कारण के अत्यधिक घबराहट या पैनिक अटैक जैसी अनुभूति।
  • कंपन (Tremors): हाथों या शरीर में कंपकंपी महसूस होना।
  • चेहरे का पीलापन (Pallor): त्वचा का रंग फीका पड़ जाना।
  • वजन में कमी (Weight Loss): बिना किसी प्रयास के अचानक वजन घटना।
  • थकान (Fatigue): लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना।
  • मतली और उल्टी (Nausea and Vomiting): कुछ रोगियों में यह लक्षण भी देखे जाते हैं।
  • रक्त शर्करा में वृद्धि (High Blood Sugar): कैटेकोलामाइन का अधिक स्राव रक्त शर्करा को बढ़ा सकता है, जिससे मधुमेह जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

ये लक्षण अक्सर तनाव, शारीरिक गतिविधि, कुछ खाद्य पदार्थों या दवाओं के सेवन, या पेट पर दबाव पड़ने से भी उत्पन्न हो सकते हैं।

निदान (Diagnosis)

फेयोक्रोमोसाइटोमा का निदान करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि इसके लक्षण अन्य सामान्य बीमारियों से मिलते-जुलते हैं। निदान के लिए निम्नलिखित जांचें की जाती हैं:

रक्त और मूत्र परीक्षण: इनमें कैटेकोलामाइन और उनके उपापचयी उत्पादों (Metanephrines) के स्तर की जांच की जाती है। 24 घंटे का मूत्र परीक्षण (24-hour Urine Test) इसमें विशेष रूप से उपयोगी होता है, जिसमें मेटानेफ्रिन और वेनिलिलमेंडेलिक एसिड (VMA) के स्तर मापे जाते हैं।

प्लाज्मा फ्री मेटानेफ्रिन टेस्ट: यह एक अत्यधिक संवेदनशील रक्त परीक्षण है, जो फेयोक्रोमोसाइटोमा की पहचान में सहायक होता है।

इमेजिंग परीक्षण: निदान की पुष्टि होने के बाद ट्यूमर के स्थान का पता लगाने के लिए इमेजिंग जांच की जाती है:

  • सीटी स्कैन (CT Scan): एड्रेनल ग्रंथि की संरचना और ट्यूमर के आकार को देखने के लिए।
  • एमआरआई (MRI): विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं या विकिरण के जोखिम से बचने के लिए प्राथमिकता दी जाती है।
  • MIBG स्कैन (Metaiodobenzylguanidine Scan): यह विशेष स्कैन ट्यूमर की उपस्थिति और उसके शरीर में फैलाव की जांच में सहायक है।
  • PET स्कैन: कुछ मामलों में अतिरिक्त जानकारी के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

आनुवंशिक परीक्षण: यदि पारिवारिक इतिहास संदिग्ध हो या रोगी युवा हो, तो जीन उत्परिवर्तन की जांच के लिए आनुवंशिक परीक्षण की सलाह दी जाती है।

उपचार (Treatment)

फेयोक्रोमोसाइटोमा का मुख्य उपचार सर्जरी के माध्यम से ट्यूमर को शल्य चिकित्सा द्वारा निकालना है। हालांकि, सर्जरी से पहले और बाद में कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए जाते हैं:

दवाओं द्वारा तैयारी: सर्जरी से पहले रक्तचाप को नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक होता है, क्योंकि सर्जरी के दौरान ट्यूमर को छूने या हिलाने से कैटेकोलामाइन का अचानक स्राव हो सकता है, जिससे रक्तचाप में खतरनाक उछाल आ सकता है। इसके लिए आमतौर पर निम्न प्रकार की दवाएं दी जाती हैं:

  • अल्फा-ब्लॉकर्स (Alpha-blockers): जैसे फेनॉक्सीबेन्जामाइन, जो रक्तवाहिकाओं को शिथिल करके रक्तचाप को नियंत्रित करती हैं। इन्हें सर्जरी से कम से कम एक से दो सप्ताह पहले शुरू किया जाता है।
  • बीटा-ब्लॉकर्स (Beta-blockers): ये अल्फा-ब्लॉकर्स के बाद दी जाती हैं, ताकि हृदय गति को नियंत्रित किया जा सके।
  • पर्याप्त तरल पदार्थ और नमक का सेवन: सर्जरी से पहले शरीर में द्रव की मात्रा बढ़ाने के लिए यह सलाह दी जाती है, ताकि सर्जरी के दौरान रक्तचाप में अत्यधिक गिरावट न हो।

सर्जरी (Adrenalectomy): ट्यूमर को निकालने के लिए एड्रेनल ग्रंथि को आंशिक या पूर्ण रूप से हटाया जाता है। आजकल अधिकतर मामलों में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी (Laparoscopic Surgery) का उपयोग किया जाता है, जो कम आक्रामक होती है और रिकवरी को तेज़ करती है। हालांकि, यदि ट्यूमर बड़ा हो या घातक होने की आशंका हो, तो पारंपरिक ओपन सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।

घातक मामलों में उपचार: यदि ट्यूमर घातक हो और शरीर के अन्य भागों में फैल चुका हो, तो कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, या MIBG थेरेपी जैसे अतिरिक्त उपचार विकल्पों का सहारा लिया जाता है।

नियमित निगरानी: सर्जरी के बाद भी रोगी को नियमित रूप से रक्तचाप, हार्मोन स्तर, और इमेजिंग जांच के माध्यम से निगरानी में रखा जाता है, क्योंकि ट्यूमर के दोबारा होने की संभावना बनी रहती है, विशेष रूप से आनुवंशिक मामलों में।

संभावित जटिलताएं

यदि फेयोक्रोमोसाइटोमा का समय पर निदान और उपचार न किया जाए, तो यह गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है, जैसे:

  • हृदयाघात (Heart Attack)
  • स्ट्रोक (Stroke)
  • हृदय की मांसपेशियों को नुकसान (Cardiomyopathy)
  • किडनी को नुकसान
  • अनियंत्रित उच्च रक्तचाप के कारण जीवन के लिए खतरा

इसलिए समय पर निदान और उचित चिकित्सकीय देखरेख अत्यंत महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

फेयोक्रोमोसाइटोमा एक दुर्लभ लेकिन गंभीर ट्यूमर है, जो एड्रेनल ग्रंथि से उत्पन्न होकर शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है। समय पर सही निदान और उचित उपचार से इस स्थिति को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। सर्जरी के माध्यम से अधिकांश रोगी पूरी तरह से स्वस्थ हो जाते हैं। यदि किसी व्यक्ति में बार-बार उच्च रक्तचाप, तेज़ धड़कन, अत्यधिक पसीना, और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई दें, तो चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है, ताकि समय रहते सही निदान हो सके और गंभीर जटिलताओं से बचा जा सके।

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