निपाह वायरस (Nipah Virus)
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निपाह वायरस: एक गंभीर जूनोटिक बीमारी

परिचय

निपाह वायरस (Nipah Virus, NiV) एक अत्यंत खतरनाक जूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से मनुष्यों में फैलता है। यह हेनिपावायरस (Henipavirus) परिवार से संबंधित है, जिसमें हेंड्रा वायरस भी शामिल है। निपाह वायरस को दुनिया की सबसे घातक बीमारियों में गिना जाता है, क्योंकि इसमें मृत्यु दर बेहद अधिक होती है और अभी तक इसके लिए कोई स्वीकृत टीका या विशिष्ट एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है। इसकी खोज सबसे पहले 1998 में मलेशिया में सुअर पालकों के बीच हुए एक प्रकोप के दौरान हुई थी।

निपाह वायरस भारत, बांग्लादेश, मलेशिया, सिंगापुर और फिलीपींस जैसे एशियाई देशों में समय-समय पर प्रकोप के रूप में सामने आता रहा है। भारत में विशेष रूप से केरल राज्य में 2018 से लगभग हर साल इसके मामले सामने आते रहे हैं, और हाल के वर्षों में पश्चिम बंगाल तथा बांग्लादेश में भी इसके मामले दर्ज किए गए हैं।

निपाह वायरस का इतिहास

निपाह वायरस का नाम मलेशिया के एक गांव “सुंगई निपाह” के नाम पर रखा गया है, जहां 1998-99 में इसका पहला बड़ा प्रकोप हुआ था। उस समय यह वायरस सुअरों के माध्यम से मनुष्यों में फैला था, जिसके कारण मलेशिया और सिंगापुर में सैकड़ों लोग संक्रमित हुए और सौ से अधिक लोगों की मृत्यु हुई। इसके बाद मलेशिया और सिंगापुर में इस वायरस का कोई नया प्रकोप दर्ज नहीं हुआ।

<cite index=”2-1″>2001 में भारत और बांग्लादेश में निपाह वायरस के प्रकोप सामने आए। बांग्लादेश में लगभग हर साल इसके मामले दर्ज होते रहे हैं, जबकि भारत में समय-समय पर विभिन्न हिस्सों में इसके प्रकोप होते रहे हैं। <cite index=”1-1″>भारत में सबसे अधिक मामले 2001 में 66 और 2018 में 18 दर्ज किए गए थे। <cite index=”1-1″>केरल राज्य में 2018 में पहला प्रकोप दर्ज होने के बाद 2019, 2021, 2023, 2025 और 2026 में भी वहां प्रकोप हुए।

स्रोत और फैलने का तरीका

निपाह वायरस का प्राकृतिक स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ हैं, जिन्हें “फ्लाइंग फॉक्स” (Pteropus प्रजाति) भी कहा जाता है। <cite index=”1-1″>यह वायरस संक्रमित जानवरों, या ऐसे फलों और फल उत्पादों के माध्यम से मनुष्यों में फैलता है जो संक्रमित चमगादड़ों की लार, मूत्र और मल से दूषित होते हैं। <cite index=”5-1″>कच्चे खजूर के रस (date palm juice) का सेवन, जो संक्रमित चमगादड़ों की लार या मूत्र से दूषित हो सकता है, संक्रमण का एक प्रमुख कारण रहा है।

इसके अलावा, यह वायरस निम्नलिखित तरीकों से भी फैल सकता है:

  • संक्रमित सुअरों या अन्य पालतू जानवरों के सीधे संपर्क में आने से
  • संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में आने से, विशेष रूप से अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से
  • संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों (जैसे लार, थूक) के संपर्क में आने से

हालांकि यह ध्यान देने योग्य है कि मनुष्य से मनुष्य में संक्रमण की दर अपेक्षाकृत कम है और आमतौर पर इसके लिए बीमार व्यक्ति के साथ बहुत नज़दीकी संपर्क आवश्यक होता है।

लक्षण

निपाह वायरस से संक्रमित होने के बाद लक्षण आमतौर पर 4 से 14 दिनों के भीतर दिखाई देने लगते हैं। शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं, जिस कारण इसकी पहचान में देरी हो सकती है। मुख्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • तेज़ बुखार
  • सिरदर्द
  • मांसपेशियों में दर्द
  • गले में खराश
  • उल्टी और चक्कर आना

बीमारी बढ़ने पर यह मस्तिष्क को प्रभावित करने लगती है, जिससे इंसेफेलाइटिस (मस्तिष्क शोथ) की स्थिति पैदा हो सकती है। इस अवस्था में मरीज़ को भ्रम, उनींदापन, दौरे (सीज़र) और यहां तक कि कोमा जैसी गंभीर स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। कुछ मामलों में सांस लेने में तकलीफ और श्वसन तंत्र से जुड़ी जटिलताएं भी देखी गई हैं।

मृत्यु दर और गंभीरता

निपाह वायरस की सबसे चिंताजनक विशेषता इसकी उच्च मृत्यु दर है। <cite index=”8-1″>मनुष्यों में इसकी मृत्यु दर 40% से 75% के बीच हो सकती है, जो इसे दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारियों में शामिल करता है। यही कारण है कि जब भी इसका कोई नया मामला सामने आता है, तो स्वास्थ्य अधिकारी तुरंत सतर्क हो जाते हैं और व्यापक स्तर पर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग (संपर्कों की पहचान) शुरू कर दी जाती है।

हाल के प्रकोप (2026)

वर्ष 2026 में निपाह वायरस के कई मामले सामने आए हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह बीमारी अभी भी एक सक्रिय स्वास्थ्य खतरा बनी हुई है।

पश्चिम बंगाल, भारत: <cite index=”3-1″>26 जनवरी 2026 को भारत में पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के एक अस्पताल में 25 वर्षीय दो स्वास्थ्यकर्मियों में निपाह वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई, जिसकी पुष्टि पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर वायरोलॉजी ने की। <cite index=”3-1″>इन मामलों से जुड़े कुल 196 संपर्कों की पहचान की गई, जिनकी निगरानी और जांच की गई और सभी में संक्रमण नकारात्मक पाया गया।

बांग्लादेश: <cite index=”10-1″>3 फरवरी 2026 को बांग्लादेश के राजशाही डिवीजन में एक व्यक्ति में निपाह वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई। मरीज़ को 21 जनवरी को बुखार और तंत्रिका संबंधी लक्षण शुरू हुए थे, और 29 जनवरी को संक्रमण की प्रयोगशाला पुष्टि हुई। मरीज़ ने कच्चे खजूर के रस के सेवन का इतिहास बताया था। <cite index=”10-1″>उसके सभी 35 संपर्कों की निगरानी की गई और सभी में जांच नकारात्मक आई।

केरल, भारत: <cite index=”1-1″>11 जून 2026 को केरल के कोझिकोड जिले में एक प्रयोगशाला-पुष्ट निपाह वायरस मामला सामने आया। यह एक वयस्क पुरुष था, जिसमें 30 मई 2026 को लक्षण दिखाई दिए थे। <cite index=”5-1″>उसे तंत्रिका संबंधी लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया और वेंटिलेटर सपोर्ट पर आईसीयू में रखा गया। <cite index=”1-1″>18 जून 2026 तक कुल 104 संपर्कों की पहचान की गई, जिसमें 4 अति-उच्च जोखिम वाले, 14 उच्च-जोखिम वाले और 86 निम्न-जोखिम वाले संपर्क शामिल थे, जिनमें से 45 स्वास्थ्यकर्मी थे। राहत की बात यह रही कि किसी भी मामले में द्वितीयक संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई।

इन घटनाओं के बाद <cite index=”6-1″>थाईलैंड, मलेशिया और सिंगापुर सहित कई देशों ने हवाई अड्डों पर सख्त स्वास्थ्य जांच शुरू कर दी, हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने किसी भी प्रकार के यात्रा या व्यापार प्रतिबंध की सिफारिश नहीं की।

विशेषज्ञों की राय

<cite index=”4-1″>ग्लोबल वायरस नेटवर्क (GVN) के अनुसार, यह प्रकोप चिंताजनक तो है, लेकिन अप्रत्याशित नहीं। दक्षिण एशिया, विशेष रूप से भारत और बांग्लादेश में निपाह वायरस के छिटपुट संक्रमण लगभग हर साल देखे जाते हैं <cite index=”3-1″>और ये एक ज्ञात पैटर्न का अनुसरण करते हैं, इसलिए ये वैश्विक स्वास्थ्य के लिए किसी नए या बढ़ते खतरे का संकेत नहीं देते। ड्यूक-एनयूएस मेडिकल स्कूल, सिंगापुर के विशेषज्ञ लिनफा वांग के अनुसार, <cite index=”4-1″>निपाह वायरस के क्षेत्रीय या वैश्विक प्रसार का जोखिम बहुत कम है, और भारत तथा बांग्लादेश में हुए समान प्रकोप मुख्य रूप से विशिष्ट सांस्कृतिक और पर्यावरणीय कारकों से प्रेरित रहे हैं, न कि लगातार मानव-से-मानव संचरण से।

बचाव के उपाय

चूंकि निपाह वायरस के लिए अभी कोई स्वीकृत टीका उपलब्ध नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे कारगर उपाय है। निम्नलिखित सावधानियां संक्रमण से बचने में मददगार हो सकती हैं:

  1. कच्चे खजूर के रस का सेवन न करें — विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां चमगादड़ों की मौजूदगी हो, क्योंकि यह संक्रमण का एक प्रमुख स्रोत रहा है।
  2. ज़मीन पर गिरे या आधे खाए हुए फल न खाएं, क्योंकि इन पर चमगादड़ों की लार लगी हो सकती है।
  3. बीमार सुअरों या अन्य जानवरों के सीधे संपर्क से बचें
  4. संक्रमित व्यक्ति की देखभाल करते समय मास्क, दस्ताने और अन्य सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग करें, विशेष रूप से अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों के लिए यह अत्यंत आवश्यक है।
  5. हाथों की स्वच्छता बनाए रखें और नियमित रूप से साबुन से हाथ धोएं।
  6. लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें ताकि समय रहते उपचार शुरू किया जा सके और आगे संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

उपचार

वर्तमान में निपाह वायरस के लिए कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवा या स्वीकृत टीका उपलब्ध नहीं है। उपचार मुख्य रूप से लक्षणों के प्रबंधन (सपोर्टिव केयर) पर केंद्रित होता है, जिसमें बुखार को नियंत्रित करना, शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखना और गंभीर मामलों में वेंटिलेटर सपोर्ट देना शामिल है। हालांकि, कुछ संभावित टीकों और एंटीवायरल दवाओं ने पशु परीक्षणों में सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं, और वैज्ञानिक इस दिशा में लगातार शोध कर रहे हैं।

निष्कर्ष

निपाह वायरस एक गंभीर और घातक जूनोटिक बीमारी है, जो हर साल दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों, विशेष रूप से भारत और बांग्लादेश में सामने आती रहती है। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार इसके वैश्विक स्तर पर फैलने का जोखिम फिलहाल कम है, लेकिन इसकी उच्च मृत्यु दर और उपचार की सीमित उपलब्धता इसे एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनाती है। समय पर सतर्कता, त्वरित कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, जागरूकता और उचित सावधानियां अपनाकर इसके प्रकोप को नियंत्रित किया जा सकता है। स्वास्थ्य अधिकारियों और वैज्ञानिकों का निरंतर प्रयास इस बात को सुनिश्चित करता है कि भविष्य में इस वायरस से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

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