ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD): समझें, पहचानें और सही राह चुनें
प्रस्तावना क्या आपने कभी घर से निकलने के बाद यह सोचकर वापस लौटकर ताला जाँचा है कि कहीं दरवाज़ा खुला तो नहीं रह गया? या हाथ धोने के बाद भी मन में आया कि “शायद ठीक से साफ़ नहीं हुए”? ऐसे विचार लगभग हर व्यक्ति के मन में कभी न कभी आते हैं। लेकिन जब…
