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लॉक्ड-इन सिंड्रोम: जब शरीर कैद बन जाए लेकिन मन आज़ाद रहे
परिचय कल्पना कीजिए कि आपका दिमाग पूरी तरह जाग्रत है, आप सब कुछ सुन-समझ सकते हैं, लेकिन आपका शरीर पूरी तरह लकवाग्रस्त हो चुका है — न आप बोल सकते हैं, न हाथ-पैर हिला सकते हैं, न चेहरे के भाव बदल सकते हैं। केवल आपकी आंखें ही हरकत में हैं। यही स्थिति चिकित्सा विज्ञान में…
