हैंड, फुट एंड माउथ डिजीज (HFMD)
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हैंड, फुट एंड माउथ डिजीज (HFMD): लक्षण, कारण, इलाज और बचाव

परिचय

हैंड, फुट एंड माउथ डिजीज (Hand, Foot, and Mouth Disease), जिसे संक्षेप में HFMD कहा जाता है, एक आम वायरल संक्रमण है। यह मुख्य रूप से पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है, हालाँकि बड़े बच्चों और वयस्कों को भी हो सकता है। इसमें मुँह में छाले, हथेलियों और तलवों पर दाने तथा बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

अधिकतर मामलों में यह बीमारी हल्की होती है और एक से दो सप्ताह में अपने आप ठीक हो जाती है। फिर भी, यह बहुत तेज़ी से फैलती है, इसलिए स्कूलों, डे-केयर सेंटरों और घरों में इसके प्रकोप आम हैं। इसके बारे में सही जानकारी होना माता-पिता और देखभाल करने वालों के लिए बेहद ज़रूरी है।

HFMD क्या है?

HFMD एक संक्रामक बीमारी है जो एंटरोवायरस (Enterovirus) परिवार के वायरस से होती है। इसका सबसे आम कारण कॉक्ससैकी वायरस A16 (Coxsackievirus A16) है। इसके अलावा कॉक्ससैकी वायरस A6, A10 और एंटरोवायरस 71 (EV-71) भी इसके कारण बन सकते हैं।

ध्यान रखें कि यह बीमारी पशुओं में होने वाली “फुट एंड माउथ डिजीज” (खुरपका-मुँहपका रोग) से बिल्कुल अलग है। दोनों के नाम मिलते-जुलते हैं, पर वायरस अलग हैं और पशुओं की बीमारी इंसानों में नहीं फैलती।

HFMD कैसे फैलता है?

यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में कई तरीकों से फैलता है:

  • सीधा संपर्क: संक्रमित व्यक्ति की लार, नाक के स्राव या गले के बलगम के संपर्क में आने से।
  • खाँसने और छींकने से: हवा में फैली सूक्ष्म बूँदों से।
  • छालों का तरल: दानों और फफोलों से निकलने वाले तरल के संपर्क से।
  • मल के ज़रिए: वायरस मल में कई सप्ताह तक मौजूद रह सकता है। डायपर बदलने या शौचालय के बाद हाथ न धोने से संक्रमण फैल सकता है।
  • दूषित सतहें: खिलौने, दरवाज़े के हैंडल, बर्तन और तौलिये जैसी वस्तुओं को छूने के बाद मुँह, नाक या आँखों को छूने से।

संक्रमण के पहले सप्ताह में व्यक्ति सबसे ज़्यादा संक्रामक होता है। लक्षण ठीक हो जाने के बाद भी वायरस शरीर से कुछ सप्ताह तक निकलता रह सकता है।

किन्हें अधिक खतरा है?

  • पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चे, खासकर डे-केयर या प्ले स्कूल जाने वाले
  • भीड़-भाड़ वाली जगहों में रहने वाले लोग
  • कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग
  • संक्रमित बच्चे की देखभाल करने वाले माता-पिता और शिक्षक

यह बीमारी बरसात और गर्मी के मौसम में अधिक देखी जाती है, हालाँकि कई गर्म देशों में यह पूरे साल हो सकती है।

ऊष्मायन अवधि (Incubation Period)

वायरस के शरीर में प्रवेश करने के बाद लक्षण दिखने में आमतौर पर तीन से छह दिन लगते हैं। इस दौरान व्यक्ति स्वस्थ दिखता है, पर दूसरों को संक्रमित कर सकता है।

HFMD के लक्षण

लक्षण आमतौर पर चरणों में प्रकट होते हैं।

शुरुआती लक्षण

  • हल्का या मध्यम बुखार (अक्सर 100 से 102 डिग्री फारेनहाइट)
  • गले में खराश और दर्द
  • भूख में कमी
  • थकान और चिड़चिड़ापन
  • सामान्य बेचैनी या अस्वस्थता

छोटे बच्चों में चिड़चिड़ापन, रोना और खाने से इनकार करना अक्सर पहले संकेत होते हैं।

मुँह के छाले

बुखार के एक-दो दिन बाद मुँह में दर्दनाक लाल छाले उभरते हैं। ये जीभ, मसूड़ों और गालों के अंदर की तरफ होते हैं। इन छालों के कारण बच्चे को निगलने में तकलीफ होती है, जिससे वह खाना-पीना छोड़ देता है।

त्वचा पर दाने

इसके बाद हथेलियों और तलवों पर लाल चपटे दाने निकलते हैं, जो कई बार छोटे फफोलों में बदल जाते हैं। ये दाने कभी-कभी घुटनों, कोहनियों, नितंबों और जननांग क्षेत्र पर भी दिखाई दे सकते हैं। आमतौर पर इनमें खुजली नहीं होती, पर कुछ बच्चों में हल्की खुजली या दर्द हो सकता है।

वयस्कों में लक्षण

वयस्कों में अक्सर लक्षण बहुत हल्के होते हैं या बिल्कुल नहीं दिखते। फिर भी वे संक्रमण फैला सकते हैं। कभी-कभी वयस्कों में दाने और गले का दर्द अपेक्षाकृत ज़्यादा परेशान करने वाला हो सकता है।

निदान कैसे होता है?

अधिकांश मामलों में डॉक्टर लक्षण देखकर और शारीरिक जाँच करके ही HFMD की पहचान कर लेते हैं। मुँह के छाले और हथेली-तलवों के दानों का विशेष पैटर्न निदान में मदद करता है। गंभीर या असामान्य मामलों में गले के स्वैब या मल का नमूना लेकर प्रयोगशाला में वायरस की जाँच की जा सकती है।

इलाज

HFMD के लिए कोई विशेष एंटीवायरल दवा नहीं है। इलाज का उद्देश्य लक्षणों से राहत देना और जटिलताओं से बचाना है। बीमारी आमतौर पर सात से दस दिन में स्वतः ठीक हो जाती है।

घर पर देखभाल के उपाय

  1. पर्याप्त तरल पदार्थ: सबसे बड़ा खतरा निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) का है, क्योंकि मुँह के छालों के कारण बच्चा पानी पीने से कतराता है। पानी, नारियल पानी, ORS और ठंडा दूध थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार दें।
  2. ठंडा और नरम भोजन: दही, खीर, आइसक्रीम, केला, मसला हुआ आलू और पतली खिचड़ी जैसी चीज़ें आसान रहती हैं।
  3. मसालेदार, खट्टी और गरम चीज़ों से परहेज: संतरे का रस, नींबू-पानी, चिप्स और नमकीन छालों में जलन बढ़ा सकते हैं।
  4. बुखार और दर्द की दवा: डॉक्टर की सलाह से पैरासिटामोल (Paracetamol) दी जा सकती है। बच्चों को खुराक उनके वज़न और उत्पाद के लेबल या डॉक्टर के निर्देश के अनुसार ही दें। बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के एस्पिरिन कभी न दें।
  5. मुँह की सफाई: हल्के गुनगुने पानी से कुल्ला कराएँ (बड़े बच्चों और वयस्कों में)। डॉक्टर कभी-कभी छालों के लिए दर्द निवारक जेल या माउथ रिन्स सुझा सकते हैं।
  6. दानों की देखभाल: फफोलों को फोड़ें नहीं। इन्हें साफ और सूखा रखें। खुजली हो तो डॉक्टर की सलाह से कैलामाइन जैसे लोशन लगाए जा सकते हैं।
  7. आराम: बच्चे को भरपूर आराम करने दें।

डॉक्टर के पास कब जाएँ?

निम्न स्थितियों में तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें:

  • बच्चा बिल्कुल पानी नहीं पी रहा हो या निर्जलीकरण के लक्षण हों (सूखे होंठ, बिना आँसू के रोना, कम पेशाब, सुस्ती)
  • तीन दिन से अधिक तेज़ बुखार रहे
  • बुखार बहुत तेज़ हो या दौरे (झटके) पड़ें
  • गर्दन में अकड़न, तेज़ सिरदर्द या अत्यधिक उनींदापन हो
  • साँस लेने में कठिनाई हो
  • सात से दस दिन बाद भी लक्षण न सुधरें या बिगड़ते जाएँ
  • तीन महीने से छोटे शिशु में कोई भी लक्षण दिखे
  • कमज़ोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्ति में संक्रमण हो

संभावित जटिलताएँ

HFMD की गंभीर जटिलताएँ बहुत कम होती हैं, पर संभव हैं:

  • निर्जलीकरण: सबसे आम जटिलता।
  • नाखूनों का झड़ना: संक्रमण के कुछ सप्ताह बाद कुछ बच्चों के हाथ-पैर के नाखून अस्थायी रूप से निकल सकते हैं। नए नाखून समय के साथ अपने आप आ जाते हैं।
  • दिमागी संक्रमण: बहुत दुर्लभ मामलों में, विशेषकर EV-71 वायरस से, मेनिन्जाइटिस या एन्सेफेलाइटिस जैसी गंभीर समस्या हो सकती है।
  • मायोकार्डाइटिस और फेफड़ों की समस्या: अत्यंत दुर्लभ।

बचाव के उपाय

फिलहाल भारत में HFMD के लिए कोई आम टीका उपलब्ध नहीं है। कुछ देशों में EV-71 के विरुद्ध टीके लगाए जाते हैं, लेकिन ये व्यापक रूप से सभी जगह उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए स्वच्छता ही सबसे बड़ा हथियार है।

व्यक्तिगत स्वच्छता

  • साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोएँ, खासकर खाने से पहले, शौचालय के बाद और डायपर बदलने के बाद।
  • बच्चों को हाथ धोने की आदत सिखाएँ।
  • बिना धुले हाथों से मुँह, आँख और नाक न छुएँ।
  • खाँसते या छींकते समय रूमाल या कोहनी से मुँह ढकें।

घर और आसपास की सफाई

  • खिलौनों, दरवाज़े के हैंडल, मेज़ और अन्य बार-बार छुई जाने वाली सतहों को नियमित रूप से कीटाणुनाशक से साफ करें।
  • बर्तन, गिलास, तौलिये और कपड़े संक्रमित व्यक्ति के साथ साझा न करें।
  • इस्तेमाल किए गए डायपर को सावधानी से निपटाएँ।

संक्रमित बच्चे को अलग रखना

  • बीमार बच्चे को तब तक स्कूल या डे-केयर न भेजें जब तक बुखार उतर न जाए और छाले ठीक न होने लगें। आमतौर पर सात से दस दिन का आराम सुझाया जाता है, लेकिन स्कूल या डॉक्टर के निर्देश मानें।
  • बच्चे को भीड़-भाड़ वाली जगहों और अन्य बच्चों से दूर रखें।
  • चुंबन लेने और गले लगाने जैसे निकट संपर्क से बचें।

गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए सावधानी

अधिकतर गर्भवती महिलाओं में HFMD से गंभीर समस्या नहीं होती, पर यदि प्रसव के आसपास संक्रमण हो जाए तो नवजात शिशु को वायरस पहुँचने का जोखिम रहता है। ऐसी स्थिति में तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें।

आम भ्रांतियाँ

भ्रांति 1: यह बीमारी पशुओं से फैलती है।
सच: नहीं, इसका पशुओं की खुरपका-मुँहपका बीमारी से कोई संबंध नहीं है।

भ्रांति 2: यह केवल बच्चों को होती है।
सच: बच्चों में ज़्यादा आम है, पर वयस्क भी संक्रमित हो सकते हैं।

भ्रांति 3: एक बार हो जाने पर दोबारा नहीं होती।
सच: अलग-अलग वायरस के कारण यह बीमारी एक से अधिक बार हो सकती है, हालाँकि बाद में लक्षण अक्सर हल्के होते हैं।

भ्रांति 4: एंटीबायोटिक से यह ठीक हो जाती है।
सच: यह वायरल बीमारी है, इसलिए एंटीबायोटिक असर नहीं करती। इन्हें केवल तब दिया जाता है जब डॉक्टर को किसी अतिरिक्त जीवाणु संक्रमण का संदेह हो।

माता-पिता के लिए व्यावहारिक सुझाव

  • घबराएँ नहीं। अधिकांश मामलों में बच्चा जल्दी ठीक हो जाता है।
  • बच्चे की तरल पदार्थ की मात्रा पर लगातार नज़र रखें।
  • बच्चे के नाखून छोटे रखें ताकि वह दानों को खरोंच न सके।
  • घर के अन्य सदस्यों को भी स्वच्छता का पालन करने को कहें।
  • अपने बच्चे के स्कूल को बीमारी के बारे में सूचित करें ताकि प्रकोप रोका जा सके।

निष्कर्ष

हैंड, फुट एंड माउथ डिजीज एक आम, संक्रामक पर प्रायः हल्की बीमारी है। मुँह के छाले, हथेलियों-तलवों पर दाने और बुखार इसके प्रमुख लक्षण हैं। इसका कोई विशिष्ट इलाज नहीं है, पर पर्याप्त तरल पदार्थ, आराम और लक्षणों की देखभाल से बच्चे जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं। सबसे अहम बात है निर्जलीकरण से बचाव और खतरे के संकेतों पर नज़र रखना।

नियमित हाथ धोना, साफ-सफाई और बीमार बच्चे को घर पर रखना इस बीमारी के प्रसार को रोकने के सबसे प्रभावी उपाय हैं। यदि आपको कोई भी चिंताजनक लक्षण दिखे, तो बिना देर किए चिकित्सक से सलाह लें।

नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी बीमारी की स्थिति में योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

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