अकिलीज़ टेंडिनाइटिस (Achilles Tendinitis - एड़ी की नस की सूजन)
| |

अकिलीज़ टेंडिनाइटिस (एड़ी की नस की सूजन): कारण, लक्षण, इलाज और बचाव

परिचय

क्या आपको सुबह उठते ही एड़ी के ऊपर, पिंडली के निचले हिस्से में दर्द या अकड़न महसूस होती है? क्या दौड़ने, सीढ़ियाँ चढ़ने या पंजों के बल खड़े होने पर वह दर्द बढ़ जाता है? अगर हाँ, तो यह अकिलीज़ टेंडिनाइटिस का संकेत हो सकता है। यह खिलाड़ियों, धावकों और सैर करने वालों में बहुत आम है। लेकिन ऑफिस में काम करने वाले लोग और बढ़ती उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ जाते हैं।

अच्छी बात यह है कि समय पर पहचान और सही देखभाल से ज़्यादातर मामले बिना ऑपरेशन के ठीक हो जाते हैं।

अकिलीज़ टेंडन क्या है?

अकिलीज़ टेंडन शरीर का सबसे मोटा और मज़बूत टेंडन (कण्डरा) है। यह पिंडली की दो प्रमुख मांसपेशियों (गैस्ट्रोक्नेमियस और सोलियस) को एड़ी की हड्डी (कैल्केनियस) से जोड़ता है। जब आप चलते हैं, दौड़ते हैं, कूदते हैं या पंजों के बल खड़े होते हैं, तो यही टेंडन पैर को आगे धकेलने की ताकत देता है।

इतना मज़बूत होने के बावजूद इस पर रोज़ बहुत ज़्यादा दबाव पड़ता है। इसलिए इसमें चोट और सूजन की संभावना बनी रहती है।

अकिलीज़ टेंडिनाइटिस क्या है?

जब इस टेंडन पर बार-बार या ज़रूरत से ज़्यादा तनाव पड़ता है, तो उसमें सूक्ष्म चोटें लगने लगती हैं और जलन व सूजन आ जाती है। इसी स्थिति को अकिलीज़ टेंडिनाइटिस कहते हैं। इसके दो मुख्य प्रकार हैं:

1. नॉन-इन्सर्शनल टेंडिनाइटिस: इसमें टेंडन के बीच के हिस्से के रेशे टूटने और मोटे होने लगते हैं। यह आमतौर पर युवा और सक्रिय लोगों में दिखता है।

2. इन्सर्शनल टेंडिनाइटिस: इसमें टेंडन के उस निचले हिस्से पर असर पड़ता है जहाँ वह एड़ी की हड्डी से जुड़ता है। यह किसी भी उम्र के लोगों में हो सकता है, चाहे वे सक्रिय हों या नहीं।

कई विशेषज्ञ लंबे समय तक चलने वाली समस्या को “टेंडिनोपैथी” भी कहते हैं, क्योंकि उसमें सूजन से ज़्यादा टेंडन की बनावट में बदलाव होता है।

प्रमुख कारण

अकिलीज़ टेंडिनाइटिस आमतौर पर किसी एक कारण से नहीं, बल्कि कई कारणों के मेल से होता है।

अचानक गतिविधि बढ़ाना: लंबे समय तक आराम के बाद अचानक ज़्यादा दौड़ना, तेज़ चलना या खेलना शुरू कर देना सबसे आम कारण है।

पिंडली की मांसपेशियों में कसाव: कसी हुई पिंडली टेंडन पर अतिरिक्त खिंचाव डालती है।

गलत जूते: घिसे हुए, बहुत सख़्त या बिना सहारे वाले जूते, या लंबे समय तक ऊँची एड़ी की चप्पलें पहनना।

कठोर सतह पर व्यायाम: कंक्रीट या ऊबड़-खाबड़ ज़मीन पर दौड़ने से टेंडन पर दबाव बढ़ता है।

पैर की बनावट: चपटे तलवे (फ्लैट फुट) वालों में टेंडन पर तनाव ज़्यादा पड़ सकता है।

बढ़ती उम्र: उम्र के साथ टेंडन की लचक घटती है और चोट की संभावना बढ़ती है।

कुछ दवाएँ और स्वास्थ्य स्थितियाँ: फ्लोरोक्विनोलोन वर्ग की कुछ एंटीबायोटिक दवाएँ टेंडन की समस्या का जोखिम बढ़ा सकती हैं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापा भी जोखिम बढ़ाते हैं। अगर आपको कोई दवा लेने के बाद एड़ी में दर्द शुरू हो, तो अपने डॉक्टर को ज़रूर बताएँ।

पुरुषों में अधिक आम: यह समस्या महिलाओं की तुलना में पुरुषों में ज़्यादा देखी जाती है।

लक्षण

अकिलीज़ टेंडिनाइटिस के लक्षण आमतौर पर धीरे-धीरे शुरू होते हैं:

  • एड़ी के ऊपर या पिंडली के निचले हिस्से में दर्द और अकड़न, खासकर सुबह के समय
  • दौड़ने, चलने या सीढ़ियाँ चढ़ने के बाद दर्द का बढ़ना
  • टेंडन को दबाने पर दर्द और कोमलता
  • टेंडन के आसपास हल्की सूजन या गर्माहट
  • टेंडन के हिस्से में मोटापन या गाँठ जैसा महसूस होना
  • पंजों के बल खड़े होने में कमज़ोरी या कठिनाई
  • हिलने-डुलने पर चरमराहट जैसी अनुभूति

शुरुआत में दर्द हल्का होता है और गतिविधि के बाद ही महसूस होता है। अनदेखी करने पर यह रोज़मर्रा के काम में भी बाधा बनने लगता है।

डॉक्टर के पास कब जाएँ?

इन स्थितियों में देर न करें और डॉक्टर से मिलें:

  • कुछ दिनों के घरेलू उपाय के बाद भी दर्द कम न हो
  • दर्द तेज़ हो या चलना मुश्किल हो जाए
  • एड़ी के पास अचानक “पॉप” जैसी आवाज़ के साथ तेज़ दर्द हो। यह टेंडन फटने (रप्चर) का संकेत हो सकता है, जिसमें तुरंत इलाज ज़रूरी है
  • पंजों के बल खड़े न हो पाएँ या पैर नीचे की ओर न दबा पाएँ
  • सूजन तेज़ी से बढ़े, लालिमा हो या बुखार आए

निदान कैसे होता है?

डॉक्टर सबसे पहले आपकी गतिविधियों, जूतों, पुरानी चोटों और दवाओं के बारे में पूछते हैं। फिर वे शारीरिक जाँच करते हैं, जिसमें टेंडन को दबाकर दर्द की जगह, सूजन और पैर की गति व ताकत देखी जाती है।

ज़रूरत पड़ने पर ये जाँचें कराई जा सकती हैं:

  • अल्ट्रासाउंड: टेंडन की बनावट और सूजन देखने के लिए
  • एमआरआई: टेंडन में गहरी क्षति या आंशिक फटन का पता लगाने के लिए
  • एक्स-रे: हड्डी में उभार (बोन स्पर) या कैल्सिफिकेशन देखने के लिए

इलाज

घर पर देखभाल (शुरुआती चरण)

अधिकांश मामलों में शुरुआती उपाय ही काफ़ी राहत देते हैं:

आराम: जिन गतिविधियों से दर्द बढ़ता है, उन्हें कुछ समय कम करें या रोकें। पूरी तरह बिस्तर पर रहना ज़रूरी नहीं, बल्कि कम दबाव वाली गतिविधियाँ जैसे तैराकी या साइकिल चलाना जारी रखी जा सकती हैं।

बर्फ से सेंक: दिन में 2-3 बार, 10-15 मिनट तक कपड़े में लपेटकर बर्फ लगाएँ। बर्फ सीधे त्वचा पर न रखें।

एड़ी को ऊँचा रखना: हील लिफ्ट या एड़ी के नीचे की गद्दी टेंडन का तनाव कुछ कम करती है।

सहारे वाले जूते: अच्छी कुशनिंग और एड़ी के सहारे वाले जूते पहनें।

दर्द निवारक दवाएँ: पैरासिटामोल या आइबुप्रोफेन जैसी दवाएँ थोड़े समय की राहत दे सकती हैं, लेकिन इन्हें डॉक्टर या फार्मासिस्ट की सलाह से ही लें, खासकर अगर आपको पेट, किडनी या दिल की कोई समस्या हो।

फिजियोथेरेपी और व्यायाम

लंबे समय के इलाज में सबसे असरदार तरीका नियंत्रित व्यायाम है। इनमें एक्सेन्ट्रिक हील ड्रॉप खास तौर पर कारगर माना जाता है।

इसे करने का आसान तरीका: किसी सीढ़ी के किनारे पंजों के बल खड़े हों और एड़ियाँ हवा में रखें। दोनों पैरों से ऊपर उठें, फिर प्रभावित पैर पर वज़न डालकर धीरे-धीरे एड़ी को सीढ़ी के स्तर से नीचे ले जाएँ। इसे सामान्यतः कई हफ़्तों तक नियमित किया जाता है। शुरुआत में हल्का दर्द हो सकता है, पर तेज़ दर्द हो तो रुककर फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लें।

इसके अलावा पिंडली की स्ट्रेचिंग (दीवार के सहारे पिंडली खींचना) भी बहुत फ़ायदेमंद है।

चिकित्सकीय उपाय

अगर 6 से 12 हफ़्ते के बाद भी आराम न मिले, तो डॉक्टर ये विकल्प सुझा सकते हैं:

  • ऑर्थोटिक्स (विशेष इनसोल) या हील लिफ्ट
  • शॉकवेव थेरेपी
  • कुछ मामलों में कुछ समय के लिए वॉकिंग बूट
  • PRP जैसे इंजेक्शन (इनकी उपयोगिता पर शोध अभी जारी है)

टेंडन के आसपास स्टेरॉइड इंजेक्शन आमतौर पर टालने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे टेंडन के कमज़ोर होने और फटने का जोखिम बढ़ सकता है।

सर्जरी

बहुत कम मामलों में, जब महीनों के इलाज के बाद भी राहत न मिले या टेंडन गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त या फट जाए, तब ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ती है। इसमें क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाया या मरम्मत किया जाता है।

ठीक होने में कितना समय लगता है?

यह समस्या की गंभीरता और इलाज की नियमितता पर निर्भर करता है। हल्के मामलों में कुछ हफ़्तों में आराम मिल सकता है, जबकि पुराने मामलों में कई महीने लग सकते हैं। धैर्य रखना ज़रूरी है। जल्दबाज़ी में दोबारा भारी गतिविधि शुरू करने से दर्द वापस लौट सकता है।

बचाव के उपाय

कुछ आदतें अपनाकर इस समस्या से काफ़ी हद तक बचा जा सकता है:

  1. गतिविधि धीरे-धीरे बढ़ाएँ। दौड़ की दूरी या तीव्रता एक साथ बहुत न बढ़ाएँ।
  2. वार्म-अप और स्ट्रेचिंग करें। व्यायाम से पहले और बाद में पिंडली को खींचें।
  3. सही जूते चुनें। समय-समय पर पुराने जूते बदलें।
  4. सतह बदलते रहें। हर बार सख़्त ज़मीन पर दौड़ने से बचें।
  5. पिंडली की मांसपेशियाँ मज़बूत करें। इससे टेंडन पर दबाव बँटता है।
  6. वज़न नियंत्रित रखें। अधिक वज़न से टेंडन पर दबाव बढ़ता है।
  7. दर्द को नज़रअंदाज़ न करें। शुरुआती दर्द पर ही आराम दें और कारण सुधारें।
  8. ऊँची एड़ी की चप्पलें कम पहनें, और पहनें भी तो बीच-बीच में पिंडली को खींचते रहें।

निष्कर्ष

अकिलीज़ टेंडिनाइटिस एक आम लेकिन ठीक होने वाली समस्या है। मुख्य बात यह है कि शुरुआती दर्द को हल्के में न लें। आराम, सही जूते, बर्फ का सेंक और नियमित स्ट्रेचिंग व मज़बूती वाले व्यायाम अधिकांश लोगों को पूरी तरह स्वस्थ कर देते हैं। अगर दर्द बना रहे, बढ़ता जाए या अचानक तेज़ दर्द के साथ चलना मुश्किल हो जाए, तो बिना देर किए किसी हड्डी रोग विशेषज्ञ (ऑर्थोपेडिक) या स्पोर्ट्स मेडिसिन डॉक्टर से मिलें।

नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और डॉक्टरी सलाह का विकल्प नहीं है। इलाज शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *