बेसल सेल पेपिलोमा (सेबोरेहिक केराटोसिस): कारण, लक्षण और इलाज
परिचय
बेसल सेल पेपिलोमा त्वचा पर होने वाली एक आम, सौम्य (नॉन-कैंसरस) वृद्धि है। चिकित्सा जगत में इसे सेबोरेहिक केराटोसिस (Seborrheic Keratosis) कहा जाता है। इसके अन्य नाम सेबोरेहिक वार्ट, सेनाइल वार्ट और बेसल सेल पेपिलोमा हैं। आम बोलचाल में लोग इसे “उम्र के मस्से” या “बुढ़ापे के धब्बे” भी कह देते हैं, हालांकि यह असली मस्सा नहीं है।
यह त्वचा की ऊपरी परत (एपिडर्मिस) की कोशिकाओं के धीरे-धीरे बढ़ने से बनता है। ये उभार अक्सर देखने में डरावने लगते हैं, खासकर जब वे गहरे भूरे या काले रंग के हों, इसलिए कई लोग इन्हें त्वचा कैंसर या मेलेनोमा समझकर घबरा जाते हैं। सच यह है कि यह लगभग हमेशा हानिरहित होता है और न तो फैलता है, न ही कैंसर में बदलता है। फिर भी इसकी पहचान और सही निदान ज़रूरी है।
यह क्या है?
हमारी त्वचा की सबसे ऊपरी परत में बेसल कोशिकाएँ (Basal Cells) होती हैं, जो लगातार नई त्वचा कोशिकाएँ बनाती रहती हैं। जब इन कोशिकाओं की वृद्धि असामान्य रूप से बढ़ जाती है, तो त्वचा पर एक उभरा हुआ, खुरदरा या मोम जैसा धब्बा बन जाता है। यही बेसल सेल पेपिलोमा है।
एक ज़रूरी बात: बेसल सेल पेपिलोमा और बेसल सेल कार्सिनोमा अलग-अलग चीज़ें हैं। बेसल सेल कार्सिनोमा त्वचा कैंसर का एक प्रकार है, जबकि बेसल सेल पेपिलोमा पूरी तरह सौम्य है। नाम में समानता के कारण अक्सर भ्रम होता है।
किसे होता है?
- उम्र: यह 40 वर्ष की उम्र के बाद अधिक दिखाई देता है। उम्र बढ़ने के साथ इनकी संख्या भी बढ़ती जाती है। 60-70 वर्ष की उम्र तक अधिकांश लोगों में कम से कम एक ऐसा घाव मिल जाता है।
- आनुवंशिकता: यह परिवारों में चलता है। यदि माता-पिता को ये अधिक संख्या में हुए हैं, तो संतान में भी होने की संभावना बढ़ जाती है।
- लिंग: पुरुषों और महिलाओं, दोनों में समान रूप से पाया जाता है।
- त्वचा का रंग: यह सभी प्रकार की त्वचा में हो सकता है। गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों में इसका एक छोटा रूप, डर्मेटोसिस पैपुलोसा नाइग्रा, चेहरे पर छोटे-छोटे काले दानों के रूप में दिखता है।
कारण
इसका सटीक कारण अभी पूरी तरह ज्ञात नहीं है, लेकिन कुछ कारक इससे जुड़े माने जाते हैं:
- बढ़ती उम्र: सबसे प्रमुख कारण। त्वचा की कोशिकाओं के नवीनीकरण में बदलाव आता है।
- आनुवंशिक कारण: कुछ मामलों में FGFR3 और PIK3CA जीन में उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) पाए गए हैं।
- सूर्य की रोशनी: धूप के संपर्क वाले हिस्सों में ये अधिक दिखते हैं, पर यह स्पष्ट नहीं कि धूप सीधा कारण है। ये ढके हुए हिस्सों में भी निकलते हैं।
- त्वचा में घर्षण या सूजन: कुछ लोगों में कपड़ों की रगड़ वाली जगह पर इनका बनना देखा गया है।
- हार्मोनल बदलाव: गर्भावस्था या एस्ट्रोजन थेरेपी के दौरान कभी-कभी इनकी संख्या बढ़ सकती है।
ध्यान दें: यह संक्रामक नहीं है। यह किसी को छूने या साथ रहने से नहीं फैलता, और यह किसी वायरस (जैसे HPV) के कारण नहीं होता।
लक्षण और पहचान
बेसल सेल पेपिलोमा की कुछ विशिष्ट पहचानें हैं:
- दिखावट: त्वचा पर चिपकाया हुआ-सा लगने वाला उभार, मानो किसी ने मोम या आटे की छोटी गोली त्वचा पर चिपका दी हो।
- रंग: हल्का भूरा, गहरा भूरा, काला, पीला या त्वचा के रंग जैसा। एक ही व्यक्ति में अलग-अलग रंग के घाव हो सकते हैं।
- बनावट: शुरुआत में चिकना और सपाट, बाद में खुरदरा, मस्से जैसा या परतदार हो जाता है। कुछ पर चिकनाई जैसी परत दिखती है।
- आकार: कुछ मिलीमीटर से लेकर 2.5 सेंटीमीटर या उससे बड़ा।
- संख्या: अकेला या कई एक साथ, कभी-कभी दर्जनों।
- स्थान: पीठ, छाती, कंधे, चेहरा, गर्दन और सिर की त्वचा पर सबसे आम। हथेलियों और तलवों पर आमतौर पर नहीं होता।
- खुजली: कई बार हल्की खुजली होती है, खासकर तब जब कपड़े से रगड़ खाए।
- दर्द: सामान्यतः दर्द नहीं होता। चोट लगने या खुरचने पर खून आ सकता है।
लेज़र-ट्रेलैट संकेत (Leser-Trélat Sign)
यदि अचानक कम समय में बहुत सारे सेबोरेहिक केराटोसिस निकलने लगें, तो इसे लेज़र-ट्रेलैट संकेत कहा जाता है। यह दुर्लभ है, पर कभी-कभी शरीर के भीतर किसी कैंसर (विशेषकर पेट या आँतों के) से जुड़ा हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।
निदान कैसे होता है?
- शारीरिक जाँच: अधिकांश मामलों में त्वचा रोग विशेषज्ञ (डर्मेटोलॉजिस्ट) केवल देखकर पहचान लेते हैं।
- डर्मोस्कोपी: एक विशेष आवर्धक यंत्र से घाव की बारीक बनावट देखी जाती है। इसमें विशिष्ट पैटर्न जैसे सतह पर छोटे सिस्ट जैसे ढांचे और दरारें दिखती हैं।
- बायोप्सी: यदि घाव का रूप असामान्य हो, तेज़ी से बदल रहा हो, बार-बार खून बहता हो या मेलेनोमा/त्वचा कैंसर का संदेह हो, तो थोड़ा-सा टुकड़ा लेकर माइक्रोस्कोप से जाँचा जाता है।
किन बीमारियों से अलग पहचानना ज़रूरी है?
- मेलेनोमा: अनियमित किनारे, एक ही घाव में कई रंग और तेज़ी से बढ़ना।
- बेसल सेल कार्सिनोमा: मोती जैसा चमकदार उभार जो ठीक न होने वाला घाव बन जाए।
- एक्टिनिक केराटोसिस: धूप से होने वाला खुरदरा, पपड़ीदार धब्बा, जो कैंसर-पूर्व अवस्था हो सकती है।
- साधारण मस्सा (वार्ट): HPV वायरस से होता है।
इलाज की आवश्यकता
सेबोरेहिक केराटोसिस सौम्य है, इसलिए इलाज ज़रूरी नहीं है। अधिकांश लोग इसे कॉस्मेटिक कारणों से हटवाते हैं। इलाज की सलाह तब दी जाती है जब:
- घाव कपड़े, गहने या बेल्ट से बार-बार रगड़ खाकर चिढ़ता या खून बहता हो।
- खुजली या असुविधा हो।
- चेहरे जैसी दिखने वाली जगह पर होने से सौंदर्य संबंधी चिंता हो।
- निदान को लेकर संदेह हो।
इलाज के विकल्प
1. क्रायोथेरेपी (Cryotherapy): तरल नाइट्रोजन से घाव को जमाकर हटाया जाता है। यह सबसे आम और तेज़ तरीका है। इसके बाद कुछ दिनों में पपड़ी बनकर गिर जाती है। कभी-कभी उस जगह रंग हल्का या गहरा रह सकता है।
2. क्यूरेटेज (Curettage): स्थानीय सुन्न करने के बाद एक छोटे औज़ार से घाव को खुरचकर निकाला जाता है। अक्सर इसे इलेक्ट्रोडेसिकेशन के साथ किया जाता है।
3. इलेक्ट्रोसर्जरी / इलेक्ट्रोकॉटरी: विद्युत धारा से घाव को जलाकर हटाया जाता है।
4. लेज़र थेरेपी: एर्बियम-याग या CO₂ लेज़र से परत-दर-परत घाव हटाया जाता है। यह अधिक सटीक है, पर महंगा हो सकता है।
5. शेव एक्सीज़न: घाव को त्वचा की सतह तक शेव करके निकाला जाता है और नमूना जाँच के लिए भेजा जा सकता है।
6. टॉपिकल दवाएँ: कुछ क्रीम और घोल (जैसे हाइड्रोजन पेरोक्साइड का 40% घोल) उपलब्ध हैं, जो डॉक्टर की देखरेख में उपयोग होते हैं। कई मामलों में इनका असर सीमित रहता है।
महत्वपूर्ण: इसे घर पर खुद काटने, खींचने, जलाने या तेज़ाब जैसे रसायन लगाने की कोशिश न करें। इससे संक्रमण, गहरे निशान और अपूर्ण निदान का खतरा रहता है।
क्या हटाने के बाद दोबारा होता है?
जिस जगह से घाव पूरी तरह हटा दिया गया, वहाँ आमतौर पर वह दोबारा नहीं निकलता। लेकिन चूँकि यह प्रवृत्ति शरीर में बनी रहती है, इसलिए नई जगहों पर नए घाव निकल सकते हैं। यह उपचार की विफलता नहीं, बल्कि इस स्थिति का स्वभाव है।
घरेलू देखभाल और सावधानियाँ
- घाव को बार-बार छूने, खुरचने या नोचने से बचें।
- यदि कपड़े से रगड़ होती है तो ढीले, मुलायम कपड़े पहनें।
- इलाज के बाद त्वचा पर डॉक्टर द्वारा बताई गई एंटीबायोटिक क्रीम या मरहम लगाएँ और जगह को साफ़-सूखा रखें।
- उपचार के बाद उस जगह को धूप से बचाएँ और सनस्क्रीन (SPF 30 या अधिक) लगाएँ ताकि दाग न बने।
- अपनी त्वचा की नियमित जाँच करें और किसी भी नए या बदलते घाव पर ध्यान दें।
डॉक्टर से कब मिलें?
निम्न स्थितियों में बिना देर किए त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें:
- घाव का आकार, रंग या आकृति तेज़ी से बदल रही हो।
- घाव में बार-बार खून आए या वह ठीक न होने वाला घाव बन जाए।
- घाव के किनारे अनियमित हों या उसमें एक साथ कई रंग हों।
- अचानक बहुत सारे नए घाव उभर आएँ।
- घाव में दर्द, जलन या लगातार खुजली हो।
- आपको निश्चित नहीं कि यह सौम्य है या नहीं।
भ्रांतियाँ और तथ्य
भ्रांति 1: यह कैंसर में बदल सकता है।
तथ्य: सेबोरेहिक केराटोसिस कैंसर-पूर्व अवस्था नहीं है और सामान्यतः कैंसर में नहीं बदलता।
भ्रांति 2: यह छूने से दूसरों को फैलता है।
तथ्य: यह संक्रामक नहीं है।
भ्रांति 3: यह गंदगी या खराब सफ़ाई के कारण होता है।
तथ्य: इसका संबंध स्वच्छता से नहीं, बल्कि उम्र और आनुवंशिकता से है।
भ्रांति 4: इसे हटाने से यह और फैल जाता है।
तथ्य: हटाने से यह फैलता नहीं। नए घाव अपनी प्रवृत्ति के कारण निकलते हैं।
निष्कर्ष
बेसल सेल पेपिलोमा, यानी सेबोरेहिक केराटोसिस, उम्र के साथ होने वाली एक आम और हानिरहित त्वचा समस्या है। इसका स्वरूप भले ही चिंताजनक लगे, पर यह आमतौर पर स्वास्थ्य के लिए खतरा नहीं है। मुख्य बात यह है कि इसे सही तरह से पहचाना जाए और मेलेनोमा जैसी गंभीर बीमारियों से अलग किया जाए। यदि घाव असुविधा दे रहा हो या सुंदरता को प्रभावित कर रहा हो, तो क्रायोथेरेपी, क्यूरेटेज या लेज़र जैसे सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं। सबसे अहम सलाह यह है कि खुद इलाज करने के बजाय योग्य त्वचा रोग विशेषज्ञ से जाँच कराएँ, और त्वचा में किसी भी असामान्य बदलाव को नज़रअंदाज़ न करें।
