स्क्लेराइटिस (Scleritis - आंख की सफेदी में गंभीर सूजन)
|

स्क्लेराइटिस (Scleritis): आंख की सफेदी में गंभीर सूजन

परिचय

हमारी आंख का सफेद भाग, जिसे चिकित्सा भाषा में श्वेतपटल (Sclera) कहते हैं, आंख की सबसे बाहरी मज़बूत परत है। यह कोलेजन फाइबर से बनी होती है और आंख को आकार, मज़बूती और सुरक्षा देती है। जब इसी परत में गहरी और दर्दनाक सूजन हो जाती है, तो उस स्थिति को स्क्लेराइटिस कहा जाता है।

स्क्लेराइटिस एक गंभीर नेत्र रोग है। इसे अक्सर साधारण “आंख लाल होने” या कंजंक्टिवाइटिस (आंख आना) समझ लिया जाता है, जबकि यह उससे कहीं ज़्यादा खतरनाक है। समय पर इलाज न मिले तो इससे स्थायी रूप से दृष्टि कम हो सकती है, यहां तक कि आंख की संरचना को भी नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए इसके लक्षणों, कारणों और उपचार की जानकारी हर किसी के लिए उपयोगी है।

स्क्लेराइटिस क्या है?

स्क्लेराइटिस श्वेतपटल की एक सूजन संबंधी बीमारी है, जिसमें आंख की सफेद परत और उसके नीचे की रक्त वाहिकाएं सूज जाती हैं। यह सूजन आमतौर पर शरीर की अपनी रोग प्रतिरोधक प्रणाली की गड़बड़ी (ऑटोइम्यून प्रक्रिया) के कारण होती है। यह एक आंख में भी हो सकती है और दोनों आंखों में भी।

यह रोग अक्सर 30 से 60 वर्ष की उम्र के बीच देखा जाता है और पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कुछ अधिक पाया जाता है। बच्चों में यह अपेक्षाकृत कम होता है।

स्क्लेराइटिस और एपिस्क्लेराइटिस में अंतर

अक्सर लोग स्क्लेराइटिस को एपिस्क्लेराइटिस (Episcleritis) के साथ भ्रमित कर देते हैं। एपिस्क्लेराइटिस में श्वेतपटल के ऊपर की पतली परत में सूजन होती है। यह हल्की स्थिति है, इसमें दर्द कम होता है और अक्सर कुछ दिनों या हफ्तों में अपने आप ठीक हो जाती है। इसके विपरीत, स्क्लेराइटिस में दर्द तीव्र होता है, सूजन गहरी होती है और इसमें दृष्टि को खतरा रहता है। इसलिए दोनों में फर्क पहचानना और विशेषज्ञ से जांच कराना बहुत ज़रूरी है।

स्क्लेराइटिस के प्रकार

स्क्लेराइटिस को मुख्य रूप से सूजन के स्थान और गंभीरता के आधार पर बांटा जाता है:

1. अग्र स्क्लेराइटिस (Anterior Scleritis): यह सबसे आम प्रकार है और आंख के सामने वाले हिस्से को प्रभावित करता है। इसके भी कई उपप्रकार हैं:

  • डिफ्यूज़ (फैला हुआ): पूरे या बड़े हिस्से में सूजन फैली होती है। यह सबसे हल्का और सामान्य रूप है।
  • नोड्यूलर (गांठदार): श्वेतपटल पर उभरी हुई, कठोर और दर्दनाक गांठें बन जाती हैं।
  • नेक्रोटाइज़िंग (ऊतक गलन वाला): यह सबसे गंभीर रूप है, जिसमें श्वेतपटल के ऊतक नष्ट होने लगते हैं और आंख की दीवार पतली हो जाती है। इसमें दृष्टि जाने का खतरा सबसे अधिक होता है।

2. पश्च स्क्लेराइटिस (Posterior Scleritis): इसमें आंख के पिछले हिस्से में सूजन होती है। इसमें बाहर से लालिमा कम दिख सकती है, इसलिए इसका पता लगाना कठिन होता है। इसकी जांच अल्ट्रासाउंड या अन्य विशेष परीक्षणों से होती है।

स्क्लेराइटिस के कारण

स्क्लेराइटिस के लगभग आधे मामलों में किसी न किसी प्रणालीगत (पूरे शरीर से जुड़ी) बीमारी का संबंध पाया जाता है। प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:

ऑटोइम्यून रोग:

  • रुमेटॉइड आर्थराइटिस (गठिया)
  • ल्यूपस (SLE)
  • एंकायलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस
  • ग्रैनुलोमैटोसिस विद पॉलीएंजाइटिस (वेगनर्स ग्रैनुलोमैटोसिस)
  • इन्फ्लेमेटरी बाउल डिज़ीज़ (क्रोहन रोग, अल्सरेटिव कोलाइटिस)
  • सोरायसिस संबंधी गठिया

संक्रमण:

  • हर्पीज़ ज़ोस्टर (दाद का वायरस)
  • सिफलिस
  • तपेदिक (टीबी)
  • कुछ बैक्टीरियल और फंगल संक्रमण

अन्य कारण:

  • आंख की चोट या सर्जरी (विशेषकर मोतियाबिंद या टेरिजियम की सर्जरी के बाद)
  • कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव
  • कई बार कोई स्पष्ट कारण नहीं मिलता, जिसे “इडियोपैथिक” स्क्लेराइटिस कहते हैं

लक्षण

स्क्लेराइटिस के लक्षण धीरे-धीरे या अचानक शुरू हो सकते हैं। मुख्य लक्षण हैं:

  • तीव्र और गहरा दर्द: यह इस बीमारी की सबसे खास पहचान है। दर्द अक्सर आंख की गहराई में महसूस होता है और माथे, भौंह, जबड़े या चेहरे तक फैल सकता है। यह रात में या सुबह के समय बढ़ सकता है और कई बार नींद तोड़ देता है।
  • आंख का लाल या बैंगनी-सा दिखना: आंख की सफेदी पर गहरी लालिमा दिखती है, जो प्राकृतिक रोशनी में कभी-कभी नीले-बैंगनी रंग की लगती है।
  • आंख में पानी आना और रोशनी से परेशानी (फोटोफोबिया)
  • धुंधला दिखाई देना या दृष्टि कम होना
  • आंख को छूने पर दर्द या कोमलता महसूस होना
  • पलकों या आसपास के हिस्से में सूजन
  • आंख हिलाने पर दर्द बढ़ना

साधारण आंख आने में आमतौर पर चिपचिपा स्राव और खुजली होती है, जबकि स्क्लेराइटिस में दर्द मुख्य लक्षण होता है और स्राव कम होता है।

कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएं?

यदि आपको इनमें से कोई भी स्थिति हो तो बिना देर किए नेत्र रोग विशेषज्ञ (ऑप्थल्मोलॉजिस्ट) से मिलें:

  • आंख में तेज़ दर्द के साथ लालिमा, जो कुछ दिनों में ठीक न हो
  • दृष्टि में अचानक कमी या धुंधलापन
  • आंख की सफेदी पर गांठ या पतला, नीला-सा धब्बा दिखना
  • आंख की चोट या सर्जरी के बाद दर्द और लालिमा
  • पहले से कोई ऑटोइम्यून रोग होने पर आंख में नए लक्षण

निदान (जांच)

स्क्लेराइटिस की पहचान के लिए डॉक्टर कई तरह की जांच करते हैं:

  1. स्लिट-लैंप परीक्षण: विशेष माइक्रोस्कोप से आंख की सतह और गहराई की बारीकी से जांच की जाती है। प्राकृतिक रोशनी में जांच भी महत्वपूर्ण होती है।
  2. फिनाइलएफ्रिन ड्रॉप टेस्ट: इस टेस्ट से स्क्लेराइटिस और एपिस्क्लेराइटिस में अंतर पहचाना जाता है।
  3. नेत्र अल्ट्रासाउंड (B-scan): पश्च स्क्लेराइटिस के निदान में उपयोगी है।
  4. OCT और एंजियोग्राफी: आंख की आंतरिक परतों और रक्त प्रवाह का आकलन करने के लिए।
  5. रक्त जांच: ESR, CRP, रुमेटॉइड फैक्टर, ANA, ANCA आदि से अंतर्निहित ऑटोइम्यून बीमारी का पता लगाया जाता है।
  6. अन्य परीक्षण: संक्रमण की आशंका हो तो टीबी, सिफलिस आदि की जांच, तथा ज़रूरत पड़ने पर छाती का एक्स-रे।

चूंकि यह रोग अक्सर शरीर की किसी अन्य बीमारी का संकेत होता है, इसलिए कई बार नेत्र रोग विशेषज्ञ के साथ रुमेटोलॉजिस्ट या फिज़िशियन की भी सलाह ली जाती है।

इलाज

स्क्लेराइटिस का उपचार इसके प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है। इलाज का मुख्य उद्देश्य सूजन को नियंत्रित करना, दर्द कम करना और दृष्टि बचाना है।

1. नॉन-स्टेरॉइडल एंटी-इन्फ्लेमेटरी दवाएं (NSAIDs): हल्के मामलों में इबुप्रोफेन, इंडोमेथेसिन जैसी दवाएं दी जाती हैं, जो सूजन और दर्द कम करती हैं।

2. कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स: यदि NSAIDs से आराम न मिले, तो प्रेडनिसोलोन जैसी स्टेरॉइड दवाएं मुंह से दी जाती हैं। गंभीर मामलों में नस के ज़रिए (IV) या आंख के आसपास इंजेक्शन भी दिए जा सकते हैं। ध्यान रहे, स्टेरॉइड की आंखों की बूंदें स्क्लेराइटिस में अकेले पर्याप्त नहीं होतीं।

3. इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं: गंभीर या बार-बार होने वाले मामलों में मेथोट्रेक्सेट, माइकोफिनोलेट, एज़ैथियोप्रिन, साइक्लोफॉस्फेमाइड जैसी दवाएं दी जाती हैं, जो प्रतिरोधक प्रणाली की अति-सक्रियता को कम करती हैं।

4. बायोलॉजिकल दवाएं: जिन मरीजों में अन्य दवाएं असर नहीं करतीं, उनमें रिटक्सिमैब या एडालिमुमैब जैसी दवाएं उपयोगी साबित हुई हैं।

5. संक्रमण का उपचार: यदि कारण कोई संक्रमण है, तो उसके अनुसार एंटीबायोटिक, एंटीवायरल या अन्य दवाएं दी जाती हैं।

6. सर्जरी: यदि श्वेतपटल बहुत पतला हो जाए या छेद होने का खतरा हो, तो उसे मज़बूत करने के लिए ग्राफ्ट सर्जरी करनी पड़ सकती है।

महत्वपूर्ण: इन दवाओं का सेवन केवल डॉक्टर की देखरेख में ही करें। स्वयं दवा लेना या अचानक दवा बंद कर देना खतरनाक हो सकता है।

संभावित जटिलताएं

समय पर और उचित इलाज न होने पर स्क्लेराइटिस से ये परेशानियां हो सकती हैं:

  • दृष्टि में स्थायी कमी
  • ग्लूकोमा (काला मोतिया): आंख के दबाव का बढ़ना
  • मोतियाबिंद
  • कॉर्निया में सूजन या अल्सर
  • यूवाइटिस: आंख की भीतरी परत में सूजन
  • रेटिना या ऑप्टिक नर्व को क्षति
  • श्वेतपटल का पतला होना या फटना (परफोरेशन)

विशेषकर नेक्रोटाइज़िंग स्क्लेराइटिस में खतरा सबसे ज़्यादा होता है, इसलिए इसमें तत्काल और आक्रामक उपचार की ज़रूरत होती है।

घर पर देखभाल और सावधानियां

डॉक्टर के इलाज के साथ कुछ बातों का ध्यान रखने से आराम मिल सकता है:

  • डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं और आंखों की बूंदें समय पर लें।
  • आंख को मलें या दबाएं नहीं।
  • तेज़ रोशनी से बचने के लिए धूप का चश्मा पहनें।
  • धूल, धुएं और प्रदूषण से आंखों को बचाएं।
  • ठंडी सिंकाई से कुछ लोगों को आराम मिलता है, लेकिन पहले डॉक्टर से पूछ लें।
  • कॉन्टैक्ट लेंस का उपयोग तब तक बंद रखें जब तक डॉक्टर अनुमति न दें।
  • नियमित फॉलो-अप जांच कराएं, क्योंकि यह रोग दोबारा लौट सकता है।
  • यदि आपको गठिया या कोई अन्य ऑटोइम्यून रोग है, तो उसका इलाज नियमित रूप से कराते रहें।

क्या स्क्लेराइटिस से बचाव संभव है?

चूंकि अधिकांश मामले ऑटोइम्यून कारणों से जुड़े होते हैं, इसलिए इसे पूरी तरह रोकना हमेशा संभव नहीं है। फिर भी कुछ कदम जोखिम कम करने में मदद कर सकते हैं:

  • पहले से मौजूद ऑटोइम्यून बीमारियों को नियंत्रण में रखें।
  • आंख की चोट से बचाव के लिए काम करते समय सुरक्षात्मक चश्मा पहनें।
  • आंख की किसी भी सर्जरी के बाद डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें।
  • आंख में लालिमा और दर्द को नज़रअंदाज़ न करें।
  • समय-समय पर नेत्र जांच कराएं।

रोग का पूर्वानुमान

उचित और समय पर इलाज से अधिकांश मरीजों में सूजन नियंत्रित हो जाती है और दृष्टि सुरक्षित रहती है। हालांकि यह रोग दीर्घकालिक हो सकता है और बार-बार उभर सकता है। इसलिए कई मरीजों को लंबे समय तक दवाएं और नियमित निगरानी की आवश्यकता पड़ती है। जिन मामलों में कोई प्रणालीगत रोग जुड़ा होता है, वहां उस रोग का नियंत्रण भी आंखों के स्वास्थ्य के लिए उतना ही ज़रूरी है।

निष्कर्ष

स्क्लेराइटिस आंख की सफेदी की एक गंभीर, दर्दनाक और संभावित रूप से दृष्टि के लिए खतरनाक बीमारी है। इसकी सबसे बड़ी पहचान आंख में गहरा दर्द और गहरी लालिमा है, जो साधारण आंख आने से अलग होती है। चूंकि यह अक्सर शरीर की किसी अन्य बीमारी का संकेत भी हो सकता है, इसलिए केवल आंखों का नहीं, बल्कि पूरे शरीर की जांच कराना ज़रूरी हो जाता है।

यदि आपकी आंख में लगातार दर्द, लालिमा या दृष्टि में बदलाव हो, तो घरेलू नुस्खों या बिना सलाह की दवाओं पर निर्भर न रहें। तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से मिलें। समय पर निदान और सही इलाज से इस बीमारी को काबू में रखा जा सकता है और आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखा जा सकता है।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *