गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD / एसिड रिफ्लक्स): कारण, लक्षण, इलाज और बचाव
गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज, जिसे सामान्य रूप से GERD (Gastroesophageal Reflux Disease) या एसिड रिफ्लक्स कहा जाता है, पाचन तंत्र से जुड़ी एक सामान्य समस्या है। इसमें पेट का अम्ल (एसिड) या पेट की अन्य सामग्री बार-बार ऊपर की ओर भोजन नली यानी इसोफेगस (Esophagus) में वापस आने लगती है। कभी-कभार एसिड रिफ्लक्स होना सामान्य हो सकता है, लेकिन जब यह बार-बार हो और इसके कारण परेशानी या इसोफेगस को नुकसान होने लगे, तो इसे GERD कहा जाता है।
GERD किसी भी उम्र में हो सकता है। इसमें सीने में जलन, मुंह में खट्टा स्वाद, भोजन या एसिड का गले तक वापस आना, पेट फूलना और निगलने में परेशानी जैसे लक्षण हो सकते हैं। जीवनशैली में बदलाव, खान-पान में सावधानी और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।
GERD क्या है?
हमारे शरीर में भोजन मुंह से होकर इसोफेगस के रास्ते पेट तक पहुंचता है। इसोफेगस और पेट के बीच एक मांसपेशीय वाल्व होता है, जिसे लोअर एसोफेजियल स्फिंक्टर (LES) कहा जाता है। सामान्य स्थिति में यह वाल्व भोजन को पेट में जाने देता है और फिर बंद होकर पेट की सामग्री को वापस ऊपर आने से रोकता है।
यदि LES कमजोर हो जाए या गलत समय पर ढीला हो जाए, तो पेट का एसिड और भोजन इसोफेगस में वापस आ सकता है। इस प्रक्रिया को एसिड रिफ्लक्स कहा जाता है। जब यह समस्या बार-बार होती है और लंबे समय तक बनी रहती है, तो GERD विकसित हो सकता है।
इसोफेगस में पेट की तुलना में एसिड से बचाव की क्षमता कम होती है। इसलिए बार-बार एसिड के संपर्क में आने से जलन और सूजन हो सकती है।
GERD के प्रमुख लक्षण
GERD के लक्षण व्यक्ति-दर-व्यक्ति अलग हो सकते हैं। इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:
1. सीने में जलन
इसे Heartburn कहा जाता है। इसमें सीने के बीच या ऊपरी हिस्से में जलन महसूस हो सकती है। यह अक्सर भोजन के बाद, झुकने या लेटने पर बढ़ सकती है।
2. मुंह में खट्टा या कड़वा स्वाद
पेट का एसिड या भोजन गले और मुंह तक वापस आने पर खट्टा या कड़वा स्वाद महसूस हो सकता है।
3. भोजन या एसिड का ऊपर आना
कुछ लोगों को ऐसा महसूस होता है कि भोजन या तरल पदार्थ पेट से वापस गले की ओर आ रहा है। इसे Regurgitation कहा जाता है।
4. निगलने में कठिनाई
लंबे समय तक GERD रहने पर इसोफेगस में सूजन या संकुचन के कारण भोजन निगलने में परेशानी हो सकती है।
5. गले में जलन या खराश
एसिड गले तक पहुंचने पर गले में जलन, खराश या बार-बार गला साफ करने की जरूरत महसूस हो सकती है।
6. लगातार खांसी
विशेष रूप से रात में या लेटने के बाद होने वाली पुरानी खांसी कुछ लोगों में GERD से संबंधित हो सकती है।
7. आवाज में भारीपन
एसिड के गले और वोकल कॉर्ड के आसपास पहुंचने से आवाज में बदलाव या भारीपन हो सकता है।
8. पेट फूलना और डकार
कुछ लोगों में GERD के साथ बार-बार डकार, पेट फूलना या ऊपरी पेट में असहजता भी हो सकती है।
GERD के कारण और जोखिम कारक
GERD का कोई एक कारण नहीं होता। कई कारक इसके विकास में भूमिका निभा सकते हैं।
LES की कमजोरी: यदि LES ठीक तरह से बंद नहीं होता, तो पेट की सामग्री ऊपर आ सकती है।
अधिक वजन या मोटापा: पेट के आसपास अतिरिक्त दबाव पेट की सामग्री को ऊपर की ओर धकेल सकता है।
गर्भावस्था: गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव और बढ़ते गर्भाशय का पेट पर दबाव एसिड रिफ्लक्स बढ़ा सकता है।
बहुत अधिक या भारी भोजन: एक बार में बहुत ज्यादा खाना पेट में दबाव बढ़ा सकता है।
सोने के तुरंत पहले भोजन: भोजन करने के तुरंत बाद लेटने से रिफ्लक्स की संभावना बढ़ सकती है।
धूम्रपान: धूम्रपान LES के कार्य को प्रभावित कर सकता है और GERD के लक्षणों को बढ़ा सकता है।
कुछ खाद्य पदार्थ: कुछ लोगों में मसालेदार भोजन, अधिक वसायुक्त भोजन, चॉकलेट, कॉफी, पुदीना, टमाटर या खट्टे खाद्य पदार्थ लक्षण बढ़ा सकते हैं। हालांकि हर व्यक्ति में ट्रिगर अलग हो सकते हैं।
कुछ दवाएं: कुछ दवाएं GERD के लक्षणों को बढ़ा सकती हैं। इसलिए यदि किसी दवा के बाद समस्या बढ़ रही हो तो उसे अपने-आप बंद करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
GERD और सामान्य एसिडिटी में अंतर
कभी-कभी अधिक भोजन करने या कुछ विशेष खाद्य पदार्थ खाने के बाद एसिडिटी होना सामान्य हो सकता है। लेकिन यदि सीने में जलन या एसिड रिफ्लक्स बार-बार हो, लंबे समय तक बना रहे या रोजमर्रा की गतिविधियों और नींद को प्रभावित करे, तो यह GERD का संकेत हो सकता है।
बार-बार होने वाले लक्षणों को केवल सामान्य गैस या एसिडिटी मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
GERD का निदान कैसे किया जाता है?
डॉक्टर आमतौर पर मरीज के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर प्रारंभिक मूल्यांकन करते हैं। कुछ मामलों में अतिरिक्त जांच की आवश्यकता हो सकती है।
एंडोस्कोपी
Upper GI Endoscopy में एक पतली कैमरा लगी ट्यूब की मदद से इसोफेगस, पेट और छोटी आंत के शुरुआती हिस्से को देखा जाता है। इससे सूजन, घाव या अन्य बदलावों की पहचान की जा सकती है।
24 घंटे की pH मॉनिटरिंग
यह जांच इसोफेगस में एसिड के संपर्क की मात्रा और अवधि को मापने में मदद करती है।
एसोफेजियल मैनोमेट्री
इस जांच से इसोफेगस की मांसपेशियों और LES के दबाव तथा कार्य का मूल्यांकन किया जा सकता है।
हर व्यक्ति को ये सभी जांच कराने की आवश्यकता नहीं होती। डॉक्टर लक्षणों और स्थिति के अनुसार जांच तय करते हैं।
GERD का इलाज
GERD का इलाज लक्षणों की गंभीरता और कारण के आधार पर किया जाता है।
1. जीवनशैली में बदलाव
हल्के या मध्यम लक्षणों में जीवनशैली में बदलाव काफी मददगार हो सकते हैं।
- एक बार में बहुत अधिक भोजन न करें।
- भोजन धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाएं।
- खाने के तुरंत बाद न लेटें।
- रात के भोजन और सोने के बीच पर्याप्त अंतर रखें।
- यदि वजन अधिक है तो चिकित्सकीय सलाह से वजन कम करने का प्रयास करें।
- धूम्रपान से बचें।
- ऐसे खाद्य पदार्थों की पहचान करें जिनसे आपके लक्षण बढ़ते हैं।
- बहुत अधिक तला-भुना और वसायुक्त भोजन सीमित करें।
- लंबे समय तक बहुत तंग कपड़े पहनने से बचें यदि उनसे लक्षण बढ़ते हों।
2. सोने की स्थिति
यदि रात में एसिड रिफ्लक्स अधिक होता है, तो बिस्तर के सिर वाले हिस्से को लगभग 15–20 सेंटीमीटर ऊंचा करने से कुछ लोगों को लाभ हो सकता है। केवल अतिरिक्त तकिए लगाने के बजाय पूरे ऊपरी शरीर को उचित तरीके से ऊंचा करना अधिक उपयोगी हो सकता है।
3. दवाएं
डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार विभिन्न प्रकार की दवाएं दे सकते हैं, जैसे:
- Antacids – पेट के एसिड को अस्थायी रूप से निष्क्रिय करने में मदद करते हैं।
- H2 receptor blockers – पेट में एसिड बनने को कम करते हैं।
- Proton pump inhibitors (PPIs) – पेट में एसिड बनने को अधिक प्रभावी रूप से कम करते हैं।
इन दवाओं का उपयोग डॉक्टर की सलाह के अनुसार करना चाहिए। लंबे समय तक दवा लेने की आवश्यकता होने पर डॉक्टर समय-समय पर उपचार की समीक्षा कर सकते हैं।
4. सर्जरी
कुछ ऐसे मरीज जिनमें दवाओं और जीवनशैली में बदलाव के बावजूद गंभीर GERD बना रहता है, या विशेष परिस्थितियों में सर्जिकल अथवा एंडोस्कोपिक उपचार पर विचार किया जा सकता है। इसका निर्णय गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और संबंधित विशेषज्ञ मरीज की स्थिति के अनुसार करते हैं।
GERD में किन चीजों से बचें?
हर व्यक्ति के लिए एक जैसा भोजन प्रतिबंध जरूरी नहीं होता। अपने व्यक्तिगत ट्रिगर को पहचानना अधिक उपयोगी है। यदि किसी भोजन के बाद बार-बार लक्षण बढ़ते हैं, तो उसे कम करना या उससे बचना उचित हो सकता है।
आमतौर पर निम्न चीजें कुछ लोगों में लक्षण बढ़ा सकती हैं:
- बहुत मसालेदार भोजन
- अत्यधिक तला-भुना भोजन
- बहुत अधिक वसायुक्त भोजन
- अधिक कॉफी या कैफीन
- चॉकलेट
- पुदीना
- टमाटर और कुछ खट्टे खाद्य पदार्थ
- अधिक मात्रा में भोजन
- देर रात भारी भोजन
हालांकि सभी मरीजों को इन सभी चीजों से बचने की आवश्यकता नहीं होती।
GERD की संभावित जटिलताएं
यदि GERD लंबे समय तक नियंत्रित न रहे, तो इसोफेगस में सूजन (Esophagitis), इसोफेगस का संकुचन (Stricture) या अन्य समस्याएं विकसित हो सकती हैं। कुछ मरीजों में लंबे समय तक एसिड के संपर्क से Barrett’s esophagus नामक बदलाव भी हो सकता है। Barrett’s esophagus वाले कुछ लोगों में इसोफेगस के कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है, इसलिए डॉक्टर की निगरानी महत्वपूर्ण होती है।
इसका मतलब यह नहीं है कि GERD वाले हर व्यक्ति में गंभीर जटिलता विकसित होगी। उचित जांच और उपचार से समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
सीने में जलन हमेशा केवल GERD के कारण नहीं होती। यदि सीने में तेज या दबाव जैसा दर्द हो, दर्द हाथ, कंधे, पीठ या जबड़े तक जाए, सांस फूलने लगे, ठंडा पसीना आए या चक्कर महसूस हो, तो इसे केवल एसिडिटी मानकर नजरअंदाज न करें और तत्काल चिकित्सा सहायता लें।
इसके अलावा निम्न स्थितियों में डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए:
- निगलने में लगातार कठिनाई
- निगलते समय दर्द
- बार-बार उल्टी
- बिना कारण वजन कम होना
- उल्टी में खून आना
- काले रंग का मल
- लगातार या बढ़ते हुए GERD के लक्षण
- दवाओं और जीवनशैली में बदलाव के बावजूद समस्या बनी रहना
निष्कर्ष
गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) एक सामान्य लेकिन लंबे समय तक रहने पर परेशानी पैदा करने वाली पाचन संबंधी समस्या है। इसमें पेट का एसिड या सामग्री बार-बार इसोफेगस में वापस आने लगती है, जिससे सीने में जलन, खट्टा स्वाद, गले में जलन, खांसी और निगलने में परेशानी जैसे लक्षण हो सकते हैं।
समय पर पहचान, व्यक्तिगत ट्रिगर से बचाव, संतुलित भोजन, उचित वजन, भोजन के बाद तुरंत न लेटना और डॉक्टर द्वारा सुझाए गए उपचार से GERD को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। यदि लक्षण बार-बार होते हैं या चेतावनी वाले लक्षण दिखाई देते हैं, तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
