पेरोनी रोग (Peyronie’s Disease): लिंग के अंदर स्कार टिशू बनने की समस्या
परिचय
पुरुषों में यौन स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं पर खुलकर बात नहीं होती। शर्म, झिझक और जानकारी की कमी के कारण लोग सालों तक परेशानी सहते रहते हैं। पेरोनी रोग ऐसी ही एक स्थिति है, जिसमें इरेक्शन के समय लिंग टेढ़ा हो जाता है और कई बार दर्द भी होता है। यह कोई शर्मनाक या दुर्लभ बीमारी नहीं है, और सही समय पर इलाज से इसे काफी हद तक संभाला जा सकता है।
पेरोनी रोग क्या है?
लिंग के अंदर स्पंज जैसे ऊतक की दो लंबी नलिकाएं (कॉर्पोरा कैवर्नोसा) होती हैं, जो इरेक्शन के समय खून से भरकर लिंग को कड़ा करती हैं। इन नलिकाओं के चारों ओर एक मजबूत, लचीली परत होती है, जिसे ट्यूनिका एल्बुजिनिया कहते हैं।
पेरोनी रोग में इस परत के नीचे या उसमें रेशेदार स्कार टिशू (प्लाक) बन जाता है। यह प्लाक लचीला नहीं होता। इरेक्शन के समय जिस हिस्से में प्लाक होता है, वह खिंच नहीं पाता, जबकि बाकी हिस्सा फैल जाता है। इससे लिंग एक तरफ मुड़ जाता है, यानी ऊपर, नीचे या बगल में। इसका नाम फ्रांसीसी सर्जन फ्रांस्वा दे ला पेरोनी के नाम पर पड़ा, जिन्होंने 1743 में इसका वर्णन किया था।
अनुमान है कि लगभग 3 से 9 प्रतिशत पुरुषों में यह समस्या होती है। यह आमतौर पर 40 से 70 वर्ष की उम्र के बीच दिखती है, पर कम उम्र के पुरुषों में भी हो सकती है।
पेरोनी रोग के कारण
इसका सटीक कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। सबसे मान्य सिद्धांत यह है कि लिंग में बार-बार होने वाली छोटी चोट या माइक्रोट्रॉमा के बाद शरीर का घाव भरने का तंत्र सामान्य से अलग तरीके से काम करने लगता है।
सामान्य घाव भरने में शरीर ठीक होने के बाद अतिरिक्त कोलेजन हटा देता है। जिन लोगों में यह प्रक्रिया गड़बड़ा जाती है, उनमें कोलेजन जमा होकर सख्त प्लाक बन जाता है। संभावित कारण और जोखिम कारक ये हैं:
- यौन क्रिया या खेल के दौरान लिंग पर चोट, जैसे इरेक्शन में लिंग का मुड़ जाना
- आनुवंशिकता: परिवार में पेरोनी रोग या डुपुइट्रेन कॉन्ट्रैक्चर (हथेली में उंगलियों के पास ऊतक का सख्त होना) का इतिहास
- बढ़ती उम्र, क्योंकि ऊतकों की लचक कम होती जाती है
- मधुमेह (डायबिटीज), जिसमें घाव भरने की प्रक्रिया प्रभावित होती है
- उच्च रक्तचाप और हृदय रोग
- धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन
- प्रोस्टेट की सर्जरी, जिसके बाद जोखिम कुछ बढ़ सकता है
- ऑटोइम्यून स्थितियां
कई मामलों में कोई स्पष्ट कारण नहीं मिलता, और कई पुरुषों को किसी चोट की याद भी नहीं होती।
लक्षण
पेरोनी रोग के लक्षण अचानक भी उभर सकते हैं और धीरे-धीरे भी। प्रमुख लक्षण ये हैं:
- लिंग का टेढ़ापन: इरेक्शन के समय लिंग ऊपर, नीचे या किसी एक ओर मुड़ जाता है। यह सबसे आम लक्षण है।
- लिंग की त्वचा के नीचे गांठ या सख्त पट्टी: उंगली से छूने पर महसूस होने वाला कठोर हिस्सा।
- दर्द: शुरुआती दौर में इरेक्शन के समय या बिना इरेक्शन के भी दर्द हो सकता है।
- लिंग का छोटा होना: प्लाक के कारण लिंग की लंबाई कुछ कम लग सकती है।
- “घंटे के आकार” जैसी बनावट या गड्ढा: इरेक्शन में लिंग का कोई हिस्सा पतला या दबा हुआ दिख सकता है।
- इरेक्शन की समस्या: कुछ पुरुषों में इरेक्शन कमजोर होता है या टिकता नहीं।
- यौन संबंध में कठिनाई या दर्द, कभी-कभी संबंध बनाना असंभव-सा हो जाता है।
रोग के दो चरण
1. तीव्र (एक्यूट) चरण: यह सूजन का दौर है और आमतौर पर 6 से 18 महीने तक चलता है। इसमें दर्द रहता है, प्लाक बनता है और टेढ़ापन बढ़ता जाता है।
2. दीर्घकालिक (क्रॉनिक) चरण: इसमें दर्द अक्सर कम हो जाता है या खत्म हो जाता है। प्लाक स्थिर हो जाता है और टेढ़ापन आमतौर पर बढ़ना बंद कर देता है। सर्जरी जैसे निर्णय ज्यादातर इसी चरण में लिए जाते हैं।
कुछ मामलों में समस्या समय के साथ अपने आप हल्की हो जाती है, लेकिन बहुत से मामलों में टेढ़ापन बना रहता है या बढ़ जाता है। इसलिए बिना जांच के इंतजार करना ठीक नहीं है।
निदान कैसे होता है?
निदान आमतौर पर यूरोलॉजिस्ट (मूत्र रोग विशेषज्ञ) या एंड्रोलॉजिस्ट करते हैं। इसमें ये चरण शामिल हो सकते हैं:
- इतिहास और शारीरिक जांच: लक्षण कब शुरू हुए, दर्द है या नहीं, चोट का इतिहास, अन्य बीमारियां और दवाएं। डॉक्टर लिंग को हाथ से छूकर प्लाक की जांच करते हैं।
- तस्वीरें: कई डॉक्टर मरीज से इरेक्शन की स्थिति की तस्वीर लाने को कहते हैं, ताकि टेढ़ेपन का कोण समझा जा सके।
- अल्ट्रासाउंड (डॉप्लर): प्लाक का आकार, कैल्शियम जमाव और रक्त प्रवाह की स्थिति देखने के लिए।
- इंजेक्शन से इरेक्शन कराकर जांच: क्लिनिक में दवा देकर इरेक्शन लाया जाता है, ताकि टेढ़ेपन का सटीक मापन हो सके।
इलाज के विकल्प
इलाज इस पर निर्भर करता है कि रोग किस चरण में है, टेढ़ापन कितना है और यौन क्रिया पर कितना असर पड़ रहा है। यदि टेढ़ापन हल्का है, दर्द नहीं है और यौन जीवन प्रभावित नहीं है, तो कई बार केवल निगरानी ही काफी होती है।
1. दवाएं
- खाने वाली दवाएं: पेंटोक्सिफाइलिन, विटामिन ई और पोटाबा जैसी दवाएं कभी-कभी दी जाती हैं, लेकिन इनके प्रभाव के प्रमाण सीमित और मिले-जुले हैं। दर्द के लिए एनाल्जेसिक (NSAIDs) दी जा सकती हैं।
- प्लाक में सीधे इंजेक्शन: वेरापामिल या इंटरफेरॉन जैसी दवाएं। कोलेजिनेज क्लॉस्ट्रिडियम हिस्टोलिटिकम (ज़ियाफ्लेक्स) नामक इंजेक्शन कुछ देशों में स्थिर चरण के मरीजों के लिए स्वीकृत है, जिसमें कोण 30 से 90 डिग्री के बीच हो। इसकी उपलब्धता हर जगह एक जैसी नहीं है, इसलिए अपने डॉक्टर से पूछें।
2. नॉन-सर्जिकल उपाय
- पेनाइल ट्रैक्शन डिवाइस: लिंग को धीरे-धीरे खींचने वाला उपकरण, जो लंबाई कम होने और टेढ़ापन घटाने में कुछ मदद कर सकता है। इसे डॉक्टर की सलाह से ही इस्तेमाल करें।
- वैक्यूम डिवाइस: कुछ मामलों में सहायक हो सकता है, पर सावधानी जरूरी है।
- शॉक वेव थेरेपी: इससे दर्द में राहत के कुछ प्रमाण हैं, पर टेढ़ापन ठीक करने में इसकी भूमिका स्पष्ट नहीं है।
3. सर्जरी
सर्जरी आमतौर पर तब सोची जाती है जब रोग कम से कम 12 महीने पुराना हो, कम से कम 3 से 6 महीने से स्थिर हो, और टेढ़ापन इतना हो कि संभोग में गंभीर बाधा आए।
- प्लिकेशन (Plication): लिंग के लंबे हिस्से की तरफ की परत को टांके लगाकर छोटा किया जाता है, जिससे लिंग सीधा हो जाए। यह अपेक्षाकृत सरल प्रक्रिया है, पर इसमें लंबाई थोड़ी कम हो सकती है।
- प्लाक कटाव और ग्राफ्टिंग: प्लाक को काटकर उसकी जगह ग्राफ्ट लगाया जाता है। यह अधिक जटिल है और इसके बाद इरेक्शन में समस्या का जोखिम बढ़ सकता है।
- पेनाइल इम्प्लांट: यदि पेरोनी के साथ गंभीर इरेक्टाइल डिसफंक्शन भी हो और दवाओं से लाभ न मिले, तो इम्प्लांट का विकल्प होता है।
मानसिक प्रभाव
पेरोनी रोग का असर केवल शारीरिक नहीं होता। कई पुरुषों में चिंता, आत्मविश्वास में कमी, अवसाद, और साथी के साथ संबंधों में दूरी की समस्या देखी जाती है। कई लोग इसे छिपाते हैं, जिससे तनाव और बढ़ता है।
ऐसे में साथी के साथ खुलकर बात करना बहुत मददगार होता है। जरूरत महसूस हो तो काउंसलर या सेक्स थेरेपिस्ट की मदद लेने में भी संकोच नहीं करना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना इलाज का जरूरी हिस्सा है।
बचाव और जीवनशैली
पेरोनी रोग को पूरी तरह रोकने का कोई पक्का तरीका नहीं है, लेकिन कुछ सावधानियां जोखिम कम करने में मदद कर सकती हैं:
- यौन क्रिया में अत्यधिक जोर या जल्दबाजी से बचें, ताकि लिंग पर चोट न लगे
- मधुमेह और उच्च रक्तचाप को नियंत्रण में रखें
- धूम्रपान छोड़ें और शराब सीमित रखें
- नियमित व्यायाम करें और वजन संतुलित रखें
- लिंग में दर्द, गांठ या टेढ़ेपन को नजरअंदाज न करें
डॉक्टर से कब मिलें?
निम्न स्थितियों में जल्द से जल्द विशेषज्ञ से मिलें:
- इरेक्शन के समय लिंग में नया टेढ़ापन दिखे
- त्वचा के नीचे गांठ या सख्त पट्टी महसूस हो
- इरेक्शन में दर्द हो
- संभोग में कठिनाई हो रही हो
- इरेक्शन बनाए रखने में परेशानी बढ़ रही हो
अपने आप दवा लेना या इंटरनेट पर बताए गए घरेलू नुस्खे और बिना प्रमाण वाले “चमत्कारी तेल/कैप्सूल” आजमाना नुकसानदायक हो सकता है। कई विज्ञापित उत्पादों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता, और देरी करने से इलाज के विकल्प सीमित हो सकते हैं।
कुछ आम भ्रांतियां
- “यह यौन संचारित रोग है।” नहीं, पेरोनी रोग संक्रमण नहीं है और साथी को नहीं फैलता।
- “यह कैंसर है या कैंसर बन जाएगा।” नहीं, प्लाक एक सौम्य (बिनाइन) स्कार टिशू है।
- “यह मेरी गलती या हस्तमैथुन का नतीजा है।” ऐसा कोई प्रमाण नहीं है। इसके पीछे जटिल जैविक कारण होते हैं।
- “अब कुछ नहीं हो सकता।” गलत। सही निदान के बाद कई प्रभावी विकल्प उपलब्ध हैं।
निष्कर्ष
पेरोनी रोग एक वास्तविक चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें लिंग के भीतर स्कार टिशू बनने से टेढ़ापन, दर्द और यौन समस्याएं हो सकती हैं। यह न तो शर्म की बात है और न ही लाइलाज। शुरुआती जांच, सही निदान और विशेषज्ञ की सलाह से मरीज अपनी स्थिति के अनुसार सबसे उपयुक्त इलाज चुन सकते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि झिझक छोड़कर समय पर यूरोलॉजिस्ट से मिलें, अपने साथी से खुलकर बात करें और भरोसेमंद चिकित्सीय सलाह पर ही चलें। जल्दी ध्यान देने से न केवल शारीरिक परेशानी कम होती है, बल्कि आत्मविश्वास और रिश्तों की गुणवत्ता भी बनी रहती है।
