ड्यूप्यूट्रेंस कॉन्ट्रैक्चर (Dupuytrens Contracture - उंगलियों का मुड़ जाना)
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ड्यूप्यूट्रेंस कॉन्ट्रैक्चर (Dupuytren’s Contracture): उंगलियों के मुड़ जाने की समस्या

परिचय

ड्यूप्यूट्रेंस कॉन्ट्रैक्चर हाथ की एक ऐसी स्थिति है जिसमें हथेली की त्वचा के नीचे मौजूद ऊतक (टिशू) धीरे-धीरे मोटा और सख्त होने लगता है। यह ऊतक, जिसे चिकित्सकीय भाषा में “पामर फैशिया” (Palmar Fascia) कहा जाता है, समय के साथ सिकुड़ने लगता है और रस्सी जैसी गांठें बना लेता है। इसके कारण एक या एक से अधिक उंगलियां — सबसे अधिक अनामिका (रिंग फिंगर) और कनिष्ठा (छोटी उंगली) — धीरे-धीरे हथेली की ओर मुड़ने लगती हैं और सीधी नहीं हो पातीं।

यह बीमारी धीमी गति से बढ़ती है, अक्सर महीनों या वर्षों में विकसित होती है, और शुरुआती अवस्था में इससे दर्द नहीं होता। इसी वजह से बहुत से लोग इसे शुरू में गंभीरता से नहीं लेते, जबकि समय पर ध्यान न देने पर यह हाथ के सामान्य कामकाज को काफी प्रभावित कर सकती है।

इस बीमारी का नाम फ्रांसीसी सर्जन गीयोम ड्यूप्यूट्रेन (Guillaume Dupuytren) के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने 19वीं सदी में सबसे पहले इसका विस्तृत वर्णन किया और इसके शल्य चिकित्सा (सर्जिकल) उपचार का तरीका बताया था।

यह बीमारी क्यों होती है?

ड्यूप्यूट्रेंस कॉन्ट्रैक्चर का सटीक कारण आज भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह अनुवांशिक (जेनेटिक) और पर्यावरणीय कारकों के मेल से होती है। इसमें हथेली की फैशिया में मौजूद कोलेजन (Collagen) की संरचना असामान्य रूप से बदल जाती है, जिससे यह ऊतक मोटा और अनम्य (कम लचीला) हो जाता है।

यह कोई संक्रामक (Infectious) बीमारी नहीं है और न ही यह हाथ की चोट या अधिक मेहनत करने से सीधे होती है, हालांकि कुछ शोधों में हाथ पर बार-बार पड़ने वाले कंपन (vibration) या दबाव को एक संभावित जोखिम कारक बताया गया है।

जोखिम कारक (Risk Factors)

निम्नलिखित कारक इस बीमारी के होने की संभावना को बढ़ा सकते हैं:

  • पारिवारिक इतिहास — यदि परिवार में माता-पिता या भाई-बहन को यह समस्या रही हो, तो इसकी आशंका अधिक होती है। यह उत्तरी यूरोपीय मूल के लोगों में अधिक देखी जाती है।
  • उम्र — यह समस्या आमतौर पर 40 वर्ष की आयु के बाद शुरू होती है और उम्र के साथ इसका खतरा बढ़ता जाता है।
  • लिंग — पुरुषों में यह महिलाओं की तुलना में अधिक और अधिक गंभीर रूप में पाई जाती है।
  • मधुमेह (Diabetes) — मधुमेह से पीड़ित लोगों में इसका खतरा अधिक होता है।
  • धूम्रपान और शराब का सेवन — ये दोनों आदतें छोटी रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करके इस बीमारी के विकास में सहायक हो सकती हैं।
  • मिर्गी की दवाएं — कुछ अध्ययनों में मिर्गी-रोधी दवाओं के लंबे समय तक सेवन को भी इससे जोड़ा गया है।
  • मैनुअल श्रम — जिन लोगों के हाथों पर बार-बार कंपन या दबाव पड़ता है, जैसे मशीन ऑपरेटर, उनमें भी यह देखी जाती है, हालांकि इस पर वैज्ञानिक सहमति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

लक्षण

ड्यूप्यूट्रेंस कॉन्ट्रैक्चर के लक्षण धीरे-धीरे और चरणों में सामने आते हैं:

  1. शुरुआती चरण — हथेली की त्वचा के नीचे एक छोटी, सख्त गांठ (Nodule) महसूस होती है। यह गांठ आमतौर पर दर्द रहित होती है, हालांकि कभी-कभी हल्की संवेदनशीलता या हल्का दर्द हो सकता है।
  2. मध्य चरण — गांठ धीरे-धीरे एक रस्सी जैसी मोटी पट्टी (Cord) में बदल जाती है, जो हथेली से उंगली की ओर फैलती है।
  3. उन्नत चरण — यह पट्टी सिकुड़ने लगती है, जिससे प्रभावित उंगली हथेली की ओर मुड़ने लगती है। इस अवस्था में उंगली को पूरी तरह सीधा करना मुश्किल हो जाता है।

आमतौर पर सबसे अधिक प्रभावित उंगलियां अनामिका और कनिष्ठा होती हैं, हालांकि अंगूठे और तर्जनी में भी यह समस्या हो सकती है। यह एक या दोनों हाथों में हो सकती है, और कई बार दोनों हाथों में अलग-अलग गंभीरता के साथ पाई जाती है।

एक सामान्य जांच का तरीका है “टेबलटॉप टेस्ट” — इसमें व्यक्ति अपनी हथेली को किसी सपाट मेज पर पूरी तरह सीधा रखने की कोशिश करता है। यदि हथेली और उंगलियां मेज से पूरी तरह सटती नहीं हैं, तो यह इस बीमारी के बढ़ने का संकेत हो सकता है।

निदान (Diagnosis)

ड्यूप्यूट्रेंस कॉन्ट्रैक्चर का निदान मुख्य रूप से डॉक्टर द्वारा हाथ की शारीरिक जांच से किया जाता है। इसमें आमतौर पर किसी एक्स-रे, एमआरआई या रक्त जांच की आवश्यकता नहीं पड़ती, क्योंकि गांठ और पट्टी को छूकर तथा उंगली की गति देखकर ही इसकी पहचान की जा सकती है।

डॉक्टर यह भी आकलन करते हैं कि उंगली का जोड़ कितने डिग्री तक मुड़ चुका है, क्योंकि यही यह तय करने में मदद करता है कि उपचार की आवश्यकता है या नहीं, और यदि हां, तो कौन सा उपचार उपयुक्त होगा।

उपचार के विकल्प

उपचार की आवश्यकता और तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी किस अवस्था में है और यह दैनिक कामकाज को कितना प्रभावित कर रही है। शुरुआती हल्के मामलों में, जहां उंगली की गति पर कोई खास असर नहीं पड़ता, डॉक्टर केवल नियमित निगरानी (Watchful Waiting) की सलाह दे सकते हैं।

1. गैर-शल्य चिकित्सा (Non-Surgical) उपचार

  • कोलेजनेज इंजेक्शन (Collagenase Injection) — इसमें एक विशेष एंजाइम को सीधे सख्त हो चुकी पट्टी में इंजेक्ट किया जाता है, जो कोलेजन को तोड़ने में मदद करता है। इसके बाद डॉक्टर उंगली को धीरे से सीधा करके पट्टी को तोड़ते हैं। यह एक अपेक्षाकृत कम आक्रामक (कम इनवेसिव) विकल्प है।
  • नीडल एपोन्यूरोटॉमी (Needle Aponeurotomy) — इस प्रक्रिया में एक पतली सुई की मदद से त्वचा के नीचे सख्त हो चुकी पट्टी को कई जगह से काटा या तोड़ा जाता है, जिससे उंगली फिर से सीधी हो सके। यह प्रक्रिया स्थानीय एनेस्थीसिया के तहत की जाती है और इसमें रिकवरी का समय कम होता है।
  • फिजियोथेरेपी और स्ट्रेचिंग — हल्के मामलों में उंगलियों को खींचने वाले व्यायाम और हाथ की एक्सरसाइज़ कुछ हद तक मदद कर सकते हैं, हालांकि ये बीमारी को पूरी तरह ठीक नहीं करते।
  • स्प्लिंट (Splint) का उपयोग — कुछ मामलों में उंगली को सीधा रखने के लिए स्प्लिंट पहनने की सलाह दी जाती है, हालांकि इसका दीर्घकालिक प्रभाव सीमित माना जाता है।

2. शल्य चिकित्सा (Surgical) उपचार

जब स्थिति अधिक गंभीर हो जाती है और उंगली काफी हद तक मुड़ चुकी होती है, तो सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है:

  • फैशिएक्टॉमी (Fasciectomy) — इसमें सर्जन सख्त हो चुके ऊतक को शल्य चिकित्सा द्वारा पूरी तरह या आंशिक रूप से निकाल देते हैं। यह सबसे प्रभावी माना जाने वाला उपचार है, हालांकि इसमें रिकवरी का समय अधिक लगता है और फिजियोथेरेपी की आवश्यकता पड़ती है।
  • डर्मोफैशिएक्टॉमी (Dermofasciectomy) — गंभीर या बार-बार होने वाले (Recurrent) मामलों में, प्रभावित त्वचा और ऊतक दोनों को निकालकर उस स्थान पर त्वचा प्रत्यारोपण (Skin Graft) किया जाता है।

सर्जरी के बाद उंगली की गति वापस लाने के लिए फिजियोथेरेपी और हाथ के व्यायाम बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। मरीज को कुछ हफ्तों तक स्प्लिंट पहनने की भी सलाह दी जा सकती है ताकि उंगली दोबारा मुड़ने न पाए।

बीमारी दोबारा होने की संभावना

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ड्यूप्यूट्रेंस कॉन्ट्रैक्चर का कोई भी उपचार — चाहे वह इंजेक्शन हो, नीडल प्रक्रिया हो या सर्जरी — बीमारी को स्थायी रूप से जड़ से खत्म नहीं करता। समय के साथ यह दोबारा हो सकती है, विशेष रूप से उन लोगों में जिनका पारिवारिक इतिहास मजबूत हो या जो कम उम्र में ही इससे प्रभावित हुए हों। इसलिए उपचार के बाद भी नियमित जांच कराते रहना उचित माना जाता है।

दैनिक जीवन पर प्रभाव

जैसे-जैसे उंगलियां मुड़ती जाती हैं, रोज़मर्रा के सामान्य काम — जैसे हाथ मिलाना, दस्ताने पहनना, जेब में हाथ डालना, वस्तुएं पकड़ना या हाथ धोते समय हथेली को पूरी तरह फैलाना — कठिन होते जाते हैं। गंभीर मामलों में उंगली इतनी मुड़ जाती है कि वह हथेली से चिपकी हुई सी दिखाई देती है, जिससे व्यक्ति को शर्मिंदगी और सामाजिक असहजता भी महसूस हो सकती है।

डॉक्टर से कब मिलें

यदि हथेली में सख्त गांठ महसूस हो, उंगली धीरे-धीरे मुड़ने लगे, या टेबल पर हाथ पूरी तरह सीधा रखने में कठिनाई हो, तो हाथ के विशेषज्ञ (Hand Surgeon) या ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर उपचार के विकल्प अधिक और कम आक्रामक होते हैं, इसलिए लक्षण दिखते ही जांच कराना बेहतर रहता है।

निष्कर्ष

ड्यूप्यूट्रेंस कॉन्ट्रैक्चर एक धीरे-धीरे बढ़ने वाली, लेकिन प्रबंधनीय (मैनेजेबल) स्थिति है। यह जानलेवा नहीं है, लेकिन समय के साथ हाथ के कामकाज को प्रभावित कर सकती है। सही समय पर निदान, उचित उपचार विकल्प का चुनाव, और सर्जरी या इंजेक्शन के बाद नियमित फिजियोथेरेपी से अधिकांश लोग अपने हाथ का सामान्य उपयोग काफी हद तक वापस पा सकते हैं। यदि आपको या आपके परिवार में किसी को इस तरह के लक्षण दिखें, तो बिना देर किए किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना सबसे उचित कदम है।

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