डिसोसिएटिव आइडेंटिटी डिसऑर्डर (DID - मल्टीपल पर्सनैलिटी)
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डिसोसिएटिव आइडेंटिटी डिसऑर्डर (DID): समझ, लक्षण और उपचार

परिचय

डिसोसिएटिव आइडेंटिटी डिसऑर्डर (Dissociative Identity Disorder – DID) एक जटिल मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है, जिसे पहले “मल्टीपल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर” (Multiple Personality Disorder) के नाम से जाना जाता था। यह डिसोसिएटिव डिसऑर्डर्स की श्रेणी में आने वाली सबसे गंभीर और सबसे कम समझी जाने वाली मानसिक स्थितियों में से एक है। इस स्थिति में व्यक्ति के भीतर दो या दो से अधिक अलग-अलग “पहचान अवस्थाएं” (identity states) या व्यक्तित्व मौजूद होती हैं, जो बारी-बारी से उस व्यक्ति के व्यवहार को नियंत्रित करती हैं।

फिल्मों और लोकप्रिय संस्कृति में DID को अक्सर नाटकीय, डरावने या सनसनीखेज तरीके से दिखाया जाता है, जिससे इसके बारे में कई गलतफहमियां फैल गई हैं। वास्तविकता में यह एक गंभीर मानसिक आघात (ट्रॉमा) से जुड़ी स्थिति है, जिसे समझने और संवेदनशीलता के साथ देखने की आवश्यकता है।

DID क्या है?

DID मूल रूप से एक “डिसोसिएशन” (व्यक्तित्व का विभाजन या पृथक्करण) की प्रक्रिया है। सामान्य अवस्था में व्यक्ति की स्मृति, पहचान, चेतना और धारणा एक सुसंगत (integrated) रूप में कार्य करती हैं। DID में यह एकीकरण टूट जाता है, और व्यक्ति के भीतर अलग-अलग “पहचान अवस्थाएं” विकसित हो जाती हैं। इन्हें कभी-कभी “अल्टर्स” (alters) भी कहा जाता है।

हर अल्टर की अपनी अलग सोचने की शैली, व्यवहार, याददाश्त, यहां तक कि कभी-कभी अलग बोलने का लहजा या हस्तलेखन भी हो सकता है। एक अल्टर से दूसरे अल्टर में बदलाव को “स्विचिंग” कहा जाता है, और यह अचानक या धीरे-धीरे हो सकता है, कई बार तनावपूर्ण परिस्थितियों में ट्रिगर होकर।

यह ज़रूरी नहीं कि हर व्यक्ति में अल्टर्स की संख्या समान हो — कुछ लोगों में केवल दो पहचानें होती हैं, तो कुछ में कई। मुख्य बात यह है कि ये पहचानें व्यक्ति के दैनिक जीवन, कार्य, रिश्तों और आत्म-बोध को प्रभावित करती हैं।

DID के मुख्य लक्षण

चिकित्सकीय दृष्टिकोण से (DSM-5 के अनुसार), DID के निदान के लिए निम्नलिखित लक्षणों का होना आवश्यक माना जाता है:

1. पहचान का विभाजन व्यक्ति में दो या अधिक अलग व्यक्तित्व अवस्थाएं होती हैं, जो अलग सोच, भावना और व्यवहार पैटर्न के साथ प्रकट होती हैं। कुछ संस्कृतियों में इसे “आत्मा द्वारा ग्रस्त होने” जैसे अनुभव के रूप में भी वर्णित किया जा सकता है।

2. स्मृति में रुकावट (Amnesia) व्यक्ति को रोज़मर्रा की महत्वपूर्ण घटनाओं, अपनी निजी जानकारी, या पहले किए गए कार्यों को याद रखने में कठिनाई होती है। यह सामान्य भूलने की आदत से कहीं अधिक गंभीर होता है — व्यक्ति को यह भी याद नहीं रहता कि उसने कोई विशेष कार्य कब और कैसे किया।

3. समय का “खो जाना” (Time Loss) व्यक्ति को अक्सर यह अहसास होता है कि समय का एक हिस्सा “गायब” हो गया — जैसे वे अचानक किसी अलग जगह पर हों, बिना यह जाने कि वहां कैसे पहुंचे।

4. भावनात्मक और व्यवहारिक अस्थिरता मूड, व्यवहार और प्राथमिकताओं में अचानक और तीव्र बदलाव आ सकते हैं, जो व्यक्ति के सामान्य स्वभाव से अलग महसूस होते हैं।

5. दैनिक जीवन पर प्रभाव ये लक्षण व्यक्ति के सामाजिक, व्यावसायिक या अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कामकाज को बाधित करते हैं, और यह किसी सांस्कृतिक या धार्मिक प्रथा का सामान्य हिस्सा नहीं होते।

इसके अलावा, कई लोगों को डिपर्सनलाइज़ेशन (खुद से अलग महसूस करना) और डीरियलाइज़ेशन (आसपास की दुनिया अवास्तविक लगना) का अनुभव भी होता है।

DID के कारण

DID के होने का सबसे प्रमुख और वैज्ञानिक रूप से समर्थित कारण है — बचपन में गंभीर और बार-बार होने वाला आघात (chronic childhood trauma)। विशेष रूप से:

  • बचपन में शारीरिक, भावनात्मक या यौन शोषण
  • गंभीर उपेक्षा (नेग्लेक्ट)
  • अस्थिर या भयावह पारिवारिक वातावरण
  • प्राकृतिक आपदा या युद्ध जैसे गंभीर आघातजनक अनुभव

विशेषज्ञों का मानना है कि जब कोई बच्चा बार-बार असहनीय भावनात्मक पीड़ा का सामना करता है, और उसके पास उससे बचने या उसे संभालने का कोई सुरक्षित तरीका नहीं होता, तो मस्तिष्क एक रक्षा तंत्र के रूप में अनुभव को “अलग-अलग हिस्सों” में बांट देता है। यह एक प्रकार का मनोवैज्ञानिक बचाव है, जिससे बच्चा असहनीय अनुभव से खुद को मानसिक रूप से दूर रख पाता है।

चूंकि यह विकार बचपन में शुरू होता है, इसलिए वयस्क होने तक इसका निदान अक्सर देरी से होता है — कई बार दशकों बाद।

DID से जुड़ी गलतफहमियां

DID के बारे में समाज में कई भ्रांतियां प्रचलित हैं, जिन्हें स्पष्ट करना ज़रूरी है:

गलतफहमी: DID वाले लोग “खतरनाक” या “हिंसक” होते हैं। सच्चाई: अधिकांश शोध बताते हैं कि DID से पीड़ित व्यक्ति खुद हिंसा का शिकार होने की संभावना रखते हैं, न कि दूसरों के लिए खतरा। यह स्थिति आघात की प्रतिक्रिया है, अपराधिक प्रवृत्ति नहीं।

गलतफहमी: यह सिर्फ “नाटक” या “ध्यान खींचने” का तरीका है। सच्चाई: DID एक वास्तविक, गंभीर और अक्सर पीड़ादायक मानसिक स्थिति है, जिसे मेडिकल और मनोवैज्ञानिक समुदाय द्वारा मान्यता प्राप्त है।

गलतफहमी: हर अल्टर की एक अलग “सुपरनैचुरल” पहचान या शक्ति होती है। सच्चाई: फिल्मों में दिखाई जाने वाली अतिरंजित छवि वास्तविकता से बहुत दूर है। यह एक मनोवैज्ञानिक तंत्र है, अलौकिक घटना नहीं।

गलतफहमी: DID दुर्लभ है और वास्तविक जीवन में लगभग नहीं होता। सच्चाई: अध्ययन बताते हैं कि सामान्य जनसंख्या के लगभग 1-1.5% लोगों में DID के लक्षण पाए जा सकते हैं, हालांकि सही निदान की दर इससे बहुत कम है।

निदान की प्रक्रिया

DID का निदान करना जटिल है, क्योंकि इसके लक्षण कई बार अन्य मानसिक स्थितियों जैसे बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर, PTSD (पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर), या यहां तक कि सिज़ोफ्रेनिया जैसे विकारों से मिलते-जुलते लग सकते हैं। इसीलिए एक योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ द्वारा विस्तृत मूल्यांकन आवश्यक होता है।

निदान की प्रक्रिया में सामान्यतः शामिल होते हैं:

  • विस्तृत नैदानिक साक्षात्कार (क्लिनिकल इंटरव्यू)
  • संरचित डिसोसिएटिव एक्सपीरियंस स्केल जैसे मानकीकृत परीक्षण
  • लक्षणों का दीर्घकालिक अवलोकन
  • अन्य शारीरिक या मानसिक कारणों को खारिज करना (जैसे मिर्गी, नशे का प्रभाव)

गलत या देरी से निदान होने पर व्यक्ति को सही उपचार मिलने में वर्षों लग सकते हैं, इसलिए विशेषज्ञ की सहायता लेना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उपचार के तरीके

DID का कोई “त्वरित इलाज” नहीं है, लेकिन उचित और दीर्घकालिक उपचार से व्यक्ति एक स्थिर, कार्यशील जीवन जी सकता है। मुख्य उपचार विधियां इस प्रकार हैं:

1. मनोचिकित्सा (साइकोथेरेपी) यह उपचार का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। दीर्घकालिक टॉक थेरेपी, विशेष रूप से ट्रॉमा-केंद्रित थेरेपी, अल्टर्स के बीच संवाद और सहयोग बढ़ाने में मदद करती है, ताकि धीरे-धीरे व्यक्ति एक अधिक एकीकृत आत्म-बोध विकसित कर सके।

2. कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) और DBT ये चिकित्सा पद्धतियां भावनात्मक नियमन, नकारात्मक विचार पैटर्न को पहचानने और स्वस्थ मुकाबला (कोपिंग) तंत्र विकसित करने में सहायक होती हैं।

3. EMDR (आई मूवमेंट डीसेंसिटाइजेशन एंड रीप्रोसेसिंग) यह चिकित्सा पद्धति विशेष रूप से आघात से जुड़ी यादों को प्रोसेस करने के लिए उपयोगी मानी जाती है।

4. दवाइयां DID के लिए कोई विशिष्ट दवा नहीं है, लेकिन जुड़े हुए लक्षणों जैसे डिप्रेशन, चिंता (एंग्जायटी) या नींद की समस्याओं के लिए डॉक्टर एंटीडिप्रेसेंट या एंटी-एंग्जायटी दवाइयां सुझा सकते हैं।

5. सहायक वातावरण परिवार, दोस्तों और सहायता समूहों का सहयोग रिकवरी की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बना सकता है।

उपचार का लक्ष्य आमतौर पर यह होता है कि व्यक्ति अपनी विभिन्न पहचान अवस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल और सहयोग विकसित करे, ताकि दैनिक जीवन अधिक स्थिर और सुरक्षित बन सके।

निष्कर्ष

डिसोसिएटिव आइडेंटिटी डिसऑर्डर एक गंभीर लेकिन समझने योग्य मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है, जो अक्सर बचपन के गहरे आघात से उत्पन्न होती है। इसे सनसनीखेज या डरावने चश्मे से देखने के बजाय, करुणा और वैज्ञानिक समझ के साथ देखा जाना चाहिए। सही निदान, दीर्घकालिक चिकित्सा और सहायक वातावरण के साथ, DID से पीड़ित लोग एक स्थिर और सार्थक जीवन जी सकते हैं।

यदि आप या आपका कोई परिचित इस स्थिति के लक्षणों से जूझ रहा है, तो किसी योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ (मनोचिकित्सक या क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट) से संपर्क करना सबसे उचित कदम है।

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