एरिथेमा मल्टीफॉर्म (Erythema Multiforme)
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एरिथेमा मल्टीफॉर्म (Erythema Multiforme): एक संपूर्ण जानकारी

परिचय

एरिथेमा मल्टीफॉर्म एक तीव्र (acute), प्रतिरक्षा-प्रणाली द्वारा संचालित (immune-mediated) त्वचा रोग है, जो त्वचा और कभी-कभी श्लेष्मा झिल्लियों (mucous membranes) पर विशिष्ट प्रकार के चकत्तों के रूप में प्रकट होता है। इस रोग का नाम “मल्टीफॉर्म” इसलिए पड़ा क्योंकि त्वचा पर उभरने वाले घाव कई अलग-अलग आकार और रूपों में दिखाई दे सकते हैं। यह रोग आमतौर पर स्वतः सीमित (self-limiting) होता है, यानी उचित देखभाल के साथ यह अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन इसके गंभीर रूप जीवन के लिए खतरा भी बन सकते हैं।

यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन यह युवा वयस्कों (20 से 40 वर्ष की आयु) में अधिक आम देखी जाती है। पुरुषों में यह महिलाओं की तुलना में थोड़ा अधिक पाया जाता है। यह कोई संक्रामक (contagious) रोग नहीं है, यानी यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता।

एरिथेमा मल्टीफॉर्म के प्रकार

चिकित्सकीय दृष्टि से इस रोग को मुख्यतः दो प्रकारों में बांटा गया है:

1. एरिथेमा मल्टीफॉर्म माइनर (EM Minor) इसमें केवल त्वचा प्रभावित होती है, या अधिकतम एक श्लेष्मा झिल्ली (जैसे मुंह) हल्के रूप में शामिल होती है। यह रोग का हल्का रूप है और सामान्यतः जटिलताओं के बिना ठीक हो जाता है।

2. एरिथेमा मल्टीफॉर्म मेजर (EM Major) इस प्रकार में त्वचा के साथ-साथ एक या अधिक श्लेष्मा झिल्लियाँ (मुंह, आंख, जननांग क्षेत्र) गंभीर रूप से प्रभावित होती हैं। इसमें बुखार और सामान्य कमजोरी जैसे लक्षण भी साथ में हो सकते हैं। पहले इसे स्टीवन-जॉनसन सिंड्रोम (Stevens-Johnson Syndrome) से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब चिकित्सा विज्ञान में इन दोनों को अलग-अलग बीमारियां माना जाता है, क्योंकि इनके मूल कारण और तंत्र (mechanism) भिन्न होते हैं।

कारण

एरिथेमा मल्टीफॉर्म का मुख्य कारण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की एक अतिसंवेदनशील प्रतिक्रिया (hypersensitivity reaction) है, जो किसी संक्रमण या दवा के प्रति उत्पन्न होती है। इसके प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:

संक्रमण (Infections)

  • हर्पीज सिम्पलेक्स वायरस (HSV): यह एरिथेमा मल्टीफॉर्म का सबसे सामान्य कारण है। लगभग 90% से अधिक मामलों में यह रोग हर्पीज संक्रमण के बाद उत्पन्न होता है। यह होठों या जननांग क्षेत्र में हर्पीज के घावों के कुछ दिनों बाद प्रकट हो सकता है।
  • माइकोप्लाज्मा निमोनिया (Mycoplasma pneumoniae): यह जीवाणु संक्रमण, विशेषकर बच्चों में, इस रोग का एक प्रमुख कारण है।
  • अन्य वायरल संक्रमण जैसे हेपेटाइटिस, एपस्टीन-बार वायरस आदि भी कभी-कभी कारण बन सकते हैं।

दवाएं (Medications)

कुछ दवाओं के प्रति प्रतिक्रिया के कारण भी यह रोग हो सकता है, जैसे:

  • एंटीबायोटिक्स (सल्फा दवाएं, पेनिसिलिन)
  • दर्द निवारक दवाएं (NSAIDs)
  • मिर्गी-रोधी दवाएं (एंटीकॉन्वल्संट्स)

अन्य कारण

कुछ मामलों में टीकाकरण, स्वप्रतिरक्षी रोग (autoimmune diseases), या कैंसर से संबंधित स्थितियां भी इस रोग से जुड़ी पाई गई हैं। लगभग 20% मामलों में स्पष्ट कारण का पता नहीं चल पाता, जिन्हें “इडियोपैथिक” (idiopathic) कहा जाता है।

लक्षण

एरिथेमा मल्टीफॉर्म के लक्षण आमतौर पर अचानक शुरू होते हैं और कुछ ही दिनों में तेजी से बढ़ते हैं।

त्वचा संबंधी लक्षण

इस रोग की सबसे विशिष्ट पहचान “टारगेट लीजन” या “बुल्स-आई घाव” (target lesions) है, जो निम्नलिखित तीन भागों से बने होते हैं:

  1. केंद्र में गहरा लाल या बैंगनी रंग का धब्बा (कभी-कभी छाले जैसा)
  2. उसके चारों ओर हल्के रंग की एक अंगूठी
  3. सबसे बाहर एक लाल किनारा

ये घाव आमतौर पर हाथों, पैरों, हथेलियों और तलवों पर सममित (symmetrical) रूप से दिखाई देते हैं और धीरे-धीरे शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकते हैं। कुछ मामलों में इनमें खुजली या जलन भी महसूस होती है।

श्लेष्मा झिल्ली संबंधी लक्षण

गंभीर मामलों (EM Major) में मुंह के अंदर छाले, होठों पर सूजन और पपड़ी, आंखों में लालिमा और जलन, तथा जननांग क्षेत्र में घाव हो सकते हैं।

सामान्य लक्षण

  • हल्का बुखार
  • शरीर में दर्द और थकान
  • जोड़ों में दर्द
  • गले में खराश

निदान (Diagnosis)

एरिथेमा मल्टीफॉर्म का निदान मुख्य रूप से चिकित्सक द्वारा शारीरिक परीक्षण और घावों की विशिष्ट बनावट को देखकर किया जाता है। “टारगेट लीजन” इसकी सबसे बड़ी पहचान है। इसके अतिरिक्त निम्नलिखित जांचें भी की जा सकती हैं:

  • त्वचा बायोप्सी: यदि निदान स्पष्ट न हो तो त्वचा का एक छोटा टुकड़ा लेकर सूक्ष्मदर्शी से जांच की जाती है।
  • रक्त परीक्षण: संक्रमण या सूजन की पुष्टि के लिए।
  • HSV और माइकोप्लाज्मा जांच: कारण का पता लगाने के लिए।

यह जरूरी है कि इसे अन्य समान दिखने वाली बीमारियों जैसे पित्ती (urticaria), स्टीवन-जॉनसन सिंड्रोम और टॉक्सिक एपिडर्मल नेक्रोलिसिस (TEN) से अलग पहचाना जाए, क्योंकि इनका उपचार और गंभीरता अलग होती है।

उपचार

एरिथेमा मल्टीफॉर्म का उपचार इसकी गंभीरता और कारण पर निर्भर करता है।

हल्के मामलों (EM Minor) का उपचार

  • यह रोग सामान्यतः 2 से 4 सप्ताह में अपने आप ठीक हो जाता है।
  • खुजली और असहजता कम करने के लिए एंटीहिस्टामिन दवाएं दी जाती हैं।
  • त्वचा पर सूजन कम करने के लिए हल्के स्टेरॉयड क्रीम का प्रयोग किया जा सकता है।
  • मुंह में घाव होने पर दर्द कम करने वाले माउथवॉश या जेल सुझाए जाते हैं।

मूल कारण का उपचार

  • यदि कारण हर्पीज संक्रमण है, तो एंटीवायरल दवाएं (जैसे एसाइक्लोविर) दी जाती हैं। बार-बार होने वाले मामलों में लंबे समय तक निवारक एंटीवायरल थेरेपी भी दी जा सकती है।
  • यदि कारण कोई दवा है, तो उस दवा को तुरंत बंद करना आवश्यक होता है।
  • जीवाणु संक्रमण (जैसे माइकोप्लाज्मा) होने पर उपयुक्त एंटीबायोटिक दी जाती है।

गंभीर मामलों (EM Major) का उपचार

गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती होना आवश्यक हो सकता है, जहां:

  • शरीर में पानी और पोषण की कमी को पूरा करने के लिए IV फ्लूइड्स दिए जाते हैं।
  • आंखों की गंभीर समस्या होने पर नेत्र विशेषज्ञ की सलाह ली जाती है।
  • कुछ मामलों में प्रणालीगत स्टेरॉयड (systemic corticosteroids) या इम्यूनोसप्रेसिव दवाओं का प्रयोग किया जाता है, हालांकि इनके उपयोग को लेकर चिकित्सकों में अलग-अलग राय है।

संभावित जटिलताएं

अधिकांश मामलों में एरिथेमा मल्टीफॉर्म बिना किसी स्थायी नुकसान के ठीक हो जाता है। हालांकि, कुछ दुर्लभ जटिलताएं भी हो सकती हैं:

  • त्वचा पर अस्थायी रंग परिवर्तन (pigmentation changes)
  • गंभीर मामलों में आंखों को स्थायी नुकसान
  • मुंह के घावों के कारण खाने-पीने में कठिनाई
  • रोग का बार-बार होना (recurrent EM), विशेषकर जब कारण हर्पीज संक्रमण हो

रोकथाम

चूंकि इस रोग का सबसे सामान्य कारण हर्पीज संक्रमण है, इसलिए बार-बार होने वाले मामलों में निम्नलिखित उपाय सहायक हो सकते हैं:

  • हर्पीज संक्रमण के लक्षण दिखते ही समय पर उपचार लेना
  • चिकित्सक की सलाह अनुसार निवारक एंटीवायरल दवाओं का सेवन
  • जिन दवाओं से पहले प्रतिक्रिया हो चुकी हो, उनसे बचना और भविष्य में चिकित्सक को इसकी जानकारी देना
  • किसी भी नई दवा के सेवन के बाद त्वचा पर असामान्य लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना

निष्कर्ष

एरिथेमा मल्टीफॉर्म एक ऐसी त्वचा संबंधी स्थिति है जो अधिकांशतः हल्की और स्वतः ठीक होने वाली होती है, लेकिन इसके गंभीर रूप को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशिष्ट “टारगेट लीजन” इसकी पहचान की सबसे बड़ी कुंजी है। यदि त्वचा पर ऐसे असामान्य चकत्ते दिखाई दें, विशेषकर बुखार, मुंह के छालों या आंखों की समस्या के साथ, तो बिना देरी किए त्वचा रोग विशेषज्ञ (dermatologist) से परामर्श लेना चाहिए। समय पर सही निदान और उपचार से इस रोग की जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

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