स्किन टैग्स (Skin Tags / मस्से)
|

स्किन टैग्स (Skin Tags / मस्से): कारण, लक्षण और उपचार

परिचय

स्किन टैग्स, जिन्हें हिंदी में आमतौर पर “मस्से” या “चमड़ी के छोटे उभार” कहा जाता है, त्वचा पर होने वाली एक बेहद सामान्य समस्या है। ये छोटे, मुलायम और अक्सर मांस के रंग के या हल्के भूरे रंग के होते हैं, जो त्वचा से एक पतली डंठल (stalk) के सहारे जुड़े होते हैं और बाहर की ओर लटकते हुए दिखाई देते हैं। चिकित्सा विज्ञान में इन्हें “एक्रोकॉर्डन” (Acrochordon) कहा जाता है।

स्किन टैग्स आमतौर पर हानिरहित (benign) होते हैं यानी ये कैंसरकारी नहीं होते और न ही इनसे किसी प्रकार का दर्द होता है। हालांकि, जब ये कपड़ों, गहनों या त्वचा की सिलवटों से रगड़ खाते हैं, तो कभी-कभी असुविधा या जलन पैदा कर सकते हैं। ये किसी भी उम्र में हो सकते हैं, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ-साथ इनकी संख्या और आकार में वृद्धि देखी जाती है। एक अनुमान के अनुसार, लगभग 50 प्रतिशत से अधिक वयस्कों को अपने जीवनकाल में कभी न कभी स्किन टैग्स का अनुभव होता है।

इस लेख में हम स्किन टैग्स के कारण, इनके होने की जगह, लक्षण, निदान, उपचार के तरीकों और बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

स्किन टैग्स क्या होते हैं?

स्किन टैग्स त्वचा की ऊपरी परत की एक अतिरिक्त वृद्धि होती है, जिसमें कोलेजन फाइबर, रक्त वाहिकाएं (blood vessels) और त्वचा की कोशिकाएं शामिल होती हैं। ये आमतौर पर आकार में बहुत छोटे होते हैं—कुछ मिलीमीटर से लेकर एक सेंटीमीटर तक—लेकिन दुर्लभ मामलों में ये इससे भी बड़े हो सकते हैं। इनकी बनावट मुलायम और झुर्रीदार होती है, और ये अक्सर एक पतले डंठल की मदद से त्वचा से जुड़े रहते हैं, जिससे ये हिलते-डुलते या लटकते हुए दिखाई देते हैं।

यह ध्यान देने योग्य बात है कि स्किन टैग्स संक्रामक (contagious) नहीं होते, यानी ये एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में स्पर्श करने से नहीं फैलते।

स्किन टैग्स होने की सामान्य जगहें

स्किन टैग्स शरीर के उन हिस्सों में अधिक होते हैं जहां त्वचा की सिलवटें होती हैं और लगातार घर्षण (friction) होता रहता है। इनमें प्रमुख स्थान हैं:

  • गर्दन – विशेष रूप से गर्दन के पीछे और किनारों पर
  • बगल (Armpits) – पसीना और घर्षण के कारण
  • आंखों की पलकें – ऊपरी और निचली पलकों पर
  • कमर और जांघों के बीच का हिस्सा (Groin area)
  • स्तनों के नीचे – खासकर महिलाओं में
  • पेट की सिलवटों में – अधिक वजन वाले व्यक्तियों में

स्किन टैग्स होने के कारण

स्किन टैग्स होने का सटीक कारण अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों ने कुछ प्रमुख कारकों की पहचान की है:

1. त्वचा का घर्षण (Skin Friction)

जब त्वचा बार-बार आपस में रगड़ खाती है—जैसे गर्दन की सिलवटों, बगल या जांघों में—तो वहां स्किन टैग्स बनने की संभावना बढ़ जाती है।

2. आनुवंशिकता (Genetics)

यदि परिवार में माता-पिता या दादा-दादी को स्किन टैग्स की समस्या रही है, तो संतानों में भी इनके होने की संभावना अधिक होती है।

3. मोटापा (Obesity)

अधिक वजन वाले व्यक्तियों में त्वचा की सिलवटें अधिक होती हैं, जिससे घर्षण बढ़ता है और स्किन टैग्स बनने का खतरा बढ़ जाता है।

4. गर्भावस्था (Pregnancy)

गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव और वजन बढ़ने के कारण कई महिलाओं में स्किन टैग्स विकसित हो जाते हैं। आमतौर पर ये प्रसव के बाद अपने आप कम हो सकते हैं या बने रह सकते हैं।

5. मधुमेह और इंसुलिन प्रतिरोध (Diabetes and Insulin Resistance)

शोध बताते हैं कि टाइप-2 मधुमेह और इंसुलिन प्रतिरोध वाले व्यक्तियों में स्किन टैग्स होने की दर अधिक होती है। यह शरीर में इंसुलिन के स्तर के असंतुलन से जुड़ा हो सकता है।

6. उम्र बढ़ना

उम्र के साथ-साथ त्वचा की लचक कम होती जाती है, जिससे स्किन टैग्स बनने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। यह समस्या आमतौर पर 40 से 60 वर्ष की आयु के बीच अधिक देखी जाती है।

7. हार्मोनल असंतुलन

कुछ मामलों में हार्मोन असंतुलन, जैसे कि पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS), भी स्किन टैग्स के विकास में भूमिका निभा सकता है।

8. ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV)

कुछ अध्ययनों में यह सुझाव दिया गया है कि निम्न-स्तरीय HPV संक्रमण भी स्किन टैग्स के निर्माण में योगदान दे सकता है, हालांकि इस पर अभी और शोध की आवश्यकता है।

स्किन टैग्स के लक्षण

स्किन टैग्स की पहचान करना अपेक्षाकृत आसान है। इनके सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं:

  • त्वचा से लटकता हुआ छोटा, मुलायम उभार
  • मांस के रंग का या हल्का भूरा रंग
  • दर्द रहित (जब तक इसे रगड़ा या मरोड़ा न जाए)
  • त्वचा की सिलवटों में या जहां कपड़े रगड़ते हैं, वहां अधिक पाए जाना
  • आकार में छोटा, लेकिन कभी-कभी समय के साथ बढ़ सकता है

यदि किसी उभार का रंग असामान्य हो, उसमें से खून बहे, वह तेजी से बढ़े, या उसमें दर्द हो, तो यह स्किन टैग नहीं बल्कि किसी अन्य त्वचा समस्या का संकेत हो सकता है, और ऐसी स्थिति में डॉक्टर से परामर्श आवश्यक है।

स्किन टैग्स और अन्य त्वचा समस्याओं में अंतर

स्किन टैग्स को कभी-कभी मस्सों (warts) या तिल (moles) से भ्रमित किया जा सकता है। इनमें मुख्य अंतर यह है:

  • मस्से (Warts): HPV वायरस के कारण होते हैं, इनकी सतह खुरदरी होती है और ये त्वचा से जुड़े हुए (सपाट) होते हैं, न कि लटके हुए।
  • तिल (Moles): ये त्वचा में मेलानोसाइट कोशिकाओं के जमाव से बनते हैं, आमतौर पर सपाट या थोड़े उभरे होते हैं और रंग में गहरे हो सकते हैं।
  • स्किन टैग्स: ये डंठल के सहारे लटके होते हैं और सामान्यतः त्वचा के रंग के समान होते हैं।

सटीक निदान के लिए त्वचा विशेषज्ञ (Dermatologist) से जांच करवाना सबसे उचित तरीका है।

स्किन टैग्स का निदान

अधिकतर मामलों में डॉक्टर केवल शारीरिक जांच (visual examination) से ही स्किन टैग की पहचान कर लेते हैं। यदि उभार का आकार, रंग या बनावट असामान्य लगे, तो डॉक्टर बायोप्सी (biopsy) की सलाह दे सकते हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि यह कोई गंभीर त्वचा समस्या तो नहीं है।

स्किन टैग्स हटाने के उपचार

चूंकि स्किन टैग्स हानिरहित होते हैं, इसलिए इन्हें हटाना चिकित्सकीय रूप से अनिवार्य नहीं है। लेकिन यदि ये असुविधा पैदा करें, कपड़ों में उलझें, या कॉस्मेटिक कारणों से व्यक्ति इन्हें हटवाना चाहे, तो निम्नलिखित तरीके उपलब्ध हैं:

1. क्रायोथेरेपी (Cryotherapy)

इस विधि में तरल नाइट्रोजन का उपयोग करके स्किन टैग को जमाया जाता है, जिससे वह सूखकर अपने आप गिर जाता है।

2. इलेक्ट्रोकॉटरी (Electrocautery)

इसमें बिजली की सहायता से हल्की गर्मी उत्पन्न कर स्किन टैग को जलाकर हटाया जाता है।

3. लिगेशन (Ligation)

इस तकनीक में स्किन टैग के डंठल के आधार पर एक धागा या रिंग बांध दी जाती है, जिससे रक्त प्रवाह रुक जाता है और टैग समय के साथ अपने आप गिर जाता है।

4. सर्जिकल कटाई (Excision)

डॉक्टर एक तेज, कीटाणुरहित उपकरण (जैसे सर्जिकल कैंची या स्केलपेल) से टैग को सीधे काट देते हैं। यह विशेष रूप से बड़े आकार के स्किन टैग्स के लिए प्रभावी है।

5. लेजर उपचार (Laser Treatment)

लेजर तकनीक से टैग को सटीकता के साथ हटाया जाता है, इसमें रक्तस्राव की संभावना कम होती है।

महत्वपूर्ण चेतावनी: घर पर स्वयं स्किन टैग को काटने, बांधने या खींचने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इससे संक्रमण, अत्यधिक रक्तस्राव या घाव के निशान (scarring) होने का खतरा रहता है। विशेष रूप से आंखों के आसपास या संवेदनशील क्षेत्रों में स्किन टैग्स के लिए हमेशा किसी योग्य त्वचा विशेषज्ञ से ही उपचार करवाना चाहिए।

घरेलू उपाय: कितने कारगर?

इंटरनेट पर सेब के सिरके (apple cider vinegar), टी ट्री ऑयल, लहसुन और आयोडीन जैसे कई घरेलू नुस्खे स्किन टैग हटाने के लिए बताए जाते हैं। हालांकि, इन तरीकों की प्रभावशीलता के लिए ठोस वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं, और कुछ मामलों में ये त्वचा में जलन या एलर्जी पैदा कर सकते हैं। इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को आजमाने से पहले त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

स्किन टैग्स से बचाव के उपाय

हालांकि स्किन टैग्स को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, खासकर यदि यह आनुवंशिक कारणों से हो, फिर भी कुछ सावधानियां इनके होने की संभावना को कम कर सकती हैं:

  • स्वस्थ वजन बनाए रखें: नियमित व्यायाम और संतुलित आहार से मोटापा नियंत्रित रहता है, जिससे त्वचा की सिलवटों में घर्षण कम होता है।
  • ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें: तंग कपड़े और गहने त्वचा पर लगातार घर्षण पैदा करते हैं।
  • त्वचा को सूखा और साफ रखें: पसीने वाले क्षेत्रों को नियमित रूप से साफ और सूखा रखने से घर्षण जनित समस्याएं कम होती हैं।
  • मधुमेह पर नियंत्रण रखें: यदि आपको डायबिटीज है, तो रक्त शर्करा को नियंत्रण में रखना त्वचा संबंधी समस्याओं को कम करने में सहायक हो सकता है।
  • नियमित त्वचा जांच: यदि परिवार में स्किन टैग्स का इतिहास रहा है, तो समय-समय पर त्वचा की जांच करवाते रहें।

डॉक्टर से कब मिलें?

निम्नलिखित स्थितियों में त्वचा विशेषज्ञ से संपर्क करना आवश्यक है:

  • यदि उभार का रंग, आकार या बनावट अचानक बदलने लगे
  • यदि उसमें दर्द, खुजली या रक्तस्राव हो
  • यदि आप निश्चित नहीं हैं कि यह स्किन टैग है या कोई अन्य त्वचा समस्या
  • यदि टैग बार-बार कपड़ों या गहनों में फंसकर असुविधा पैदा करे
  • यदि आप इसे कॉस्मेटिक कारणों से हटवाना चाहते हैं

निष्कर्ष

स्किन टैग्स एक बेहद सामान्य और अधिकतर मामलों में पूरी तरह हानिरहित त्वचा समस्या है, जो उम्र बढ़ने, मोटापे, आनुवंशिकता और हार्मोनल बदलावों जैसे कारकों से जुड़ी होती है। यद्यपि इनसे स्वास्थ्य को कोई गंभीर खतरा नहीं होता, फिर भी कॉस्मेटिक असुविधा या शारीरिक परेशानी की स्थिति में इन्हें चिकित्सकीय देखरेख में सुरक्षित रूप से हटवाया जा सकता है। घर पर स्वयं इलाज करने की कोशिश से बचना चाहिए, क्योंकि इससे संक्रमण या अन्य जटिलताएं हो सकती हैं। यदि आपको अपनी त्वचा पर किसी भी असामान्य उभार को लेकर संदेह हो, तो सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद कदम यही है कि आप किसी योग्य त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लें।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *