गोल्फर एल्बो और टेनिस एल्बो के बीच का क्लिनिकल अंतर और दोनों का इलाज
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गोल्फर एल्बो बनाम टेनिस एल्बो: क्लिनिकल अंतर और उपचार

परिचय

कोहनी (एल्बो) में दर्द एक बेहद आम समस्या है जो न सिर्फ खिलाड़ियों बल्कि आम लोगों को भी परेशान करती है — खासकर वे लोग जो बार-बार हाथ और कलाई की गति दोहराते हैं, जैसे टाइपिस्ट, बढ़ई, प्लंबर, गृहिणियां या मैनुअल मजदूर। इनमें से दो सबसे आम स्थितियां हैं — टेनिस एल्बो (लेटरल एपिकॉन्डिलाइटिस) और गोल्फर एल्बो (मीडियल एपिकॉन्डिलाइटिस)। दोनों नाम खेलों से जुड़े हैं, लेकिन असल में ये किसी भी व्यक्ति को हो सकते हैं जिसका काम बार-बार कलाई और हाथ की मांसपेशियों पर जोर डालता हो। दोनों स्थितियां देखने में एक जैसी लग सकती हैं क्योंकि दोनों में कोहनी के आसपास दर्द होता है, लेकिन इनके कारण, स्थान और उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण अंतर हैं। इस लेख में हम इन दोनों के बीच क्लिनिकल अंतर, निदान की विधियां और उपचार के तरीकों को विस्तार से समझेंगे।

एल्बो की बुनियादी संरचना

कोहनी की हड्डी (ह्यूमरस) के निचले सिरे पर दो उभार होते हैं — एक बाहरी तरफ (लेटरल एपिकॉन्डाइल) और एक अंदरूनी तरफ (मीडियल एपिकॉन्डाइल)। इन दोनों उभारों से अलग-अलग मांसपेशियों के टेंडन (कण्डरा) जुड़े होते हैं:

  • लेटरल एपिकॉन्डाइल से कलाई को पीछे की ओर मोड़ने वाली (एक्सटेंसर) मांसपेशियों के टेंडन जुड़े होते हैं।
  • मीडियल एपिकॉन्डाइल से कलाई को आगे की ओर मोड़ने वाली (फ्लेक्सर) मांसपेशियों के टेंडन जुड़े होते हैं।

जब इन टेंडनों में बार-बार खिंचाव या सूक्ष्म चोट (माइक्रोट्रॉमा) होती है, तो टेंडिनोसिस या टेंडिनाइटिस विकसित होता है — यही टेनिस एल्बो और गोल्फर एल्बो का मूल कारण है।

टेनिस एल्बो (लेटरल एपिकॉन्डिलाइटिस) क्या है?

टेनिस एल्बो में एक्सटेंसर कार्पी रेडियलिस ब्रेविस (ECRB) नामक मांसपेशी का टेंडन सबसे ज्यादा प्रभावित होता है, जो कोहनी की बाहरी हड्डी (लेटरल एपिकॉन्डाइल) से जुड़ा होता है। यह उन गतिविधियों से होता है जिनमें कलाई को बार-बार पीछे की ओर मोड़ना या पकड़ बनाना पड़ता है।

सामान्य कारण:

  • टेनिस या बैडमिंटन जैसे रैकेट खेल, खासकर गलत बैकहैंड तकनीक से
  • पेंच कसना, पेंटिंग करना, या स्क्रूड्राइवर का बार-बार इस्तेमाल
  • कंप्यूटर पर लगातार टाइपिंग और माउस का उपयोग
  • भारी सामान बार-बार उठाना या पकड़ना

लक्षण:

  • कोहनी के बाहरी हिस्से में दर्द, जो कभी-कभी बांह के नीचे कलाई तक फैल सकता है
  • चीज़ पकड़ने में कमजोरी महसूस होना, जैसे कप उठाना या हाथ मिलाना
  • कलाई को पीछे की ओर मोड़ने या मुट्ठी बंद करने पर दर्द बढ़ना
  • सुबह उठने पर जकड़न महसूस होना

गोल्फर एल्बो (मीडियल एपिकॉन्डिलाइटिस) क्या है?

गोल्फर एल्बो में फ्लेक्सर-प्रोनेटर ग्रुप की मांसपेशियों का टेंडन प्रभावित होता है, जो कोहनी की अंदरूनी हड्डी (मीडियल एपिकॉन्डाइल) से जुड़ा होता है। यह उन गतिविधियों से होता है जिनमें कलाई को बार-बार आगे की ओर मोड़ना पड़ता है।

सामान्य कारण:

  • गोल्फ खेलना, खासकर गलत स्विंग तकनीक से
  • वजन उठाना, खासकर बाइसेप कर्ल या भारी सामान बार-बार उठाना
  • बढ़ई का काम, हथौड़ा चलाना
  • फेंकने वाले खेल जैसे बेसबॉल पिचिंग
  • टाइपिंग और लगातार कीबोर्ड का उपयोग भी कुछ मामलों में जिम्मेदार होता है

लक्षण:

  • कोहनी के अंदरूनी हिस्से में दर्द, जो कलाई और अनामिका-कनिष्ठा उंगली की ओर फैल सकता है
  • कलाई को आगे मोड़ने या मुट्ठी बंद करने पर दर्द बढ़ना
  • कभी-कभी हाथ में झनझनाहट या सुन्नपन (क्योंकि पास की उलनार नर्व प्रभावित हो सकती है)
  • पकड़ की ताकत में कमी

क्लिनिकल अंतर — मुख्य बिंदु

पहलूटेनिस एल्बोगोल्फर एल्बो
चिकित्सीय नामलेटरल एपिकॉन्डिलाइटिसमीडियल एपिकॉन्डिलाइटिस
दर्द का स्थानकोहनी का बाहरी हिस्साकोहनी का अंदरूनी हिस्सा
प्रभावित मांसपेशी समूहएक्सटेंसर (कलाई पीछे मोड़ने वाली)फ्लेक्सर-प्रोनेटर (कलाई आगे मोड़ने वाली)
दर्द बढ़ने का कारणकलाई पीछे मोड़ना, वस्तु पकड़नाकलाई आगे मोड़ना, मुट्ठी बंद करना
नर्व जुड़ावआमतौर पर नहींकभी-कभी उलनार नर्व प्रभावित
आम प्रचलनज्यादा आम (लगभग 5-7 गुना ज्यादा)अपेक्षाकृत कम आम
सामान्य आयु वर्ग30-50 वर्ष30-50 वर्ष

निदान (डायग्नोसिस)

डॉक्टर आमतौर पर मरीज़ के इतिहास और शारीरिक परीक्षण से ही निदान कर लेते हैं:

  1. कोज़न टेस्ट (Cozen’s Test): कलाई को प्रतिरोध के साथ पीछे मोड़वाने पर दर्द होना — टेनिस एल्बो का संकेत।
  2. मिल टेस्ट (Mill’s Test): कोहनी सीधी रखते हुए कलाई को नीचे मोड़ने पर दर्द — टेनिस एल्बो की पुष्टि करता है।
  3. गोल्फर एल्बो टेस्ट: कलाई को प्रतिरोध के साथ आगे मोड़वाने पर मीडियल हिस्से में दर्द होना।
  4. पैल्पेशन: एपिकॉन्डाइल पर सीधे दबाव डालने पर कोमलता (टेंडरनेस) महसूस होना।

ज्यादातर मामलों में एक्स-रे या MRI की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें, फ्रैक्चर का शक हो, या नर्व से जुड़े लक्षण दिखें, तो अल्ट्रासाउंड या MRI कराई जा सकती है।

उपचार — दोनों स्थितियों के लिए

अच्छी बात यह है कि टेनिस एल्बो और गोल्फर एल्बो दोनों का उपचार सिद्धांत लगभग एक जैसा है, बस प्रभावित मांसपेशी समूह अलग होने के कारण एक्सरसाइज़ की दिशा बदल जाती है।

1. शुरुआती चरण (Acute Phase)

  • आराम: दर्द बढ़ाने वाली गतिविधियों को कुछ समय के लिए रोकना, लेकिन पूरी तरह हाथ को स्थिर न रखें क्योंकि इससे जकड़न बढ़ सकती है।
  • बर्फ की सिकाई: दिन में 2-3 बार, 15-20 मिनट तक बर्फ लगाने से सूजन और दर्द कम होता है।
  • दर्द निवारक दवाएं: डॉक्टर की सलाह पर पेरासिटामोल या NSAIDs (जैसे इबुप्रोफेन) का उपयोग किया जा सकता है।
  • ब्रेस या स्ट्रैप: काउंटरफोर्स ब्रेस (एल्बो के ठीक नीचे बांधा जाने वाला बैंड) टेंडन पर पड़ने वाले तनाव को कम करता है।

2. फिजियोथेरेपी और एक्सरसाइज़

फिजियोथेरेपी इस समस्या के इलाज की रीढ़ मानी जाती है:

  • स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़: टेनिस एल्बो में कलाई एक्सटेंसर को स्ट्रेच किया जाता है, जबकि गोल्फर एल्बो में फ्लेक्सर मांसपेशियों को।
  • इसेंट्रिक स्ट्रेंथनिंग: धीरे-धीरे भार बढ़ाते हुए मांसपेशी को नियंत्रित तरीके से खींचने वाली एक्सरसाइज़ टेंडन की मरम्मत में सबसे प्रभावी मानी जाती है।
  • अल्ट्रासाउंड थेरेपी और मसाज: कुछ फिजियोथेरेपिस्ट डीप टिश्यू मसाज और थेराप्यूटिक अल्ट्रासाउंड का भी उपयोग करते हैं।

3. यदि लक्षण बने रहें (Persistent Cases)

अगर 6-8 हफ्तों की कंज़र्वेटिव थेरेपी के बाद भी आराम न मिले, तो निम्न विकल्प अपनाए जा सकते हैं:

  • कॉर्टिकोस्टेरॉइड इंजेक्शन: तुरंत राहत देता है, लेकिन बार-बार उपयोग से टेंडन कमजोर हो सकता है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही दिया जाता है।
  • प्लेटलेट-रिच प्लाज़्मा (PRP) थेरेपी: मरीज़ के अपने खून से निकाले गए प्लेटलेट्स को प्रभावित जगह पर इंजेक्ट किया जाता है, जो टेंडन की प्राकृतिक मरम्मत को बढ़ावा देता है।
  • शॉकवेव थेरेपी (ESWT): ध्वनि तरंगों के माध्यम से टेंडन में रक्त प्रवाह और उपचार प्रक्रिया को उत्तेजित किया जाता है।

4. सर्जरी (अंतिम विकल्प)

यदि 6-12 महीने तक सभी गैर-सर्जिकल उपाय अपनाने के बावजूद आराम न मिले, तभी सर्जरी पर विचार किया जाता है। इसमें क्षतिग्रस्त टेंडन ऊतक को हटाकर स्वस्थ टेंडन को दोबारा हड्डी से जोड़ा जाता है। यह आमतौर पर आर्थोस्कोपिक (कम चीरे वाली) विधि से की जाती है और सफलता दर काफी अच्छी होती है।

बचाव के उपाय

  • कार्य या खेल शुरू करने से पहले उचित वार्मअप और स्ट्रेचिंग करें
  • सही तकनीक और उपकरण (जैसे सही ग्रिप साइज़ का रैकेट) का उपयोग करें
  • बार-बार दोहराई जाने वाली गतिविधियों के बीच नियमित ब्रेक लें
  • कलाई और फोरआर्म की मांसपेशियों को नियमित रूप से मजबूत बनाने वाली एक्सरसाइज़ करें
  • लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करने वालों को अपनी वर्कस्टेशन एर्गोनॉमिक्स सुधारनी चाहिए

निष्कर्ष

टेनिस एल्बो और गोल्फर एल्बो दोनों ही दोहराव वाली गतिविधियों से जुड़ी सामान्य टेंडन समस्याएं हैं, लेकिन इनका मुख्य अंतर दर्द के स्थान और प्रभावित मांसपेशी समूह में है — टेनिस एल्बो में बाहरी हिस्सा और एक्सटेंसर मांसपेशियां प्रभावित होती हैं, जबकि गोल्फर एल्बो में अंदरूनी हिस्सा और फ्लेक्सर मांसपेशियां। दोनों का उपचार समान सिद्धांतों पर आधारित है — आराम, बर्फ, फिजियोथेरेपी और जरूरत पड़ने पर इंजेक्शन या सर्जरी। सही समय पर पहचान और उपचार से अधिकांश मरीज़ बिना सर्जरी के भी पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। यदि कोहनी में दर्द लंबे समय तक बना रहे, तो किसी ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेना सबसे उचित कदम है।

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