डायबिटिक फुट (Diabetic Foot) की देखभाल: मरीजों के लिए विशेष फुटवियर गाइड
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डायबिटिक फुट (Diabetic Foot) की देखभाल: मरीजों के लिए विशेष फुटवियर गाइड

प्रस्तावना

डायबिटीज़ (मधुमेह) एक ऐसी बीमारी है जो शरीर के लगभग हर अंग को प्रभावित करती है, और पैर इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले अंगों में से एक हैं। लंबे समय तक अनियंत्रित रहने वाला ब्लड शुगर नसों (nerves) और रक्त वाहिकाओं (blood vessels) को नुकसान पहुँचाता है, जिससे पैरों में सुन्नपन, संवेदना की कमी और घाव भरने की क्षमता कमज़ोर हो जाती है। इसी स्थिति को “डायबिटिक फुट” कहा जाता है। सही फुटवियर का चुनाव इस समस्या को रोकने और गंभीर जटिलताओं से बचने का सबसे प्रभावी और सरल तरीका है। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि डायबिटिक मरीज़ों को किस तरह के जूते-चप्पल पहनने चाहिए, किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और किन गलतियों से बचना चाहिए।

डायबिटिक फुट क्यों होता है?

मधुमेह के मरीज़ों में दो प्रमुख समस्याएं पैरों को प्रभावित करती हैं:

1. न्यूरोपैथी (Neuropathy): लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से पैरों की नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इससे मरीज़ को दर्द, गर्मी, ठंडक या चोट का एहसास कम या बिल्कुल नहीं होता। परिणामस्वरूप, अगर जूते में कोई कील चुभ रही हो या पैर में छाला बन रहा हो, तो मरीज़ को पता ही नहीं चलता।

2. पेरिफेरल आर्टरी डिज़ीज़ (PAD): डायबिटीज़ के कारण पैरों तक खून पहुँचाने वाली धमनियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे रक्त संचार कम हो जाता है। इससे घाव भरने में बहुत समय लगता है और संक्रमण (infection) का खतरा बढ़ जाता है।

इन दोनों कारणों से एक छोटी सी खरोंच या छाला भी बड़ा अल्सर (ulcer) बन सकता है, और गंभीर मामलों में यह पैर काटने (amputation) तक की नौबत ला सकता है। इसीलिए सही फुटवियर पहनना केवल आराम की बात नहीं, बल्कि जीवन-रक्षक कदम है।

सही फुटवियर क्यों ज़रूरी है?

आम इंसान के लिए जूते सिर्फ फैशन या आराम का साधन होते हैं, लेकिन डायबिटिक मरीज़ों के लिए यह एक चिकित्सीय आवश्यकता है। एक गलत नाप का, तंग या रगड़ने वाला जूता पैर में छाला बना सकता है, और चूंकि मरीज़ को दर्द महसूस नहीं होता, यह छाला बिना इलाज के संक्रमित हो सकता है। शोध बताते हैं कि डायबिटिक फुट अल्सर के अधिकांश मामलों की शुरुआत गलत जूतों से होने वाली मामूली चोट से होती है। इसलिए सही फुटवियर का चयन रोकथाम की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।

डायबिटिक फुटवियर की मुख्य विशेषताएं

1. पर्याप्त चौड़ाई और गहराई (Extra Depth and Width)

डायबिटिक जूतों में पैर की उंगलियों के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए ताकि वे दबें नहीं। तंग जूते उंगलियों पर दबाव डालते हैं जिससे कॉर्न (corn), कैलस (callus) या छाले बन सकते हैं। जूते की चौड़ाई और गहराई सामान्य जूतों से थोड़ी ज़्यादा होनी चाहिए, खासकर अगर पैर में सूजन (edema) की समस्या हो।

2. सीमलेस इंटीरियर (Seamless Interior)

जूते के अंदर कोई सीवन (seam), उभरा हुआ धागा या खुरदरा हिस्सा नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह त्वचा से लगातार रगड़ खाकर घाव बना सकता है। अच्छी क्वालिटी के डायबिटिक जूतों में अंदर की लाइनिंग बिल्कुल चिकनी होती है।

3. कुशनयुक्त और मोटा सोल (Cushioned Sole)

सोल में अच्छी कुशनिंग होनी चाहिए ताकि चलते समय पैर के तलवे पर पड़ने वाला दबाव समान रूप से बंटे। मेमोरी फोम या माइक्रोसेल्युलर रबर से बने इनसोल इसके लिए आदर्श माने जाते हैं। यह एड़ी और पंजे पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम करता है।

4. एडजस्टेबल फिटिंग (Adjustable Fastening)

वेल्क्रो स्ट्रैप या फीते वाले जूते बेहतर होते हैं क्योंकि इनसे फिटिंग को दिन में सूजन बढ़ने-घटने के अनुसार समायोजित किया जा सकता है। स्लिप-ऑन जूतों में यह सुविधा नहीं होती और वे या तो बहुत ढीले या बहुत तंग हो सकते हैं।

5. सांस लेने योग्य सामग्री (Breathable Material)

जूते चमड़े, कैनवास या मेश जैसी सांस लेने योग्य सामग्री से बने होने चाहिए ताकि पैरों में नमी और पसीना जमा न हो। नमी वाला वातावरण फंगल इन्फेक्शन और त्वचा के टूटने का खतरा बढ़ाता है।

6. मज़बूत और सुरक्षित ऊपरी हिस्सा (Protective Toe Box)

जूते का अगला हिस्सा (toe box) थोड़ा गोल और सुरक्षित होना चाहिए ताकि चोट लगने की संभावना कम हो। नुकीले या पॉइंटेड जूतों से पूरी तरह बचना चाहिए।

7. कम या बिना एड़ी वाले जूते (Low or No Heel)

ऊँची एड़ी वाले जूते पैर के अगले हिस्से पर असमान दबाव डालते हैं, जिससे अल्सर बनने का खतरा बढ़ता है। एड़ी की ऊँचाई एक इंच से कम रखनी चाहिए।

जूते खरीदते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • शाम के समय जूते खरीदें: दिन भर चलने के बाद पैरों में हल्की सूजन आ जाती है, इसलिए शाम को खरीदे गए जूते बेहतर फिट होते हैं।
  • दोनों पैरों को मापें: अक्सर दोनों पैरों के आकार में मामूली अंतर होता है। हमेशा बड़े पैर के अनुसार जूता चुनें।
  • मोज़े पहनकर ट्रायल करें: जिस तरह के मोज़े रोज़ाना पहनने हों, उन्हें पहनकर ही जूते ट्राई करें।
  • खड़े होकर जांच करें: बैठकर नहीं, बल्कि खड़े होकर और कुछ कदम चलकर देखें कि जूता आरामदायक है या नहीं।
  • अंदर हाथ डालकर जांचें: जूता पहनने से पहले अंदर हाथ डालकर देखें कि कोई सीवन, कील या खुरदरापन तो नहीं है।

डायबिटिक मोज़े (Socks) का महत्व

सही जूतों के साथ-साथ सही मोज़े पहनना भी उतना ही ज़रूरी है:

  • सीमलेस और पैडेड मोज़े चुनें जो नमी सोखने वाली सामग्री (moisture-wicking fabric) से बने हों
  • कसाव वाले इलास्टिक बैंड से बचें, क्योंकि यह रक्त संचार को बाधित कर सकता है
  • हल्के रंग के मोज़े पहनें ताकि खून या स्राव (discharge) आसानी से दिखाई दे जाए
  • हर दिन मोज़े बदलें और गीले मोज़ों में बिल्कुल न रहें

रोज़ाना पैरों की जांच की आदत

केवल सही जूते पहनना काफी नहीं है; हर दिन पैरों की जांच करना भी उतना ही ज़रूरी है:

  • रोज़ रात को सोने से पहले पैरों को अच्छी रोशनी में या शीशे की मदद से देखें
  • तलवों, उंगलियों के बीच और एड़ी में लालिमा, छाले, कट या सूजन की जांच करें
  • नाखूनों को सीधा काटें, कोनों को गोल न करें ताकि इनग्रोन नेल (ingrown nail) न बने
  • पैर धोने के बाद अच्छी तरह सुखाएं, खासकर उंगलियों के बीच का हिस्सा
  • रूखी त्वचा पर मॉइस्चराइज़र लगाएं, लेकिन उंगलियों के बीच न लगाएं

किन गलतियों से बचें

  1. नंगे पैर चलना: घर के अंदर भी नंगे पैर न चलें, क्योंकि छोटी सी चोट भी बड़ी समस्या बन सकती है।
  2. तंग या पुराने जूते पहनना: घिसे हुए या तंग जूते पैरों पर असमान दबाव डालते हैं।
  3. खुद से कॉर्न या कैलस काटना: इसके लिए हमेशा पोडियाट्रिस्ट (foot specialist) की सलाह लें।
  4. गर्म पानी में पैर भिगोना: संवेदना कम होने के कारण जलने का पता नहीं चल पाता।
  5. बिना जांचे नए जूते पूरे दिन पहनना: नए जूतों को शुरुआत में सिर्फ एक-दो घंटे पहनें और पैरों की जांच करते रहें।

डॉक्टर से कब मिलें

अगर पैरों में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

  • कोई भी घाव जो एक-दो दिन में ठीक न हो
  • लालिमा, सूजन या गर्माहट
  • पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन या जलन का बढ़ना
  • नाखूनों या त्वचा के रंग में बदलाव
  • कोई भी दुर्गंध या स्राव

नियमित रूप से (कम से कम साल में एक बार) पोडियाट्रिस्ट से पैरों की जांच करवाना डायबिटिक मरीज़ों के लिए अनिवार्य माना जाता है।

निष्कर्ष

डायबिटिक फुट की देखभाल में सही फुटवियर का चयन एक छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण कदम है। पर्याप्त चौड़ाई, कुशनयुक्त सोल, सीमलेस इंटीरियर और सांस लेने योग्य सामग्री वाले जूते पैरों को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसके साथ ही सही मोज़े, रोज़ाना पैरों की जांच और स्वच्छता की आदतें अपनाकर मरीज़ गंभीर जटिलताओं से बच सकते हैं। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि यह जानकारी सामान्य शिक्षा के उद्देश्य से दी गई है और किसी विशेषज्ञ चिकित्सक या पोडियाट्रिस्ट की सलाह का विकल्प नहीं है। हर मरीज़ की स्थिति अलग होती है, इसलिए व्यक्तिगत सलाह के लिए डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें।

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