स्क्वैट्स (Squats) करते समय घुटनों को अंदर की तरफ झुकने (Knee Valgus) से कैसे रोकें?
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स्क्वैट्स करते समय घुटनों को अंदर की तरफ झुकने (Knee Valgus) से कैसे रोकें?

स्क्वैट एक बेहद प्रभावी व्यायाम है, जो जांघों, ग्लूट्स, कोर, कूल्हों और पैरों की ताकत बढ़ाने में मदद करता है। लेकिन स्क्वैट करते समय कई लोगों के घुटने नीचे जाते हुए या ऊपर आते समय अंदर की ओर गिरने लगते हैं। इस स्थिति को आम भाषा में घुटनों का अंदर झुकना और तकनीकी भाषा में नी वेल्गस (Knee Valgus) कहा जाता है।

हल्का और क्षणिक नी वेल्गस हर व्यक्ति में हमेशा खतरनाक नहीं होता, क्योंकि शरीर की संरचना, कूल्हों की चौड़ाई और पैर की बनावट अलग-अलग होती है। लेकिन यदि घुटने बार-बार बहुत अधिक अंदर जा रहे हैं, खासकर भारी वजन उठाते समय, दर्द हो रहा है या घुटने का नियंत्रण खो रहा है, तो इसे सुधारना जरूरी है। लंबे समय तक गलत पैटर्न के साथ स्क्वैट करने से घुटने, कूल्हे, टखने या पैरों पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।

इस लेख में जानें कि स्क्वैट के दौरान घुटनों को अंदर गिरने से कैसे रोकें, इसके मुख्य कारण क्या हैं और कौन-से अभ्यास आपकी तकनीक सुधार सकते हैं।


Table of Contents

नी वेल्गस क्या है?

स्क्वैट में सामान्यतः घुटनों की दिशा पैर की उंगलियों की दिशा के लगभग समान होनी चाहिए। अधिकतर लोगों के लिए इसका अर्थ है कि घुटना दूसरे या तीसरे पंजे (toe) की दिशा में आगे बढ़े।

जब स्क्वैट के दौरान घुटने पैर के अंगूठे की तरफ अंदर की ओर गिर जाते हैं, जबकि पैर बाहर या सामने की दिशा में रहते हैं, तो इसे नी वेल्गस कहा जाता है। यह स्थिति अक्सर स्क्वैट के सबसे नीचे वाले हिस्से में या ऊपर उठते समय दिखाई देती है।

ध्यान रखें: “घुटना कभी अंगूठे के आगे नहीं जाना चाहिए” जैसी पुरानी सलाह पूरी तरह सही नहीं है। घुटने का पंजों के आगे जाना कई लोगों के लिए सामान्य और सुरक्षित हो सकता है। असली मुद्दा यह है कि घुटना नियंत्रण के साथ चल रहा है या नहीं और क्या वह बार-बार अंदर ढह रहा है।


स्क्वैट में घुटने अंदर क्यों गिरते हैं?

नी वेल्गस का कारण केवल कमजोर घुटने नहीं होते। अक्सर यह पैर, टखने, कूल्हे, कोर और तकनीक से जुड़ी कई समस्याओं का परिणाम होता है।

1. ग्लूट्स और हिप मसल्स की कमजोरी

ग्लूटस मेडियस (Gluteus Medius) और कूल्हे के बाहरी हिस्से की मांसपेशियां पैर की दिशा को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। यदि ये कमजोर हैं, तो स्क्वैट करते समय जांघ अंदर की ओर घूम सकती है और घुटने भी अंदर गिर सकते हैं।

विशेष रूप से लंबे समय तक बैठने वाले लोगों में ग्लूट मसल्स सक्रिय नहीं रहतीं, जिससे यह समस्या बढ़ सकती है।

2. पैरों के आर्च का गिरना

यदि स्क्वैट के दौरान पैर का आर्च अंदर की ओर बैठ जाता है, जिसे “फुट प्रोनशन” कहा जाता है, तो घुटना भी अंदर की ओर खिंच सकता है। यह अक्सर फ्लैट फीट, कमजोर पैरों की मांसपेशियों या गलत दबाव वितरण के कारण होता है।

3. टखने की गतिशीलता कम होना

स्क्वैट की गहराई तक जाने के लिए टखने में पर्याप्त डॉर्सीफ्लेक्शन (Dorsiflexion) यानी घुटने को आगे बढ़ाने की क्षमता चाहिए। यदि टखने बहुत टाइट हैं, तो शरीर संतुलन बनाने के लिए पैर के आर्च को गिरा सकता है या घुटनों को अंदर मोड़ सकता है।

4. बहुत भारी वजन उठाना

कई लोग अपनी तकनीक मजबूत होने से पहले ही भारी बारबेल, डंबल या केटलबेल से स्क्वैट करने लगते हैं। वजन बढ़ने पर शरीर सबसे आसान रास्ता ढूंढता है और घुटने अंदर गिरने लगते हैं।

यदि बॉडीवेट स्क्वैट में नियंत्रण सही है, लेकिन बारबेल स्क्वैट में घुटने अंदर आते हैं, तो संभव है कि वजन अभी आपकी क्षमता से ज्यादा हो।

5. गलत स्टांस या पैर की दिशा

बहुत संकरा स्टांस, बहुत चौड़ा स्टांस या पंजों का असुविधाजनक कोण भी घुटनों की दिशा को प्रभावित कर सकता है। हर व्यक्ति का आदर्श स्क्वैट स्टांस अलग हो सकता है, क्योंकि कूल्हों की बनावट और गतिशीलता अलग होती है।

6. कोर कंट्रोल की कमी

कमजोर या ढीला कोर शरीर को स्थिर रखने में असफल होता है। इससे स्क्वैट के दौरान धड़, कूल्हे और घुटनों का नियंत्रण खराब हो सकता है। विशेषकर नीचे जाने और ऊपर आते समय कोर की स्थिरता महत्वपूर्ण है।


घुटनों को अंदर गिरने से रोकने के व्यावहारिक तरीके

1. सही स्टांस चुनें

अपने पैरों को लगभग कंधों की चौड़ाई पर रखें। पंजों को हल्का बाहर की ओर रखें, आमतौर पर 10 से 30 डिग्री तक। इसके बाद स्क्वैट करके देखें कि किस स्थिति में आप सबसे सहज और स्थिर महसूस करते हैं।

बहुत से लोगों के लिए हल्के बाहर की ओर पंजे रखने से घुटनों को सही दिशा में ट्रैक करना आसान होता है। लेकिन पंजों को जरूरत से ज्यादा बाहर न घुमाएं, क्योंकि इससे भी नियंत्रण बिगड़ सकता है।

एक सरल नियम अपनाएं:

घुटनों की दिशा लगभग दूसरे या तीसरे पंजे की दिशा में रखें।


2. “घुटनों को बाहर धकेलें” क्यू का सही उपयोग करें

स्क्वैट के दौरान एक उपयोगी संकेत है:
“अपने घुटनों को हल्के से बाहर की ओर दबाएं।”

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि घुटनों को जबरदस्ती बहुत बाहर फैलाना है। उद्देश्य सिर्फ इतना है कि घुटने अंदर न गिरें और पंजों की दिशा में बने रहें।

आप यह भी सोच सकते हैं:

  • “फर्श को पैरों से अलग करने की कोशिश करें।”
  • “घुटनों को पंजों की लाइन में रखें।”
  • “जांघों को स्थिर और मजबूत रखें।”

यदि आप बहुत अधिक बाहर धकेलते हैं, तो पैर के बाहरी किनारे पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए संतुलित दबाव बनाए रखना जरूरी है।


3. पैरों का “ट्राइपॉड” बनाएं

स्क्वैट करते समय पूरा दबाव केवल एड़ी या केवल पंजों पर नहीं होना चाहिए। पैर के तीन बिंदुओं पर समान दबाव रखें:

  1. एड़ी
  2. बड़े अंगूठे के नीचे का हिस्सा
  3. छोटे अंगूठे के नीचे का हिस्सा

इसे फुट ट्राइपॉड कहा जाता है। इससे पैर का आर्च स्थिर रहता है और घुटनों को अंदर गिरने से रोकने में मदद मिलती है।

स्क्वैट शुरू करने से पहले अपने पैर को जमीन में “जड़” की तरह टिकाने की कोशिश करें। ध्यान रखें कि बड़े अंगूठे का आधार जमीन से न उठे। यदि पैर का अंदरूनी हिस्सा पूरी तरह उठ रहा है या आर्च गिर रहा है, तो घुटनों का नियंत्रण खराब हो सकता है।


4. वजन कम करें और तकनीक पहले सुधारें

यदि बारबेल, डंबल या मशीन स्क्वैट करते समय घुटने अंदर गिर रहे हैं, तो सबसे पहले वजन कम करें। सही फॉर्म के साथ हल्के वजन में किए गए स्क्वैट, गलत फॉर्म वाले भारी स्क्वैट से बेहतर होते हैं।

आप कुछ समय के लिए इन विकल्पों का उपयोग कर सकते हैं:

  • बॉडीवेट स्क्वैट
  • बॉक्स स्क्वैट
  • गोब्लेट स्क्वैट
  • सपोर्टेड स्क्वैट
  • TRX स्क्वैट
  • टेम्पो स्क्वैट

जब आप हर रेप में घुटनों की दिशा नियंत्रित कर सकें, तभी धीरे-धीरे वजन बढ़ाएं।


5. गोब्लेट स्क्वैट से शुरुआत करें

गोब्लेट स्क्वैट में डंबल या केटलबेल को छाती के सामने पकड़ा जाता है। यह शुरुआती लोगों के लिए बहुत उपयोगी स्क्वैट है क्योंकि सामने रखा वजन शरीर को संतुलित रखने और धड़ को सीधा रखने में मदद करता है।

गोब्लेट स्क्वैट करते समय:

  • वजन को छाती के पास रखें।
  • पैर मजबूती से जमीन पर टिकाएं।
  • नीचे जाते समय घुटनों को पंजों की दिशा में रखें।
  • पेट और कोर को कसकर रखें।
  • नीचे से ऊपर आते समय घुटनों को अंदर न गिरने दें।

धीमी गति से 8 से 12 रेप करें और हर रेप की गुणवत्ता पर ध्यान दें।


6. मिनी बैंड का प्रयोग करें

मिनी रेजिस्टेंस बैंड को घुटनों के थोड़ा ऊपर लगाकर स्क्वैट करना घुटनों के नियंत्रण की ट्रेनिंग में मदद कर सकता है। बैंड घुटनों को अंदर खींचता है, इसलिए आपको हल्के से बाहर की ओर दबाव बनाना पड़ता है।

यह अभ्यास आपको हिप मसल्स सक्रिय करना सिखाता है। हालांकि, बैंड को केवल सहारा नहीं बल्कि एक “फीडबैक टूल” समझें। लक्ष्य यह नहीं है कि आप केवल बैंड के साथ सही स्क्वैट करें; लक्ष्य यह है कि बिना बैंड के भी आपका नियंत्रण बेहतर हो।

मिनी बैंड स्क्वैट करते समय ध्यान रखें:

  • बैंड बहुत ज्यादा टाइट न हो।
  • घुटनों को जबरदस्ती बहुत बाहर न फैलाएं।
  • पैर का ट्राइपॉड दबाव बनाए रखें।
  • कम रेप से शुरू करें, जैसे 2–3 सेट में 10–15 रेप।

7. ग्लूट्स को मजबूत करें

मजबूत ग्लूट्स घुटनों और कूल्हों की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं। सप्ताह में 2 से 3 बार निम्नलिखित अभ्यास शामिल कर सकते हैं:

क्लैमशेल्स

एक करवट लेटकर घुटनों को मोड़ें और पैरों को साथ रखें। ऊपर वाले घुटने को नियंत्रित तरीके से खोलें। यह कूल्हे के बाहरी हिस्से की मांसपेशियों को सक्रिय करता है।

साइड-लाइंग लेग रेज़

करवट लेकर ऊपर वाले पैर को सीधा उठाएं। पैर को बहुत आगे या पीछे न ले जाएं; कूल्हे के सीध में रखें।

ग्लूट ब्रिज

पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ें और कूल्हों को ऊपर उठाएं। ऊपर जाकर ग्लूट्स को कसें, लेकिन कमर को जरूरत से ज्यादा न मोड़ें।

बैंडेड लेटरल वॉक

घुटनों के ऊपर या टखनों के पास बैंड लगाकर हल्के स्क्वैट की स्थिति में साइड में कदम चलें। घुटनों को पंजों की दिशा में रखें।

सिंगल-लेग ग्लूट ब्रिज

जब सामान्य ग्लूट ब्रिज आसान लगने लगे, तो एक पैर से ब्रिज करें। इससे हर पैर की अलग-अलग स्थिरता और ताकत बढ़ती है।


8. टखनों की गतिशीलता सुधारें

यदि आपकी एड़ियां स्क्वैट में उठती हैं, आप गहराई तक नहीं जा पाते या नीचे जाते ही घुटने अंदर आने लगते हैं, तो टखने की गतिशीलता पर काम करें।

नी-टू-वॉल ड्रिल

दीवार के सामने खड़े हों। पैर की उंगलियों को दीवार से कुछ सेंटीमीटर दूर रखें। एड़ी जमीन पर रखते हुए घुटने को धीरे से दीवार की ओर ले जाएं। घुटना दूसरे-तीसरे पंजे की लाइन में रहे। दोनों पैरों पर 10–15 रेप करें।

काफ स्ट्रेच

दीवार के सहारे खड़े होकर पीछे वाले पैर की एड़ी जमीन पर रखें और पिंडली को स्ट्रेच करें। घुटना सीधा और फिर हल्का मोड़कर दोनों प्रकार से स्ट्रेच करें।

कुछ लोगों के लिए अस्थायी रूप से वजन उठाने वाले जूते (weightlifting shoes) या एड़ी के नीचे छोटी प्लेट रखने से स्क्वैट आसान हो सकता है। लेकिन इसे स्थायी समाधान न मानें; साथ में टखनों की गतिशीलता भी सुधारें।


9. स्क्वैट की गहराई नियंत्रित करें

हर व्यक्ति को शुरुआत में बहुत गहरा स्क्वैट करने की जरूरत नहीं है। यदि नीचे जाने पर ही घुटने अंदर गिरने लगते हैं, तो उतनी ही गहराई तक स्क्वैट करें जहां तक आप नियंत्रण बनाए रख सकें।

इसमें बॉक्स स्क्वैट उपयोगी है। एक बॉक्स, बेंच या कुर्सी को पीछे रखें और नियंत्रित तरीके से बैठने जैसी गति करें। बॉक्स की ऊंचाई धीरे-धीरे कम कर सकते हैं।

याद रखें:
पहले नियंत्रण, फिर गहराई, और अंत में वजन।


10. धीमे टेम्पो में स्क्वैट करें

तेज गति में की गई रेप्स में गलतियां छिप जाती हैं। इसलिए 3 सेकंड नीचे जाने, 1 सेकंड नीचे रुकने और नियंत्रित तरीके से ऊपर आने वाला टेम्पो अपनाएं।

उदाहरण:

  • 3 सेकंड नीचे जाएं
  • 1 सेकंड नीचे रुकें
  • 1–2 सेकंड में ऊपर आएं

धीमे टेम्पो से आपको पता चलता है कि किस बिंदु पर घुटने अंदर गिरते हैं। इससे शरीर को सही मूवमेंट पैटर्न सीखने का समय मिलता है।


कब विशेषज्ञ की सलाह लें?

यदि स्क्वैट करते समय आपको घुटने में तेज दर्द, सूजन, लॉकिंग, अस्थिरता, क्लिकिंग के साथ दर्द, हाल की चोट या लिगामेंट की समस्या महसूस हो, तो केवल तकनीकी क्यूज़ पर निर्भर न रहें। फिजियोथेरेपिस्ट, स्पोर्ट्स डॉक्टर या योग्य स्ट्रेंथ कोच से मूल्यांकन कराएं।

वीडियो रिकॉर्डिंग भी उपयोगी हो सकती है। सामने और साइड एंगल से अपने स्क्वैट को रिकॉर्ड करके देखें कि घुटने किस समय अंदर जाते हैं, एड़ियां उठती हैं या नहीं, और धड़ का नियंत्रण कैसा है।


निष्कर्ष

स्क्वैट में घुटनों का अंदर गिरना आम समस्या है, लेकिन इसे धैर्य और सही अभ्यास से सुधारा जा सकता है। इसका समाधान केवल “घुटनों को बाहर धकेलो” कहने से नहीं होता। आपको पैरों की स्थिरता, टखनों की गतिशीलता, ग्लूट्स की ताकत, कोर कंट्रोल, सही स्टांस और उपयुक्त वजन—इन सभी पहलुओं पर काम करना होगा।

शुरुआत हल्के वजन, नियंत्रित गति और सही तकनीक से करें। पैरों का ट्राइपॉड दबाव बनाए रखें, घुटनों को पंजों की दिशा में रखें, ग्लूट्स को मजबूत करें और जरूरत पड़ने पर बॉक्स स्क्वैट या गोब्लेट स्क्वैट जैसे आसान विकल्प अपनाएं। लगातार अभ्यास से आपका स्क्वैट अधिक सुरक्षित, स्थिर और शक्तिशाली बन सकता है।

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