क्या दूध और डेयरी उत्पाद जोड़ों के दर्द या यूरिक एसिड को बढ़ाते हैं?
भारतीय घरों में यह धारणा बहुत आम है कि दूध, दही, पनीर और घी जैसे डेयरी उत्पाद जोड़ों के दर्द, गठिया (आर्थराइटिस) या यूरिक एसिड बढ़ने का कारण बनते हैं। बुजुर्गों से लेकर जिम जाने वाले युवाओं तक, बहुत से लोग जोड़ों में दर्द होते ही सबसे पहले दूध और दही छोड़ देते हैं। लेकिन क्या यह धारणा वैज्ञानिक रूप से सही है? आइए विस्तार से समझते हैं कि शोध वास्तव में क्या कहता है।
यूरिक एसिड और गठिया को समझना जरूरी है
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि यूरिक एसिड शरीर में कैसे बनता है। हमारा शरीर जब प्यूरीन (Purine) नामक तत्वों को तोड़ता है, तो इस प्रक्रिया में यूरिक एसिड बनता है। प्यूरीन शरीर की हर कोशिका में और कई खाद्य पदार्थों में मौजूद होते हैं। सामान्यतः यूरिक एसिड खून में घुल जाता है और किडनी के जरिए पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाता है। लेकिन जब शरीर जरूरत से ज्यादा यूरिक एसिड बनाता है या किडनी उसे ठीक से बाहर नहीं निकाल पाती, तो यह खून में जमा होने लगता है।
जब यूरिक एसिड का स्तर लंबे समय तक बहुत ज्यादा बना रहता है, तो यह क्रिस्टल (सुई जैसी संरचना) के रूप में जोड़ों में जमा हो सकता है। इसी वजह से गाउट (Gout) नामक बीमारी होती है, जिसमें जोड़ों में अचानक तेज दर्द, सूजन और लालिमा आ जाती है। यह आमतौर पर पैर के अंगूठे, टखने या घुटने में ज्यादा देखा जाता है।
दूध और डेयरी को लेकर आम गलतफहमी
दूध और डेयरी उत्पादों को जोड़ों के दर्द से जोड़ने की गलतफहमी शायद इसलिए बनी है क्योंकि दूध एक “पशु स्रोत” वाला प्रोटीन है, और लोग मानते हैं कि मांस, मछली की तरह इसमें भी प्यूरीन की मात्रा ज्यादा होगी। लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट है।
अधिकतर शोध बताते हैं कि दूध, दही और अन्य डेयरी उत्पादों में प्यूरीन की मात्रा बहुत कम होती है — यह लाल मांस, समुद्री भोजन (सीफूड) या ऑर्गन मीट (जैसे कलेजी) के मुकाबले नगण्य है। इसका मतलब है कि दूध या दही खाने से खून में यूरिक एसिड में वैसा उछाल नहीं आता जैसा मांस या शराब पीने से आता है।
शोध क्या कहता है: दूध यूरिक एसिड घटाने में मदद कर सकता है
पिछले कुछ दशकों में हुए कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि डेयरी उत्पादों का सेवन बढ़ने से यूरिक एसिड का स्तर घट सकता है, न कि बढ़ सकता है।
- कम प्यूरीन, ज्यादा फायदा: दूध में मौजूद कैसीन (Casein) और व्हे प्रोटीन (Whey Protein) जैसे प्रोटीन शरीर को यूरिक एसिड को पेशाब के जरिए बाहर निकालने में मदद करते हैं। इसे “यूरिकोसुरिक प्रभाव” (uricosuric effect) कहा जाता है।
- 2018 की एक व्यवस्थित समीक्षा (Systematic Review): इसमें पाया गया कि डेयरी उत्पाद शरीर में यूरिक एसिड का स्तर घटाने और गाउट का खतरा कम करने में सहायक हो सकते हैं।
- नियंत्रित परीक्षण (Randomized Controlled Trial): गाउट के मरीजों पर हुए एक अध्ययन में देखा गया कि जिन मरीजों को स्किम्ड मिल्क (बिना क्रीम वाला दूध) में मौजूद खास प्रोटीन घटकों (जैसे ग्लाइकोमैक्रोपेप्टाइड और G600 मिल्क फैट एक्सट्रैक्ट) से समृद्ध दूध रोज पिलाया गया, उनमें गाउट के दौरे कम हुए और दर्द में भी राहत महसूस हुई।
- सूजन-रोधी गुण: कुछ प्रारंभिक शोध यह भी संकेत देते हैं कि दूध में मौजूद कुछ तत्वों में सूजन कम करने (एंटी-इंफ्लेमेटरी) के गुण हो सकते हैं, जो जोड़ों की सूजन को शांत करने में मदद कर सकते हैं।
- 2024 की एक मेटा-विश्लेषण समीक्षा: इसमें यह निष्कर्ष निकाला गया कि डेयरी उत्पादों में मौजूद व्हे प्रोटीन, कैसीन, लैक्टोज, कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व मिलकर यूरिक एसिड और गाउट के खतरे को कम करने में भूमिका निभा सकते हैं।
इन सभी शोधों के आधार पर अमेरिकन कॉलेज ऑफ रयूमेटोलॉजी (American College of Rheumatology) जैसी संस्थाएं भी गाउट के मरीजों को कम वसा वाले या बिना वसा वाले डेयरी उत्पाद लेने की सलाह देती हैं।
लो-फैट डेयरी बेहतर, फुल-फैट से थोड़ी सावधानी
यहां एक जरूरी बात समझनी चाहिए — शोध में यह फर्क साफ नजर आता है कि कम वसा (लो-फैट) या बिना वसा (नॉन-फैट) डेयरी उत्पाद ज्यादा फायदेमंद पाए गए हैं, जबकि फुल-फैट या ज्यादा वसा वाले डेयरी उत्पाद (जैसे मलाईदार पनीर, घी में तला हुआ खाना, फुल-क्रीम दूध की मिठाइयां) उतने लाभदायक नहीं माने जाते।
इसकी वजह यह है कि ज्यादा सैचुरेटेड फैट (संतृप्त वसा) शरीर में सूजन को बढ़ावा दे सकता है और वजन बढ़ाने में योगदान दे सकता है। मोटापा खुद गाउट और उच्च यूरिक एसिड का एक बड़ा जोखिम कारक है। इसलिए समस्या दूध या दही में नहीं, बल्कि उसमें मौजूद अतिरिक्त वसा, चीनी या तली-भुनी चीजों में हो सकती है — जैसे मिठाइयां, आइसक्रीम या बहुत ज्यादा घी।
तो फिर जोड़ों के दर्द का असली कारण क्या है?
अगर दूध जोड़ों के दर्द का कारण नहीं है, तो फिर बहुत से लोगों को दूध पीने के बाद जोड़ों में तकलीफ क्यों महसूस होती है? इसके कुछ संभावित कारण हो सकते हैं:
- लैक्टोज इनटॉलरेंस (Lactose Intolerance): कुछ लोगों का शरीर दूध की शक्कर (लैक्टोज) को ठीक से पचा नहीं पाता। इससे पेट फूलना, गैस, दस्त जैसी समस्याएं होती हैं, जिन्हें कभी-कभी गलती से “जोड़ों का दर्द” समझ लिया जाता है, जबकि असल में यह पाचन संबंधी असुविधा होती है।
- डेयरी एलर्जी: कुछ लोगों को दूध के प्रोटीन से एलर्जी होती है, जिससे शरीर में सूजन जैसी प्रतिक्रिया हो सकती है। यह यूरिक एसिड से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि एक अलग तरह की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया है।
- अन्य आहार संबंधी आदतें: अक्सर जोड़ों के दर्द का असली कारण दूध नहीं, बल्कि साथ में खाई जाने वाली चीजें होती हैं — जैसे ज्यादा नमक, चीनी, रेड मीट, शराब या प्रोसेस्ड फूड।
- गठिया के अन्य प्रकार: जोड़ों का दर्द गाउट के अलावा ऑस्टियोआर्थराइटिस, रयूमेटॉइड आर्थराइटिस जैसी अन्य बीमारियों से भी हो सकता है, जिनका यूरिक एसिड से सीधा संबंध नहीं होता। ऐसे में दूध को दोष देना सही नहीं होगा।
किन बातों का ध्यान रखें
- यूरिक एसिड बढ़ाने वाले असली खाद्य पदार्थों में रेड मीट, ऑर्गन मीट (कलेजी, गुर्दा), समुद्री भोजन (खासकर सार्डिन, एंकोवी, झींगा), शराब (विशेषकर बीयर) और चीनी-मीठे पेय पदार्थ (जैसे कोल्ड ड्रिंक) शामिल हैं।
- कम वसा वाला दूध, दही और छाछ जैसे विकल्प यूरिक एसिड को नियंत्रित रखने में मददगार माने जाते हैं।
- पानी ज्यादा पीना भी जरूरी है, क्योंकि इससे किडनी यूरिक एसिड को बेहतर तरीके से बाहर निकाल पाती है।
- वजन नियंत्रित रखना, नियमित व्यायाम करना और शराब से परहेज करना भी यूरिक एसिड को काबू में रखने में सहायक है।
- अगर किसी को दूध पीने के बाद पेट में तकलीफ या एलर्जी जैसे लक्षण महसूस होते हैं, तो सोया मिल्क जैसे विकल्प भी अपनाए जा सकते हैं, जो शोध के अनुसार गाउट के लिहाज से फायदेमंद पाए गए हैं।
निष्कर्ष
मौजूदा वैज्ञानिक शोध के आधार पर यह कहा जा सकता है कि दूध और डेयरी उत्पाद, खासकर कम वसा वाले प्रकार, न तो यूरिक एसिड बढ़ाते हैं और न ही जोड़ों के दर्द का कारण बनते हैं। इसके विपरीत, कई अध्ययन बताते हैं कि नियमित रूप से लो-फैट दूध और दही का सेवन यूरिक एसिड का स्तर घटाने और गाउट के दौरे कम करने में मदद कर सकता है। इसलिए “दूध जोड़ों के दर्द को बढ़ाता है” यह धारणा ज्यादातर मामलों में एक मिथक ही साबित होती है।
हालांकि, अगर किसी को पहले से गाउट, हाई यूरिक एसिड या किसी अन्य प्रकार के गठिया की शिकायत है, तो अपनी डाइट में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ (डायटीशियन) से जरूर सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि हर व्यक्ति का शरीर और स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है।
