महिलाओं में प्लांटर फेशिआइटिस का बढ़ता खतरा और बचाव
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महिलाओं में प्लांटर फेशिआइटिस का बढ़ता खतरा और बचाव

आजकल महिलाओं में पैरों से जुड़ी कई समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिनमें प्लांटर फेशिआइटिस (Plantar Fasciitis) एक आम लेकिन दर्दनाक समस्या है। यह समस्या खासतौर पर उन महिलाओं में अधिक देखी जाती है जो लंबे समय तक खड़े होकर काम करती हैं, अधिक चलती हैं, गलत फुटवेयर पहनती हैं या वजन बढ़ने जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं।

प्लांटर फेशिआइटिस में पैर के तलवे में मौजूद प्लांटर फेशिया (Plantar Fascia) नामक मजबूत ऊतक में सूजन और खिंचाव हो जाता है। यह ऊतक एड़ी की हड्डी (Heel Bone) को पैर की उंगलियों से जोड़ता है और चलते समय पैर को सपोर्ट देता है। जब इस पर अधिक दबाव पड़ता है, तो एड़ी और तलवे में तेज दर्द महसूस हो सकता है।

महिलाओं में हार्मोनल बदलाव, जीवनशैली, काम का दबाव और गलत जूतों के कारण इस समस्या का खतरा बढ़ सकता है। सही समय पर सावधानी और उचित देखभाल से प्लांटर फेशिआइटिस से बचाव किया जा सकता है।


प्लांटर फेशिआइटिस क्या है?

प्लांटर फेशिआइटिस पैर के तलवे में होने वाली एक ऐसी स्थिति है जिसमें प्लांटर फेशिया ऊतक में सूक्ष्म चोट (Micro Tears), जलन और सूजन हो जाती है। यह समस्या आमतौर पर एड़ी के नीचे दर्द के रूप में दिखाई देती है।

इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • सुबह उठकर पहला कदम रखते समय एड़ी में तेज दर्द होना
  • लंबे समय तक बैठने के बाद चलने पर दर्द होना
  • ज्यादा देर खड़े रहने पर तलवे में दर्द बढ़ना
  • पैर के तलवे में खिंचाव या जलन महसूस होना
  • चलने या दौड़ने में असुविधा होना

शुरुआत में यह दर्द हल्का हो सकता है, लेकिन लंबे समय तक नजरअंदाज करने पर यह रोजमर्रा के कामों को प्रभावित कर सकता है।


महिलाओं में प्लांटर फेशिआइटिस का खतरा क्यों बढ़ रहा है?

लंबे समय तक खड़े रहकर काम करना

कई महिलाएं घर के काम, ऑफिस, स्कूल, हॉस्पिटल या अन्य क्षेत्रों में लंबे समय तक खड़ी रहती हैं। लगातार पैरों पर वजन पड़ने से प्लांटर फेशिया पर दबाव बढ़ जाता है।

रसोई में घंटों खड़े रहना, लगातार चलना या बिना आराम के काम करना एड़ी के दर्द का कारण बन सकता है।


गलत फुटवेयर का इस्तेमाल

महिलाओं में फैशन के कारण हाई हील्स, पतली सोल वाली चप्पल या बिना सपोर्ट वाले फुटवेयर पहनने की आदत आम है।

गलत जूते:

  • पैर के आर्च (Foot Arch) पर दबाव बढ़ाते हैं
  • एड़ी पर ज्यादा भार डालते हैं
  • चलने के तरीके को प्रभावित करते हैं

लंबे समय तक ऐसे फुटवेयर पहनने से प्लांटर फेशिआइटिस का खतरा बढ़ सकता है।


बढ़ता हुआ वजन और मोटापा

शरीर का अतिरिक्त वजन पैरों पर अधिक दबाव डालता है। जब पैर लगातार ज्यादा भार सहते हैं, तो प्लांटर फेशिया में खिंचाव और सूजन होने लगती है।

महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान भी वजन बढ़ने से एड़ी और तलवे पर दबाव बढ़ सकता है।


गर्भावस्था के दौरान बदलाव

प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं के शरीर में कई शारीरिक बदलाव होते हैं। वजन बढ़ने के साथ-साथ शरीर में रिलैक्सिन (Relaxin) हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है, जिससे लिगामेंट और ऊतक थोड़े ढीले हो जाते हैं।

इस कारण पैर की संरचना में बदलाव आ सकता है और प्लांटर फेशिया पर अधिक तनाव पड़ सकता है।


उम्र बढ़ने के साथ जोखिम

40 वर्ष के बाद महिलाओं में प्लांटर फेशिआइटिस का खतरा बढ़ सकता है। उम्र के साथ:

  • मांसपेशियों की ताकत कम हो सकती है
  • पैरों की लचक कम हो सकती है
  • ऊतकों की रिकवरी धीमी हो सकती है

इससे पैर के तलवे पर दबाव अधिक महसूस होता है।


व्यायाम की कमी या अचानक अधिक एक्सरसाइज

कुछ महिलाएं लंबे समय तक एक्सरसाइज नहीं करतीं और अचानक तेज वर्कआउट या दौड़ना शुरू कर देती हैं।

अचानक बढ़ी हुई गतिविधि से:

  • पैर की मांसपेशियों पर तनाव बढ़ता है
  • एड़ी पर दबाव बढ़ता है
  • प्लांटर फेशिया में चोट लग सकती है

इसलिए व्यायाम की शुरुआत धीरे-धीरे करनी चाहिए।


प्लांटर फेशिआइटिस से बचाव के उपाय

1. सही फुटवेयर पहनें

पैरों की सेहत के लिए सही जूते पहनना सबसे जरूरी है।

अच्छे फुटवेयर की विशेषताएं:

  • अच्छी कुशनिंग हो
  • एड़ी को सपोर्ट मिले
  • पैर के आर्च को सहारा मिले
  • सोल ज्यादा पतली न हो

लंबे समय तक हाई हील्स पहनने से बचना चाहिए।


2. नियमित स्ट्रेचिंग करें

पैर और पिंडली की मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग प्लांटर फेशिया पर तनाव कम कर सकती है।

कुछ उपयोगी स्ट्रेच:

कैल्फ स्ट्रेच (Calf Stretch)

दीवार के सहारे खड़े होकर एक पैर पीछे रखें और एड़ी को जमीन पर टिकाकर धीरे-धीरे आगे झुकें।

टॉवल स्ट्रेच

सुबह बिस्तर से उठने से पहले पैर की उंगलियों पर तौलिया लगाकर हल्का खींचाव दें।

फुट रोलिंग

टेनिस बॉल या पानी की ठंडी बोतल को पैर के नीचे रखकर धीरे-धीरे रोल करें।


3. वजन को नियंत्रित रखें

स्वस्थ वजन बनाए रखने से पैरों पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम होता है।

इसके लिए:

  • संतुलित आहार लें
  • नियमित वॉक करें
  • हल्की एक्सरसाइज करें
  • पर्याप्त पानी पिएं

4. लंबे समय तक खड़े रहने से बचें

अगर काम के कारण ज्यादा देर खड़ा रहना पड़ता है तो:

  • बीच-बीच में बैठकर आराम करें
  • पैरों को थोड़ा ऊपर उठाकर रखें
  • आरामदायक मैट का इस्तेमाल करें

5. सुबह उठते ही सावधानी रखें

प्लांटर फेशिआइटिस में सुबह का पहला कदम सबसे ज्यादा दर्दनाक हो सकता है।

बिस्तर से उठने से पहले:

  • पैर की हल्की स्ट्रेचिंग करें
  • टखने को ऊपर-नीचे हिलाएं
  • धीरे-धीरे जमीन पर पैर रखें

प्लांटर फेशिआइटिस में फिजियोथेरेपी की भूमिका

फिजियोथेरेपी प्लांटर फेशिआइटिस के इलाज और बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा दिए जाने वाले उपचार:

1. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज

पैर और पिंडली की मांसपेशियों की लचक बढ़ाने के लिए विशेष व्यायाम करवाए जाते हैं।

2. स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज

पैर की छोटी मांसपेशियों को मजबूत बनाया जाता है ताकि पैर को बेहतर सपोर्ट मिल सके।

3. मैनुअल थेरेपी

फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा किए गए विशेष तकनीक से जकड़न और दर्द को कम किया जा सकता है।

4. टेपिंग तकनीक

कुछ मामलों में फुट सपोर्ट देने के लिए टेपिंग की जाती है।

5. अल्ट्रासाउंड थेरेपी और अन्य मॉडेलिटी

दर्द और सूजन कम करने के लिए कुछ फिजियोथेरेपी तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है।


कौन सी आदतें प्लांटर फेशिआइटिस को बढ़ा सकती हैं?

  • नंगे पैर ज्यादा देर तक चलना
  • खराब क्वालिटी की चप्पल पहनना
  • अचानक ज्यादा दौड़ना
  • दर्द को नजरअंदाज करना
  • लंबे समय तक आराम न करना
  • पैर की एक्सरसाइज न करना

डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से कब संपर्क करें?

अगर:

  • एड़ी का दर्द कई हफ्तों तक बना रहे
  • चलने में परेशानी हो
  • दर्द धीरे-धीरे बढ़ रहा हो
  • पैर में सूजन या अत्यधिक संवेदनशीलता हो
  • घरेलू उपायों से आराम न मिले

तो विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।


निष्कर्ष

महिलाओं में प्लांटर फेशिआइटिस एक आम समस्या बनती जा रही है, लेकिन सही जीवनशैली, उचित फुटवेयर, नियमित स्ट्रेचिंग और वजन नियंत्रण से इससे काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।

पैर हमारे शरीर का आधार हैं, इसलिए पैरों की देखभाल को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि एड़ी या तलवे में लगातार दर्द महसूस हो रहा है, तो समय रहते फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेकर उचित उपचार शुरू करना बेहतर होता है। स्वस्थ पैर बेहतर गतिशीलता और सक्रिय जीवन के लिए बेहद जरूरी हैं।

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