सर्जन्स के लिए ऑपरेशन थिएटर में सही पोश्चर और सर्जरी के बाद रिकवरी स्ट्रेच
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सर्जन्स के लिए ऑपरेशन थिएटर में सही पोश्चर और सर्जरी के बाद रिकवरी स्ट्रेच

सर्जन का कार्य केवल कौशल और अनुभव तक सीमित नहीं होता, बल्कि शारीरिक सहनशक्ति भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। कई बार जटिल सर्जरी 3 से 8 घंटे या उससे भी अधिक समय तक चल सकती है, जिसमें सर्जन को एक ही स्थिति में लगातार खड़े रहना पड़ता है। लंबे समय तक स्थिर मुद्रा (Static Posture), गर्दन को झुकाकर काम करना, हाथों को ऊपर उठाए रखना और लगातार सूक्ष्म गतिविधियाँ (Fine Motor Movements) करने के कारण गर्दन, कंधे, कमर, कलाई और पैरों में दर्द विकसित हो सकता है।

कई शोध बताते हैं कि बड़ी संख्या में सर्जन अपने करियर के दौरान मस्कुलोस्केलेटल (Musculoskeletal) समस्याओं का सामना करते हैं। यदि शुरुआत से सही एर्गोनॉमिक्स और नियमित रिकवरी स्ट्रेच अपनाए जाएँ तो इन समस्याओं का जोखिम काफी कम किया जा सकता है।


Table of Contents

ऑपरेशन थिएटर में गलत पोश्चर से होने वाली समस्याएँ

लंबे समय तक गलत मुद्रा में रहने से निम्न समस्याएँ हो सकती हैं—

  • गर्दन और कंधे का दर्द
  • लोअर बैक पेन
  • ट्रेपेजियस मसल्स में जकड़न
  • कलाई एवं अंगूठे का दर्द
  • टेनिस एल्बो जैसी समस्याएँ
  • पैरों में थकान और सूजन
  • कार्यक्षमता और एकाग्रता में कमी

यदि इन लक्षणों को अनदेखा किया जाए तो आगे चलकर क्रॉनिक दर्द, डिस्क संबंधी समस्याएँ या नसों पर दबाव जैसी गंभीर स्थितियाँ विकसित हो सकती हैं।


ऑपरेशन थिएटर में सही पोश्चर क्यों जरूरी है?

सही पोश्चर अपनाने से—

  • मांसपेशियों पर अनावश्यक दबाव कम होता है।
  • लंबे समय तक ऊर्जा बनी रहती है।
  • हाथों की सटीकता (Precision) बेहतर रहती है।
  • थकान कम महसूस होती है।
  • सर्जरी के दौरान फोकस बना रहता है।
  • करियर की लंबी अवधि तक कार्य क्षमता सुरक्षित रहती है।

ऑपरेशन थिएटर में सही पोश्चर के महत्वपूर्ण नियम

1. सिर और गर्दन की स्थिति

  • गर्दन को अत्यधिक आगे न झुकाएँ।
  • सिर को न्यूट्रल पोजिशन में रखें।
  • लगातार नीचे देखने से बचें।
  • यदि संभव हो तो मॉनिटर आंखों के स्तर के आसपास रखें।

2. कंधों की स्थिति

  • कंधों को रिलैक्स रखें।
  • उन्हें ऊपर उठाकर (Shrug Position) काम न करें।
  • दोनों कंधों का संतुलन बनाए रखें।

3. कोहनी (Elbow Position)

आदर्श रूप से—

  • कोहनी लगभग 90–110 डिग्री पर रहे।
  • हाथ शरीर के काफी पास रहें।
  • लंबे समय तक हवा में हाथ न रखें।

4. कलाई की स्थिति

  • कलाई सीधी रखें।
  • अत्यधिक मोड़ने या घुमाने से बचें।
  • उपकरण ऐसे पकड़ें जिससे कम बल लगाना पड़े।

5. कमर की स्थिति

कमर को झुकाने की बजाय—

  • पूरे शरीर को मरीज के करीब लाएँ।
  • ऑपरेशन टेबल की ऊँचाई आवश्यकता अनुसार समायोजित करें।
  • रीढ़ की प्राकृतिक वक्रता बनाए रखें।

6. पैरों की स्थिति

  • दोनों पैरों पर समान वजन रखें।
  • घुटनों को पूरी तरह लॉक न करें।
  • यदि संभव हो तो समय-समय पर एक पैर को छोटे फुटरेस्ट पर रखें।

ऑपरेशन टेबल की सही ऊँचाई

टेबल की ऊँचाई ऐसी होनी चाहिए कि—

  • कंधे रिलैक्स रहें।
  • कोहनी लगभग 90 डिग्री पर रहे।
  • गर्दन अधिक न झुके।
  • हाथों को अतिरिक्त ऊँचाई पर न रखना पड़े।

माइक्रो ब्रेक का महत्व

हर 30–45 मिनट में केवल 20–60 सेकंड का छोटा ब्रेक भी मांसपेशियों की थकान कम कर सकता है।

इस दौरान—

  • कंधे घुमाएँ।
  • गर्दन सीधी करें।
  • उंगलियाँ खोलें-बंद करें।
  • गहरी साँस लें।

यह छोटा अभ्यास लंबे समय में बहुत लाभदायक साबित होता है।


सर्जरी समाप्त होने के बाद रिकवरी स्ट्रेच

1. नेक स्ट्रेच

  • सीधे खड़े रहें।
  • सिर को धीरे-धीरे दाईं ओर झुकाएँ।
  • 20–30 सेकंड रोकें।
  • दूसरी ओर दोहराएँ।

3 बार करें।


2. अपर ट्रेपेजियस स्ट्रेच

  • एक हाथ से कुर्सी पकड़ें।
  • दूसरे हाथ से सिर को हल्का झुकाएँ।
  • कंधा नीचे रखें।
  • 30 सेकंड तक होल्ड करें।

3. लेवेटर स्कैपुला स्ट्रेच

  • सिर को लगभग 45° नीचे और एक ओर घुमाएँ।
  • हाथ से हल्का दबाव दें।
  • 30 सेकंड रखें।

यह स्ट्रेच गर्दन के पीछे की जकड़न कम करता है।


4. चेस्ट (Pectoral) स्ट्रेच

  • दरवाजे के फ्रेम पर दोनों हाथ रखें।
  • शरीर को धीरे-धीरे आगे ले जाएँ।
  • छाती में खिंचाव महसूस करें।
  • 30 सेकंड तक रखें।

5. शोल्डर रोल

  • दोनों कंधों को आगे और पीछे घुमाएँ।
  • प्रत्येक दिशा में 10–15 बार दोहराएँ।

6. थोरासिक एक्सटेंशन

  • दोनों हाथ सिर के पीछे रखें।
  • धीरे-धीरे छाती खोलते हुए पीछे झुकें।
  • 10–15 बार करें।

7. कैट-काउ मूवमेंट

  • चारों हाथ-पैरों के सहारे आएँ।
  • पीठ को ऊपर गोल करें।
  • फिर नीचे की ओर झुकाएँ।
  • 10–15 दोहराव करें।

यह पूरी रीढ़ को आराम देता है।


8. हैमस्ट्रिंग स्ट्रेच

  • एक पैर आगे रखें।
  • कमर सीधी रखते हुए आगे झुकें।
  • 30 सेकंड तक रखें।

दोनों पैरों से करें।


9. काफ स्ट्रेच

  • दीवार पर हाथ रखें।
  • एक पैर पीछे रखें।
  • एड़ी जमीन पर रखें।
  • 30 सेकंड तक होल्ड करें।

10. कलाई और उंगलियों का स्ट्रेच

  • हथेली को आगे करें।
  • दूसरी हाथ से उंगलियों को धीरे पीछे खींचें।
  • फिर नीचे की ओर स्ट्रेच करें।
  • प्रत्येक दिशा में 20–30 सेकंड रखें।

पूरे दिन के लिए अतिरिक्त सुझाव

  • आरामदायक एवं सपोर्टिव फुटवियर पहनें।
  • लंबे ऑपरेशन से पहले पर्याप्त पानी पिएँ।
  • नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें।
  • सप्ताह में कम से कम 3–4 दिन कोर एक्सरसाइज करें।
  • योग एवं मोबिलिटी ट्रेनिंग को दिनचर्या में शामिल करें।
  • पर्याप्त नींद लें।
  • आवश्यकता अनुसार फिजियोथेरेपिस्ट से एर्गोनॉमिक मूल्यांकन कराएँ।

कब फिजियोथेरेपिस्ट से संपर्क करें?

यदि निम्न समस्याएँ लगातार बनी रहें—

  • गर्दन का दर्द 2–3 सप्ताह से अधिक रहे।
  • हाथों में सुन्नपन या झुनझुनी हो।
  • कंधा उठाने में दर्द हो।
  • कमर का दर्द पैरों तक फैलने लगे।
  • कलाई में लगातार दर्द रहे।

तो शीघ्र फिजियोथेरेपिस्ट या ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।


निष्कर्ष

सर्जन अपने मरीजों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी निभाते हैं, लेकिन अपनी शारीरिक सेहत का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है। ऑपरेशन थिएटर में सही एर्गोनॉमिक पोश्चर, ऑपरेशन टेबल की उचित ऊँचाई, नियमित माइक्रो ब्रेक और सर्जरी के बाद किए जाने वाले रिकवरी स्ट्रेच मांसपेशियों की थकान, दर्द और दीर्घकालिक चोटों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यदि इन आदतों को दैनिक कार्यशैली का हिस्सा बना लिया जाए तो न केवल कार्यक्षमता और एकाग्रता में सुधार होता है, बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ, दर्द-मुक्त और सफल सर्जिकल करियर बनाए रखने में भी सहायता मिलती है।

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