डोम्स (DOMS): वर्कआउट के अगले दिन होने वाले भयंकर दर्द का कारण और उपाय
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डोम्स (DOMS): वर्कआउट के अगले दिन होने वाले भयंकर दर्द का कारण और उपाय

अगर आपने लंबे समय बाद जिम में एक्सरसाइज की हो, पहली बार दौड़ लगाई हो या किसी नए प्रकार का वर्कआउट शुरू किया हो, तो संभव है कि अगले 24–48 घंटों में आपकी मांसपेशियों में काफी दर्द और अकड़न महसूस हुई हो। कई लोग इसे “वर्कआउट का अच्छा संकेत” मानते हैं, जबकि कुछ लोग इस दर्द से घबरा जाते हैं। वास्तव में इस स्थिति को डिलेड ऑनसेट मसल सोरनेस (Delayed Onset Muscle Soreness – DOMS) कहा जाता है।

DOMS एक सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया है, जो विशेष रूप से तब होती है जब मांसपेशियों पर उनकी आदत से अधिक या नए प्रकार का भार पड़ता है। हालांकि यह दर्द अस्थायी होता है, लेकिन सही जानकारी और उचित देखभाल से इसे कम किया जा सकता है तथा भविष्य में इसकी तीव्रता भी घटाई जा सकती है।

इस लेख में हम जानेंगे कि DOMS क्या है, यह क्यों होता है, इसके लक्षण क्या हैं, इससे राहत पाने के उपाय और इसे रोकने के प्रभावी तरीके।


DOMS क्या है?

DOMS वह मांसपेशीय दर्द और जकड़न है जो आमतौर पर वर्कआउट के 12 से 24 घंटे बाद शुरू होती है, 24 से 72 घंटे के बीच सबसे अधिक होती है, और फिर धीरे-धीरे कम होकर लगभग 5–7 दिनों में ठीक हो जाती है।

यह दर्द सामान्य मांसपेशी थकान से अलग होता है। एक्सरसाइज के दौरान जो जलन महसूस होती है, वह लैक्टिक एसिड के कारण होती है और कुछ ही समय में समाप्त हो जाती है, जबकि DOMS बाद में विकसित होता है।


DOMS क्यों होता है?

पहले यह माना जाता था कि DOMS का कारण लैक्टिक एसिड का जमा होना है, लेकिन आधुनिक वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि यह धारणा सही नहीं है।

DOMS के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

1. मांसपेशियों में सूक्ष्म क्षति (Micro Tears)

जब मांसपेशियों पर नया या अधिक भार पड़ता है, तब उनके फाइबर में बहुत छोटे-छोटे सूक्ष्म टूट-फूट (Micro Tears) होती है। शरीर इन क्षतियों की मरम्मत करता है, जिससे मांसपेशियां पहले से अधिक मजबूत बनती हैं।

2. सूजन (Inflammation)

मांसपेशियों की मरम्मत के दौरान शरीर में हल्की सूजन होती है। यही सूजन दर्द और जकड़न का मुख्य कारण बनती है।

3. एक्सेंट्रिक एक्सरसाइज (Eccentric Exercise)

ऐसी एक्सरसाइज जिसमें मांसपेशियां भार उठाते हुए धीरे-धीरे लंबी होती हैं, DOMS का जोखिम अधिक बढ़ाती हैं।

उदाहरण:

  • नीचे बैठते हुए स्क्वाट
  • डाउनहिल रनिंग
  • सीढ़ियां उतरना
  • डेडलिफ्ट का नीचे वाला भाग
  • पुल-अप में नीचे आना

किन लोगों में DOMS अधिक होता है?

DOMS किसी को भी हो सकता है, लेकिन निम्न परिस्थितियों में इसकी संभावना अधिक होती है—

  • पहली बार व्यायाम शुरू करने वाले
  • लंबे ब्रेक के बाद वर्कआउट करने वाले
  • अचानक बहुत भारी वजन उठाने वाले
  • नई एक्सरसाइज ट्राई करने वाले
  • एथलीट जो अपनी ट्रेनिंग की तीव्रता बढ़ाते हैं

DOMS के सामान्य लक्षण

DOMS के दौरान निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं—

  • मांसपेशियों में दर्द
  • छूने पर संवेदनशीलता
  • जकड़न
  • शरीर की गति कम होना
  • मांसपेशियों में हल्की सूजन
  • ताकत में अस्थायी कमी
  • सीढ़ियां चढ़ने या बैठने में कठिनाई

यदि दर्द बहुत तेज हो, सूजन अत्यधिक हो या चलना भी मुश्किल हो जाए, तो यह सामान्य DOMS नहीं बल्कि चोट का संकेत हो सकता है।


DOMS और चोट में अंतर

DOMSमांसपेशी की चोट
दर्द अगले दिन शुरू होता हैदर्द तुरंत शुरू होता है
दोनों तरफ समान दर्द हो सकता हैएक ही स्थान पर दर्द
धीरे-धीरे कम होता हैसमय के साथ बढ़ सकता है
हल्की अकड़नतेज दर्द और सूजन
सामान्य गतिविधि संभवचलना भी कठिन हो सकता है

यदि दर्द के साथ तेज सूजन, नील पड़ना या कमजोरी हो तो फिजियोथेरेपिस्ट या डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।


DOMS से राहत पाने के उपाय

1. हल्की गतिविधि जारी रखें

पूरी तरह आराम करने के बजाय हल्की वॉक, साइकिलिंग या धीमी स्ट्रेचिंग करें। इससे रक्त संचार बढ़ता है और दर्द कम महसूस होता है।

2. पर्याप्त पानी पिएं

डिहाइड्रेशन मांसपेशियों की रिकवरी को धीमा कर सकता है। पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स लें।

3. प्रोटीन युक्त भोजन

मांसपेशियों की मरम्मत के लिए पर्याप्त प्रोटीन आवश्यक है।

अच्छे स्रोत—

  • दूध
  • दही
  • पनीर
  • अंडे
  • दालें
  • सोया
  • चिकन
  • मछली

4. अच्छी नींद लें

रात में 7–9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद मांसपेशियों की रिकवरी के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है।

5. हल्की स्ट्रेचिंग

वर्कआउट के बाद और अगले दिन हल्की स्ट्रेचिंग करने से जकड़न कम हो सकती है।

ध्यान रखें कि दर्द के दौरान जोरदार स्ट्रेचिंग न करें।

6. फोम रोलिंग (Foam Rolling)

फोम रोलर का उपयोग करने से मांसपेशियों की जकड़न और दर्द में राहत मिल सकती है। इसे धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से करें।

7. गर्म या ठंडी सिकाई

  • शुरुआती 24 घंटे में ठंडी सिकाई आराम दे सकती है।
  • बाद में गर्म सिकाई या गुनगुने पानी से स्नान मांसपेशियों को रिलैक्स करने में मदद करता है।

क्या दर्द होने पर फिर से वर्कआउट करना चाहिए?

यदि दर्द हल्का है तो—

  • हल्का कार्डियो
  • मोबिलिटी एक्सरसाइज
  • दूसरे मसल ग्रुप की ट्रेनिंग

की जा सकती है।

यदि दर्द बहुत अधिक है तो उसी मांसपेशी समूह को आराम दें और रिकवरी पर ध्यान दें।


DOMS से बचाव कैसे करें?

1. धीरे-धीरे प्रगति करें

अचानक बहुत अधिक वजन या ज्यादा रेप्स न बढ़ाएं। हर सप्ताह धीरे-धीरे लोड बढ़ाना बेहतर होता है।

2. अच्छी तरह वार्म-अप करें

वर्कआउट से पहले 5–10 मिनट का वार्म-अप और डायनेमिक स्ट्रेचिंग करें।

3. सही तकनीक अपनाएं

गलत फॉर्म से मांसपेशियों पर अनावश्यक तनाव पड़ता है, जिससे दर्द और चोट दोनों का जोखिम बढ़ता है।

4. पर्याप्त रिकवरी दें

हर दिन एक ही मसल ग्रुप को ट्रेन न करें। मांसपेशियों को रिकवर होने का समय दें।

5. संतुलित पोषण

वर्कआउट के बाद कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन का संतुलित सेवन रिकवरी को बेहतर बनाता है।

6. नियमित व्यायाम करें

यदि आप नियमित रूप से एक्सरसाइज करते हैं, तो समय के साथ शरीर उसी प्रकार के वर्कआउट का अभ्यस्त हो जाता है और DOMS कम होने लगता है।


क्या दर्द का मतलब अच्छा वर्कआउट है?

यह एक आम गलतफहमी है।

सच्चाई यह है कि हर अच्छा वर्कआउट दर्द पैदा नहीं करता और हर दर्द अच्छा वर्कआउट नहीं दर्शाता।

आप बिना DOMS के भी मांसपेशियों की ताकत और आकार बढ़ा सकते हैं। प्रगति का सही मापदंड है—

  • ताकत बढ़ना
  • सहनशक्ति बढ़ना
  • बेहतर प्रदर्शन
  • सही तकनीक
  • नियमितता

कब डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से मिलना चाहिए?

यदि निम्न लक्षण दिखाई दें तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें—

  • दर्द 7 दिनों से अधिक रहे
  • अत्यधिक सूजन
  • मांसपेशी में तेज कमजोरी
  • पेशाब का रंग गहरा भूरा होना
  • बुखार के साथ दर्द
  • किसी जोड़ में असामान्य सूजन
  • अचानक तेज दर्द जो एक्सरसाइज के दौरान ही शुरू हुआ हो

ये सामान्य DOMS के बजाय गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं।


फिजियोथेरेपी की भूमिका

यदि बार-बार अत्यधिक DOMS होता है या वर्कआउट के बाद दर्द आपकी दैनिक गतिविधियों को प्रभावित करता है, तो फिजियोथेरेपिस्ट आपकी मदद कर सकते हैं।

फिजियोथेरेपी में—

  • मूवमेंट असेसमेंट
  • सही एक्सरसाइज तकनीक
  • मसल इम्बैलेंस की पहचान
  • रिकवरी प्रोग्राम
  • स्ट्रेचिंग और मोबिलिटी प्लान
  • स्पोर्ट्स-विशिष्ट ट्रेनिंग

के माध्यम से भविष्य में DOMS और चोट के जोखिम को कम किया जा सकता है।


निष्कर्ष

DOMS यानी डिलेड ऑनसेट मसल सोरनेस एक सामान्य और अस्थायी स्थिति है, जो नए या अधिक तीव्र व्यायाम के बाद मांसपेशियों में होने वाली सूक्ष्म क्षति और उनकी मरम्मत प्रक्रिया के कारण उत्पन्न होती है। यह शरीर के अनुकूलन (Adaptation) का हिस्सा है और अधिकांश मामलों में चिंता का विषय नहीं होता।

सही वार्म-अप, धीरे-धीरे ट्रेनिंग की तीव्रता बढ़ाना, संतुलित पोषण, पर्याप्त पानी, अच्छी नींद और नियमित व्यायाम DOMS की तीव्रता को काफी हद तक कम कर सकते हैं। यदि दर्द असामान्य रूप से अधिक हो, लंबे समय तक बना रहे या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य फिजियोथेरेपिस्ट या डॉक्टर से परामर्श लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

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