बेडसोर्स (Bedsores) को रोकने के लिए बिस्तर पर लेटे मरीजों की सही पोजिशनिंग
बिस्तर पर लंबे समय तक लेटे रहने वाले मरीजों में बेडसोर्स (Bedsores) या प्रेशर अल्सर (Pressure Ulcers) एक आम लेकिन गंभीर समस्या है। यह तब होता है जब शरीर के किसी हिस्से पर लंबे समय तक लगातार दबाव पड़ता रहता है, जिससे उस क्षेत्र में रक्त संचार कम हो जाता है और त्वचा तथा उसके नीचे के ऊतक (Tissues) क्षतिग्रस्त होने लगते हैं। यदि समय पर इसकी रोकथाम न की जाए तो यह संक्रमण, गहरे घाव और गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है।
लकवा (Stroke), स्पाइनल कॉर्ड इंजरी, बुजुर्ग मरीज, कोमा में रहने वाले मरीज, ऑपरेशन के बाद लंबे समय तक बिस्तर पर रहने वाले मरीज तथा गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोग बेडसोर्स के अधिक जोखिम में होते हैं।
अच्छी बात यह है कि सही पोजिशनिंग (Positioning), नियमित करवट बदलना, त्वचा की देखभाल और फिजियोथेरेपी की सहायता से अधिकांश बेडसोर्स को रोका जा सकता है।
बेडसोर्स क्या है?
बेडसोर्स त्वचा और उसके नीचे के ऊतकों में बनने वाला घाव है, जो लंबे समय तक दबाव, घर्षण (Friction) या त्वचा के खिंचाव (Shear Force) के कारण बनता है।
जब किसी हिस्से पर लगातार दबाव पड़ता है तो उस क्षेत्र में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे कोशिकाएं मरने लगती हैं और धीरे-धीरे घाव बन जाता है।
किन लोगों में बेडसोर्स का खतरा अधिक होता है?
निम्नलिखित मरीजों में जोखिम सबसे अधिक होता है—
- लकवा (Stroke) के मरीज
- स्पाइनल कॉर्ड इंजरी वाले मरीज
- लंबे समय तक ICU में भर्ती मरीज
- बुजुर्ग व्यक्ति
- कोमा के मरीज
- हिप फ्रैक्चर के बाद बिस्तर पर रहने वाले मरीज
- कैंसर के गंभीर मरीज
- कुपोषण या कम वजन वाले मरीज
- डायबिटीज के मरीज
- जिनकी चलने-फिरने की क्षमता बहुत कम हो
शरीर के किन हिस्सों में बेडसोर्स अधिक बनते हैं?
बेडसोर्स आमतौर पर शरीर की उन हड्डियों वाले हिस्सों पर बनते हैं जहां दबाव अधिक पड़ता है।
यदि मरीज पीठ के बल लेटा हो—
- एड़ी (Heel)
- कूल्हे (Sacrum)
- नितंब
- कोहनी
- कंधे
- सिर का पीछे वाला भाग
यदि मरीज करवट लेकर लेटा हो—
- कूल्हे का बाहरी भाग
- घुटनों के किनारे
- टखने
- कान
- कंधे
यदि मरीज बैठा रहता हो—
- नितंब
- रीढ़ की निचली हड्डी
- जांघों का पिछला भाग
बेडसोर्स के शुरुआती संकेत
यदि निम्न लक्षण दिखाई दें तो तुरंत सावधानी बरतनी चाहिए—
- त्वचा का लाल होना
- दबाने पर रंग वापस न आना
- दर्द या जलन
- त्वचा गर्म या ठंडी महसूस होना
- सूजन
- त्वचा का कठोर या मुलायम होना
- फफोले बनना
- त्वचा का फटना
सही पोजिशनिंग क्यों जरूरी है?
सही पोजिशनिंग से—
- शरीर पर दबाव समान रूप से वितरित होता है।
- रक्त संचार बेहतर रहता है।
- त्वचा सुरक्षित रहती है।
- जोड़ों में अकड़न कम होती है।
- मांसपेशियों की कमजोरी कम होती है।
- सांस लेने में सुविधा मिलती है।
- मरीज को आराम मिलता है।
- बेडसोर्स बनने की संभावना काफी कम हो जाती है।
मरीज की पोजिशन कितनी बार बदलनी चाहिए?
सामान्यतः—
- हर 2 घंटे में लेटे हुए मरीज की पोजिशन बदलें।
- यदि मरीज व्हीलचेयर पर बैठा है तो हर 15–30 मिनट में वजन एक तरफ से दूसरी तरफ शिफ्ट करें।
- हर 1 घंटे में बैठने की स्थिति बदलना भी लाभदायक होता है यदि मरीज स्वयं वजन नहीं बदल सकता।
यदि मरीज की त्वचा बहुत संवेदनशील हो तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह के अनुसार इससे भी अधिक बार पोजिशन बदलना आवश्यक हो सकता है।
सही पोजिशनिंग के तरीके
1. पीठ के बल (Supine Position)
इस स्थिति में—
- सिर के नीचे आरामदायक तकिया रखें।
- घुटनों के नीचे छोटा तकिया रखा जा सकता है।
- एड़ियों को सीधे गद्दे पर दबाव से बचाएं।
- एड़ियों के नीचे मुलायम तकिया रखकर उन्हें हवा में रखें।
- हाथों को शरीर के दोनों ओर आरामदायक स्थिति में रखें।
2. करवट (30-Degree Side Lying Position)
यह बेडसोर्स रोकने की सबसे सुरक्षित स्थितियों में से एक मानी जाती है।
इस दौरान—
- मरीज को लगभग 30 डिग्री पर करवट दें।
- पीठ के पीछे तकिया लगाएं।
- दोनों घुटनों के बीच तकिया रखें।
- टखनों के बीच मुलायम तकिया रखें।
- ऊपर वाले हाथ को तकिए पर रखें।
ध्यान रखें कि मरीज को सीधे 90 डिग्री करवट पर लंबे समय तक न रखें क्योंकि इससे कूल्हे पर अधिक दबाव पड़ता है।
3. पेट के बल (Prone Position)
यह स्थिति कुछ मरीजों में उपयोगी होती है, लेकिन सभी के लिए उपयुक्त नहीं होती।
इसका उपयोग केवल प्रशिक्षित चिकित्सक या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह पर करें।
4. बैठी हुई स्थिति (Sitting Position)
यदि मरीज बैठ सकता है—
- पीठ को पूरा सहारा दें।
- पैरों को जमीन या फुटरेस्ट पर रखें।
- दबाव कम करने वाला कुशन उपयोग करें।
- लगातार लंबे समय तक बैठने से बचें।
- हर 15–30 मिनट में वजन बदलें।
तकियों का सही उपयोग
तकिए बेडसोर्स रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इनका उपयोग—
- घुटनों के बीच
- टखनों के बीच
- एड़ियों के नीचे
- पीठ के पीछे
- हाथों के नीचे
- कंधों को सहारा देने के लिए
कभी भी तकिया सीधे घाव वाले हिस्से के नीचे इस प्रकार न रखें कि उसी स्थान पर दबाव बढ़ जाए।
प्रेशर रिलीविंग मैट्रेस का महत्व
विशेष गद्दे (Pressure Relieving Mattress) लगातार दबाव को कम करते हैं।
इनमें—
- एयर मैट्रेस
- अल्टरनेटिंग प्रेशर मैट्रेस
- जेल मैट्रेस
- फोम मैट्रेस
लंबे समय तक बिस्तर पर रहने वाले मरीजों में इनका उपयोग काफी लाभदायक हो सकता है।
त्वचा की देखभाल कैसे करें?
- त्वचा को प्रतिदिन जांचें।
- त्वचा को साफ और सूखा रखें।
- अत्यधिक नमी से बचाएं।
- पसीना या पेशाब होने पर तुरंत सफाई करें।
- हल्के मॉइस्चराइज़र का उपयोग करें।
- त्वचा को जोर से रगड़ें नहीं।
- साफ और सूती कपड़े पहनाएं।
पोषण का महत्व
अच्छा पोषण त्वचा की मजबूती और घाव भरने के लिए आवश्यक है।
आहार में शामिल करें—
- पर्याप्त प्रोटीन
- दूध और दही
- दालें
- अंडा (यदि उपयुक्त हो)
- हरी सब्जियां
- मौसमी फल
- पर्याप्त पानी
- विटामिन C और जिंक युक्त खाद्य पदार्थ
यदि मरीज खाना कम खाता है तो डाइटिशियन से सलाह लें।
फिजियोथेरेपी की भूमिका
फिजियोथेरेपिस्ट केवल व्यायाम ही नहीं कराते बल्कि सही पोजिशनिंग भी सिखाते हैं।
फिजियोथेरेपी के लाभ—
- सही पोजिशनिंग की ट्रेनिंग
- जोड़ों की मूवमेंट बनाए रखना
- मांसपेशियों की ताकत बढ़ाना
- रक्त संचार बेहतर करना
- सांस संबंधी व्यायाम
- कॉन्ट्रैक्चर की रोकथाम
- मरीज को धीरे-धीरे बैठने और खड़े होने के लिए तैयार करना
देखभाल करने वालों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
- हर 2 घंटे में पोजिशन बदलें।
- मरीज को खींचकर न घसीटें।
- बेडशीट पर सिलवटें न रहने दें।
- त्वचा की रोज जांच करें।
- पर्याप्त पानी पिलाएं।
- मरीज को जितना संभव हो सक्रिय रखें।
- डॉक्टर और फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह का पालन करें।
- यदि लाल निशान 30 मिनट से अधिक समय तक बने रहें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि निम्न में से कोई लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें—
- त्वचा फट जाए
- घाव से पस निकलना
- दुर्गंध आना
- तेज बुखार
- काला पड़ता हुआ घाव
- दर्द बढ़ना
- घाव तेजी से बड़ा होना
निष्कर्ष
बेडसोर्स एक ऐसी समस्या है जिसे सही देखभाल और नियमित पोजिशनिंग से काफी हद तक रोका जा सकता है। हर दो घंटे में मरीज की स्थिति बदलना, तकियों का सही उपयोग, त्वचा की नियमित जांच, संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और फिजियोथेरेपी का सहयोग मरीज को गंभीर जटिलताओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यदि मरीज लंबे समय से बिस्तर पर है, तो परिवार के सदस्यों और देखभाल करने वालों को सही पोजिशनिंग की तकनीक सीखनी चाहिए। समय पर की गई छोटी-छोटी सावधानियां मरीज के आराम, सुरक्षा और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होती हैं।
